नेताजी के परिजन फिर बोले- कांग्रेस ने करवाई थी बोस की जासूसी

Edited By ,Updated: 25 Sep, 2015 09:57 AM

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नेताजी सुभाष चंद्र बोस के अधिकांश परिजन विमान दुर्घटना की थ्यूरी को नहीं मानते। उनका कहना है कि कांग्रेस ने नेताजी के परिजनों की जासूसी करवाई थी।

कोलकाता: नेताजी सुभाष चंद्र बोस के अधिकांश परिजन विमान दुर्घटना की थ्यूरी को नहीं मानते। उनका कहना है कि कांग्रेस ने नेताजी के परिजनों की जासूसी करवाई थी। नेताजी के पौत्र सूर्य कुमार बोस ने उक्त बातें एक इंटरव्यू में कहीं। सूर्य कुमार ने कहा कि पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी द्वारा सार्वजनिक की गई नेताजी संबंधी फाइलों का प्रभाव यह होगा कि शीघ्र ही इससे संबंधित अन्य फाइलों को भी सार्वजनिक किया जाएगा।

ममता ने इन फाइलों को सार्वजनिक करने के लिए न केवल ठोस कदम उठाया बल्कि उन्हें डिजीटल रूप भी दिया ताकि लोग खुद इस बात को देख सकें कि स्वतंत्र भारत के बाद की तथाकथित कांग्रेस सरकारों द्वारा कैसे आपराधिक गतिविधियां की गई हैं। सूर्य कुमार ने कहा कि इन फाइलों से साफ हुआ है कि आजादी के बाद भी बोस परिवार के सदस्यों की जासूसी की गई, विशेषकर मेरे पिता अमिया नाथ बोस और चाचा सिसिर की। बोस परिवार से मिले पत्रों और दस्तावेजों की जांच करने से भी यह बात सामने आई है।

1949 में मेरे दादा शरत चन्द्र बोस को युद्ध संवाददाता और स्विट्जरलैंड के पत्रकार डा. लिल्ली अबेग द्वारा लिखे गए पत्र की जांच की गई थी। पत्रकार ने लिखा कि उनके जापानी और अन्य सूत्रों के अनुसार नेताजी की मृत्यु तथाकथित विमान दुर्घटना में नहीं हुई थी। जैसे-जैसे हम दस्तावेजों की जांच करेंगे इस संबंध में और तथ्य सामने आएंगे।

सूर्य कुमार ने कहा कि ममता ने संभवत: अगले वर्ष होने वाले विधानसभा चुनावों के मद्देनजर राजनीतिक लाभ उठाने के लिए ये दस्तावेज सार्वजनिक किए हों मगर मैं मुख्यमंत्री को इस बात का श्रेय देता हूं। मुझे विश्वास है कि वह पिछले एक वर्ष से इन फाइलों को सार्वजनिक करने की योजना बना रही थीं।

ममता की घोषणा के बाद कम समय में 64 फाइलों के 12,744 दस्तावेजों को डिजीटल बनाना संभव नहीं है। उन्होंने यह भी कहा कि डिजीटल की प्रक्रिया में कुछ फाइलें नष्ट हो गई हों। उन्होंने कहा कि फाइलों में जासूसी करवाने के पर्याप्त सबूत हैं। जवाहर लाल नेहरू और उनकी सरकार तथा बाद की कांग्रेस सरकारों को विश्वास नहीं था कि नेताजी की मृत्यु विमान दुर्घटना में हुई है इसलिए 1948 से लेकर 1968 तक नेताजी परिवार की जासूसी करवाई जाती रही।

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