सीबीआई v/s सीबीआई: सुप्रीम अदालत बताएगी, कौन है सुप्रीम

Edited By Anil dev,Updated: 12 Nov, 2018 12:16 PM

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सीबीआई मामले में आज एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई जिसमें केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) का पक्ष सुना गया। सीवीसी ने सील बंद लिफाफे में कोर्ट में 2 कापियां सौंपी। इस मामले की अगली सुनवाई अब शुक्रवार को होगी।

नईदिल्ली: सीबीआई मामले में आज एक बार फिर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई हुई जिसमें केंद्रीय सतर्कता आयोग (सीवीसी) का पक्ष सुना गया। सीवीसी ने सील बंद लिफाफे में कोर्ट में 2 कापियां सौंपी। इस मामले की अगली सुनवाई अब शुक्रवार को होगी।  वहीं सीबीआई निदेशक पर आरोप है कि उन्होंने कारोबारी सतीश सना से 2 करोड़ की रिश्वत ली है, यही नहीं उन्होंने जानबूझ कर सना से स्पेशल निदेशक के खिलाफ शिकायत दिलवाई और कई जांचों में हस्तक्षेप किया। लेकिन ये आरोप कितने सही हैं इसकी रिपोर्ट सीवीसी ने तैयार कर ली है। हालांकि सूत्रों के मुताबिक सीवीसी को आलोक वर्मा के खिलाफ 2 करोड़ की रिश्वत से संबंधित सीधे तौर पर सबूत नहीं मिले हैं,लेकिन जांचों में हस्तक्षेप करने के मामले में आलोक वर्मा के खिलाफ कुछ चीजें सीवीसी के पकड़ में आई हैं, इसलिए कयास है कि सीवीसी इस मामले में कोर्ट से और समय मांग सकती है। 

सीवीसी की रिपोर्ट के बाद सीवीसी ले सकता है कड़े फैसले
बताया जाता है कि कोर्ट सीवीसी की रिपोर्ट के बाद इस पर बड़ा निर्णय ले सकता है,जिससे एक तरफ जहां सरकार की मुश्किलें बढ़ेंगी वहीं अस्थाना के लिए दिक्कतें हो सकती हैं। सूत्रों के अनुसार रिपोर्ट में राकेश अस्थाना द्वारा दिए गए विभिन्न सबूतों की जांच हुई है। जिसमें अस्थाना द्वारा वर्मा पर लगाए गए आरोपों में कुछ भी ठोस सामने नहीं आया है। जांच में सीवीसी केवी चौधरी, विजिलेंस कमिश्नर शरद कुमार और टीएम बसीन भी शामिल थे। 

अगर सीवीसी की रिपोर्ट आलोक के पक्ष में आई तो ये होगा

  • आलोक वर्मा को दोबारा मिलेगी कुर्सी, लगी पाबंदी होगी खत्म
  • राकेश अस्थाना की बढेंग़ी मुश्किलें, जांच के बाद हो सकते हैं गिरफ्तार
  • केन्द्र सरकार के दावे होंगे गलत, होगी सरकार की किरकिरी 
  • विपक्ष को मिलेगा मुद्दा 


अगर आलोक वर्मा के  पक्ष में नहीं आई रिपोर्ट

  • सुप्रीम कोर्ट आलोक वर्मा को सीबीआई निदेशक पद से हटा सकता है
  • आलोक वर्मा के खिलाफ भी हो सकती है एफआईआर
  • अगर आलोक फंसते हैं तो अस्थाना को मिल सकती है क्लीन चिट 
  • सरकार का पक्ष होगा मजबूत 


क्यों अहम है ये सुनवाई 
सोमवार को होने वाली सुनवाई इसलिए अहम है, क्योंकि वर्मा केवी चौधरी की अध्यक्षता वाले सीवीसी के समक्ष पेश होते रहे हैं और समझा जाता है कि उन्होंने सीबीआई के विशेष निदेशक राकेश अस्थाना द्वारा अपने खिलाफ लगाए गए आरोपों को ङ्क्षबदुवार तरीके से नकारा है। यही नहीं अभी तक सीवीसी भी कुछ ऐसा पाने में नाकाम रही है जिससे आलोक के खिलाफ कोई कार्रवाई की जा सके। 

दो जजों की बेंच करेगी सुनवाई
इससे पहले सीबीआई रिश्वतखोरी मामले की सुनवाई चीफ जस्टिस रंजन गोगोई की अगुआई वाली तीन जजों की बेंच ने की थी। सोमवार को दो जजों की बेंच में सुनवाई होगी। मामले में चीफ जस्टिस गोगोई बीते शुक्रवार को कह चुके हैं कि सोमवार और शुक्रवार को शीर्ष कोर्ट में कई केसों की सुनवाई होती है, लिहाजा इस मामले की सुनवाई दो जजों की बेंच में होगी। 

23 अक्तूबर को हटाया था आलोक और अस्थाना को 
कारोबारी सतीश सना से रिश्वत संबंधी मामले में छिड़ी जंग से सरकार की हो रही किरकिरी के बीच 23 अक्तूबर को वर्मा के साथ विशेष निदेशक राकेश अस्थाना को केंद्र सरकार ने छुट्टी पर भेज दिया था। जिसके संबंध में आलोक वर्मा कोर्ट गए थे। मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सेवानिवृत्त न्यायधीश एके पटनायक की अध्यक्षता में दोनों अधिकारियों के मामले की जांच के आदेश सीवीसी को दिए थे और कहा था कि 10 दिन में अपनी रिपोर्ट कोर्ट को पेश करे। जिसके बाद कोर्ट तय करेगा कि केन्द्र सरकार का लिया गया निर्णय सही है या गलत। 

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