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विस चुनावः राजस्थान-तेलंगाना में दिग्गजों की किस्मत EVM में बंद, 11 दिसंबर को आएंगे नतीजे

विस चुनावः राजस्थान-तेलंगाना में दिग्गजों की किस्मत EVM में बंद, 11 दिसंबर को आएंगे नतीजे

नेशनल डेस्क : राजस्थान और तेलंगाना विधानसभा चुनाव शांतिपूर्व ढंग से संपन्न हो गए। ईवीएम के खराब होने और अन्य छोटी-मोटी झड़पों के अलावा दोनों राज्यों में माहौल समान्य ही रहा। दिग्गज नेताओं और तेलुगु फिल्मी जगत की हस्तियों ने सुबह ही लाइनों में लगकर वोट डाला। अभिनेता से नेता बने चिरंजीवी, तेलुगू फिल्मों के लोकप्रिय अभिनेता नागार्जुन और ‘बाहुबली’ के निर्देशक एस एस राजमौली सुबह-सुबह वोट डालने वालों में शामिल रहे।
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तेलुगू फिल्मों के अभिनेता ‘‘जूनियर एनटीआर’’ जो टीडीपी के संस्थापक एनटी रामाराव के पोते हैं, वह भी कतार में खड़े नजर आए। वहीं राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे, सचिन पायलट और अशोक गहलोत केंद्रीय मंत्री कर्नल राज्यवर्धन सिंह राठौड़ ने भी वोट डाला। राजस्थान में 200 में से 199 विधानसभा सीटों के लिए मतदान हुआ तो वहीं तेलंगाना की 119 विधानसभा सीटों के लिए वोटिंग हुई। दोनों राज्यों में मतगणना 11 दिसंबर को मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और मिजोरम के साथ होगी। पांचों राज्यों में किस-किस के सिर पर ताज सजेगा, अब इस पर सभी की नजरें रहेंगी।

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राजस्थान
इस बार राज्य में भाजपा और कांग्रेस के बीच कड़ा मुकाबला रहा। जहां एक तरफ मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे अपनी कुर्सी में बचाने की जद्दोजहद में रहीं तो वहीं कांग्रेस फिर से सत्ता में वापिसी की तैयारी में रहा। अलवर में रामगढ़ विधानसभा सीट पर बसपा प्रत्याशी के निधन के बाद यहां चुनाव स्थगित किया गया है। राजस्थान में 199 सीटों के लिए हो मतदान में चार करोड़ 74 लाख 761 मतदाता अपने मताधिकार का प्रयोग किया। राज्य में 2274 उम्मीदवार मैदान में थे। इनमें प्रमुख राजनीतिक दल कांग्रेस के194, भाजपा 199, बहुजन समाज पार्टी के 189, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी का एक, मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) 28 एवं कम्युनिस्ट पार्टी आफॅ इंडिया (भाकपा)16, उम्मीदवार चुनाव मैदान में है।

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तेलंगाना
राज्य में 1,824 प्रत्याशियों की किस्मत का फैसला आज ईवीएम में बंद हो गया। मलकानगिरी विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक 42 प्रत्याशी मैदान में है जबकि बांसवाड क्षेत्र में सबस कम छह प्रत्याशी अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। तेलंगाना चुनाव भाजपा के लिए अग्निपरीक्षा होगी क्योंकि 2014 के विपरीत इस बार यह पार्टी अकेले चुनाव लड़ रही है। सत्तारूढ पार्टी के लिए 2019 लोकसभा चुनावों से पहले दक्षिण भारतीय राज्य में जड़ें मजबूत करने का मौका भी होगा।
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वर्ष 2014 में भाजपा, तेलुगू देशम पार्टी (टीडीपी) के साथ मिलकर चुनाव लड़ी थी और उसने कुल 119 में से पांच सीटों पर जीत दर्ज की थी। जीती गईं सभी पांच सीटें उप्पल, मुशीराबाद, अंबरपेट, गोशामहल और एलबी नगर हैदराबाद में आती हैं। विधानसभा की ज्यादातर सीटों पर सत्तारूढ तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआएस) और कांग्रेस नीत महागठबंधन ‘प्रजाकुटमी’ के बीच सीधा मुकाबला नजर आ रहा है लेकिन भाजपा भी 2014 में बने देश के सबसे नए राज्य में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने और अपनी सीटों की संख्या बढाने के प्रयास में है। हालांकि भाजपा और कांग्रेस दोनों ने ही यहां पर ज्यादा चुनावी रैलियां नहीं कीं लेकिन यहां भी कांटे की टक्कर जैसा ही मुकाबला है।
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