Jio Credit में 49.9% हिस्सेदारी खरीदेगा बैंक ऑफ अमेरिका, 1.92 अरब डॉलर तक करेगा निवेश

Edited By Updated: 13 Aug, 2026 12:38 AM

bank of america to acquire 49 9 stake in jio credit 1 9 billion investment

जियो फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (जेएफएसएल) और बैंक ऑफ अमेरिका ने जियो क्रेडिट लिमिटेड में संयुक्त उद्यम के लिए समझौता किया है। जिओ फाइनेंशियल सर्विसेज ने बुधवार को प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि इसके तहत बैंक ऑफ अमेरिका जियो क्रेडिट में 49.9 फीसदी तक...

नेशनल डेस्क : जियो फाइनेंशियल सर्विसेज लिमिटेड (जेएफएसएल) और बैंक ऑफ अमेरिका ने जियो क्रेडिट लिमिटेड में संयुक्त उद्यम के लिए समझौता किया है। जिओ फाइनेंशियल सर्विसेज ने बुधवार को प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि इसके तहत बैंक ऑफ अमेरिका जियो क्रेडिट में 49.9 फीसदी तक हिस्सेदारी ले सकता है। इक्विटी शेयर और वारंट पूरी तरह सब्सक्राइब होने पर बैंक का कुल निवेश 18,268 करोड़ रुपये तक होगा। सौदे को नियामकीय और वैधानिक मंजूरियां मिलनी अभी शेष हैं।

पहले चरण में बैंक ऑफ अमेरिका को जियो क्रेडिट में 26.5 फीसदी इक्विटी हिस्सेदारी मिलेगी। वारंट के इस्तेमाल के बाद यह बढ़कर 49.9 फीसदी तक पहुंच सकती है। सौदे के बाद जियो क्रेडिट के बोडर् में जेएफएसएल और बैंक ऑफ अमेरिका का समान प्रतिनिधित्व होगा, जबकि कंपनी की मौजूदा प्रबंधन टीम कारोबार और रणनीति संभालती रहेगी। गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी जियो क्रेडिट का एसेट अंडर मैनेजमेंट (एयूएम) महज दो साल में 30,667 करोड़ रुपये पहुंच गया है। कंपनी रिटेल, कमर्शियल और सप्लाई चेन फाइनेंस सहित विभिन्न ऋण उत्पादों पर काम करती है।

रिलायंस इंडस्ट्रीज के चेयरमैन एवं प्रबंध निदेशक मुकेश अंबानी ने कहा, 'विकसित भारत की यात्रा के लिए ऐसा वित्तीय तंत्र जरूरी है जो बड़े पैमाने, भरोसे और समावेश पर आधारित हो। जियो फाइनेंशियल सर्विसेज और बैंक ऑफ अमेरिका की साझेदारी प्रौद्योगिकी और वैश्विक विशेषज्ञता के जरिये भारतीयों के लिए कर्ज को अधिक आसान, पारदर्शी और सुलभ बनाने की दिशा में अहम कदम है।'

बैंक ऑफ अमेरिका के चेयर और मुख्य कार्यकारी अधिकारी ब्रायन मोयनिहान ने कहा, 'भारत दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण बढ़ते बाजारों में से एक है और यह निवेश उसके भविष्य में हमारे भरोसे को दर्शाता है। जियो फाइनेंशियल ने बहुत कम समय में उल्लेखनीय विस्तार किया है। दोनों कंपनियों की ताकत मिलकर वित्तीय सेवाओं की पहुंच बढ़ाने और भारत की आर्थिक वृद्धि को समर्थन देने में मदद करेगी।'

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