Edited By Anu Malhotra,Updated: 27 Jun, 2026 09:26 AM

Bhojpur Encounter Case: बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बेलौटी गांव में हुए भरत भूषण तिवारी के कथित पुलिस एनकाउंटर का मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। अब इस पूरे मामले में नया एंगल सामने आया है... दरअसल, मृतक की मां आशा देवी ने...
Bhojpur Encounter Case: बिहार के भोजपुर जिले के शाहपुर थाना क्षेत्र के बेलौटी गांव में हुए भरत भूषण तिवारी के कथित पुलिस एनकाउंटर का मामला लगातार सुर्खियों में बना हुआ है। अब इस पूरे मामले में नया एंगल सामने आया है... दरअसल, मृतक की मां आशा देवी ने भोजपुर के पुलिस अधीक्षक (SP) पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उनका कहना है कि पुलिस अधिकारी उनके घर पहुंचे और परिवार पर मामले को आगे न बढ़ाने का दबाव बनाया।
'मीडिया से बात नहीं करने की दी सलाह'
आशा देवी का कहना है कि घटना के करीब 8 दिन बाद SP उनके घर आए। उनके अनुसार, उस समय कोई महिला पुलिसकर्मी भी साथ नहीं थी। उन्होंने आरोप लगाया कि एसपी ने परिवार से कहा कि इस मामले को अब यहीं समाप्त कर दें और मीडिया में ज्यादा बयानबाजी न करें। परिवार का दावा है कि बातचीत के दौरान उन्हें डराने और चुप रहने की चेतावनी भी दी गई।
छोटे बेटे को अलग बुलाकर दी धमकी का आरोप
मृतक की मां ने यह भी आरोप लगाया कि एसपी ने उनके छोटे बेटे चंदन तिवारी को अलग बुलाकर बातचीत की। परिवार के मुताबिक, चंदन से कहा गया कि भरत अपराधी था और उसने पुलिस पर हथियार तान दिया था, इसलिए कार्रवाई करनी पड़ी। साथ ही यह भी कथित तौर पर कहा गया कि अगर वह भी इसी तरह बयान देता रहा तो उसका भी वही अंजाम हो सकता है।
एसपी ने आरोपों को बताया निराधार
परिवार की ओर से लगाए गए आरोपों पर भोजपुर के एसपी ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए सभी दावों को पूरी तरह गलत बताया है। उन्होंने कहा कि पुलिस इस मामले में चल रही न्यायिक जांच में पूरा सहयोग कर रही है और सभी तथ्यों की निष्पक्ष जांच कराई जा रही है। उनका कहना है कि लगाए गए आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है।
सरकार से मांग
भरत तिवारी के परिजन लगातार इस एनकाउंटर को फर्जी बता रहे हैं। परिवार का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच कर दोषी अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई नहीं हुई तो उनका आंदोलन और तेज होगा। उन्होंने राज्य सरकार से न्याय दिलाने की मांग करते हुए कहा कि अगर इंसाफ नहीं मिला तो इसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी।
पुलिस अधिकारियों पर दर्ज हुई एफआईआर
इस मामले में पहले ही शाहपुर थाने में जगदीशपुर के अनुमंडल पुलिस पदाधिकारी (एसडीपीओ), शाहपुर थाना प्रभारी और एनकाउंटर में शामिल अन्य पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जा चुकी है। यह कार्रवाई परिजनों की शिकायत और मामले को लेकर उठे सवालों के बाद की गई है।
भरत तिवारी की मौत के बाद यह मामला इसलिए भी सुर्खियों में आया क्योंकि परिजनों का दावा है कि एनकाउंटर के दौरान वह फेसबुक पर लाइव था। उनका कहना है कि भरत ने पुलिस के सामने अपना हथियार फेंककर आत्मसमर्पण कर दिया था। ऐसे में सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि यदि उसने सरेंडर कर दिया था तो बाद में गोली चलाने की जरूरत क्यों पड़ी।
फिलहाल इस पूरे मामले की न्यायिक जांच जारी है। जांच रिपोर्ट आने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि एनकाउंटर किन परिस्थितियों में हुआ और परिजनों तथा पुलिस के दावों में कितनी सच्चाई है। मामले पर पूरे बिहार की नजर बनी हुई है।