ट्रैक्टर परेड हिंसा: पुलिस एक्शन के डर से बॉर्डर पर रातभर जागते रहे प्रदर्शनकारी किसान

Edited By Seema Sharma,Updated: 28 Jan, 2021 10:25 AM

delhi violence farmers kept awake all night at the border fearing action

नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों ने गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में काफी उत्पात मचाया और हिंसा की। जिसके बाद दिल्ली सरकार उपद्रवियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। केंद्र सरकार और पुलिस के एक्शन के डर से किसान बुधवार सारी रात नहीं सो पाए।...

नेशनल डेस्क: नए कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों ने गणतंत्र दिवस पर दिल्ली में काफी उत्पात मचाया और हिंसा की। जिसके बाद दिल्ली सरकार उपद्रवियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। केंद्र सरकार और पुलिस के एक्शन के डर से किसान बुधवार सारी रात नहीं सो पाए। वहीं पर भी पुलिस देर रात तक गश्त करती रही। बॉर्डर पर डटे किसानों ने भी रात भर जाग कर काटी।

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राकेश टिकैत ने सरकार पर लगाए आरोप
भारतीय किसान यूनियन के प्रवक्ता राकेश टिकैत ने सरकार पर आरोप लगाए कि पुलिस ने रात को इनके कैंप की बिजली काट दी। टिकैत ने कहा सरकार किसानों में डर का माहौल बना रही है। इसलिए लोग सारी रात जागते रहे। टिकैत ने कहा कि सरकार किसान आंदोलन को अस्थिर करने की कोशिश कर रही है। टिकैत ने कहा कि लाल किसे पर जो हुआ उसमें हमारा हाथ नहीं है और जिसने भी यह किया है उसके खिलाफ कार्रवाई तो होनी ही चाहिए। बता दें कि बुधवार को दिल्ली पुलिस ने एक्शन लेते हुए उन सभी किसान नेताओं के खिलाफ एफआईआर दर्ज की जिन्होंने ट्रैक्टर रैली निकालने के लिए दी गई शर्तों वाले NOC पर दस्तखत किए थे। राकेश टिकैत भी उन किसानो नेताओं में शामिल हैं। 

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57 दिनों बाद चिल्ला बॉर्डर खोला गया
नए कृषि कानूनों को लेकर करीब दो माह से चिल्ला बॉर्डर पर धरना दे रहे भारतीय किसान यूनियन (भानू) ने बुधवार से अपना धरना वापस ले लिया। दिल्ली में मंगलवार को ट्रैक्टर परेड के दौरान हुई हिंसक घटना तथा राष्ट्र ध्वज के अपमान से आहत होकर भानु गुट ने धरना वापस लिया है। वहीं लोक शक्ति दल ने अपना विरोध-प्रदर्शन जारी रखने की बात कही है। नोएडा यातायात पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि बीकेयू (भानु) के विरोध वापस लेने के साथ ही चिल्ला बॉर्डर के माध्यम से दिल्ली-नोएडा मार्ग 57 दिनों के बाद यातायात के लिए फिर से खुल गया। मालूम हो कि भारतीय किसान यूनियन (भानू) नये कृषि कानूनों के विरोध में चिल्ला बॉर्डर पर धरना दे रहा था। इस धरने की वजह से नोएडा से दिल्ली जाने वाला रास्ता करीब 57 दिनों से बंद था। ठाकुर भानु प्रताप सिंह ने कहा कि भारत का झंडा तिरंगा है तथा वह तिरंगे का सम्मान करते हैं। उन्होंने कहा कि कल के घटनाक्रम से वह काफी आहत हैं। उन्होंने कहा कि 58 दिनों से जारी चिल्ला बॉर्डर का धरना वह खत्म कर रहे हैं।

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मंगलवार को 26 जनवरी के दिन किसानों ने लाल किले की प्राचीर पर चढ़कर तिरंगे का अपमान किया और दूसरे धर्म का झंडा लगाने के साथ ही किसानों का झंडा भी लगाया। इतना ही नहीं किसानों ने पुलिस वालों पर पत्थर और लाठियां बरसाई जिसके कारण 300 से ज्यादा पुलिसकर्मी घायल हो गए। किसानों ने लाल किेले के अंदर भी काफी तोड़फोड़ की।

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