गुजरात में 66 साल बाद पहली बार होगी फांसी, कोर्ट ने जारी किया डेथ वारंट

Edited By Yaspal,Updated: 06 Feb, 2020 10:01 PM

gujarat to be hanged for the first time after 66 years

गुजरात में 66 साल के लंबे अरसे के बाद पहली बार फांसी की सजा मिलने जा रही है। सूरत के लिम्बयत में साढ़े तीन साल की मासूम से दुष्कर्म करने और उसकी हत्या करनेके दोषी अनिल यादव की फांसी के लिए सेशन कोर्ट ने डेथ वारंट जारी कर

नेशनल डेस्कः गुजरात में 66 साल के लंबे अरसे के बाद पहली बार फांसी की सजा मिलने जा रही है। सूरत के लिम्बयत में साढ़े तीन साल की मासूम से दुष्कर्म करने और उसकी हत्या करनेके दोषी अनिल यादव की फांसी के लिए सेशन कोर्ट ने डेथ वारंट जारी कर दिया है। इससे पहले दोषी अनिल यादव ने अपनी फांसी की सजा को गुजरात हाईकोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि उसको कोई राहत नहीं मिली और हाईकोर्ट ने उसकी फांसी की सजा को बरकरार रखा था।

अब सूरत की सेशन कोर्ट ने दोषी अनिल यादव को फांसी देने के लिए डेथ वारंट जारी कर दिया है। अब 29 फरवरी की सुबह 4 बजकर 39 मिनट पर आरोपी अनिल यादव को फांसी दी जाएगी। इसके बाद से साबरमती जेल प्रशासन ने दोषी अनिल यादव को फांसी देने की तैयारी भी तेज कर दी है। साबरमती जेल के फांसी घर की मरम्मत की जा रही है, लेकिन गुजरात में जल्लाद की नियुक्ति नहीं की गई है। इसलिए उम्मीद जताई जा रही है कि निर्भया के आरोपियों को फांसी पर चढ़ाने के लिए बुलाए जाने वाले जल्लाद पवन ही इस आरोपी को भी फांसी पर चढ़ा सकते हैं।

29 फरवरी को दी जाएगी फांसी
अब अगर किसी प्रकार की कानूनी अड़चन नहीं आती है, तो दोषी अनिल यादव को 29 फरवरी को फांसी दे दी जाएगी। फांसी घर का इस्तेमाल पिछले 66 वर्षों से नहीं किया गया है, इसलिए इसके मरम्मत का काम हाउसिंग बोर्ड को दिया गया है। एक ओर हाउसिंग बोर्ड फांसी घर की मरम्मत कर रही है, तो दूसरी ओर फांसी के लिए डॉक्टर समेत पैनल को भी अंतिम रूप दिया जा रहा है।

साबरमती जेल में 1953 के बाद पहली बार किसी को फांसी दी जाएगी। अभी तक गुजरात के राजकोट जेल में 4 और वडोदरा जेल में 3 कैदियों को फांसी दी जा चुकी है। बता दें कि साल 1953 में काना परबत को आखिरी बार अहमदाबाद की साबरमती जेल में फांसी दी गई थी।

क्या था पूरा मामला
सूरत के लिम्बयत के एक दलित परिवार की साढ़े तीन साल की मासूम बच्ची 14 अक्‍टूबर 2018 की शाम को लापता हो गई थी। परिजनों ने बच्ची की काफी खोजबीन की, लेकिन उसका पता नहीं चल सका था। इसके बाद अगले दिन परिजनों ने लिम्बयत थाने में बच्ची की गुमशुदगी की रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसके बाद पुलिस को उसी दिन शाम के समय पड़ोस के एक मकान से बच्ची का शव बोरे में बंद मिला था।

पुलिस ने दुष्कर्म और हत्या के इस मामले में बिहार के रहने वाले अनिल यादव को गिरफ्तार किया था। पुलिस के सामने आरोपी अनिल यादव ने अपना जुर्म मान लिया था। इस मामले में सूरत की सेशन कोर्ट ने अनिल यादव को दोषी करार देते हुए फांसी की सजा सुनाई थी। अब अनिल यादव को फांसी देने का वक्त आ गया है। हालांकि अभी तक जल्लाद की नियुक्ति नहीं की गई है।

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