PM मोदी-शी जिनपिंग की मुलाकात से पहले बड़ा कदम: 6 साल बाद भारत-चीन के बीच सीधी फ्लाइट शुरू

Edited By Updated: 12 Sep, 2026 12:59 PM

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ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन-2026 में हिस्सा लेने के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत आगमन के बीच दोनों देशों के संबंधों में एक बड़ा और सकारात्मक मोड़ देखने को मिला है। चाइना सदर्न एयरलाइंस ने लगभग 6 सालों के लंबे अंतराल के बाद भारत और चीन के...

नई दिल्ली: ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन-2026 में हिस्सा लेने के लिए चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के भारत आगमन के बीच दोनों देशों के संबंधों में एक बड़ा और सकारात्मक मोड़ देखने को मिला है। चाइना सदर्न एयरलाइंस ने लगभग 6 सालों के लंबे अंतराल के बाद भारत और चीन के बीच अपनी सीधी यात्री उड़ान सेवाएं औपचारिक रूप से फिर से शुरू कर दी हैं।

भारत और चीन के बीच सीधी हवाई सेवा फिर से शुरू
चीनी मीडिया 'ग्लोबल टाइम्स' की रिपोर्ट के अनुसार, चाइना सदर्न एयरलाइंस 21 सितंबर से ग्वांगझू और नई दिल्ली के बीच अपनी नियमित यात्री हवाई सेवा (Regular Passenger Flights) फिर से शुरू करने जा रही है। कोविड-19 महामारी और सीमा विवाद (डोकलाम व गलवान गतिरोध) के बाद से यह सेवा पिछले छह वर्षों से बंद पड़ी थी।

एयरलाइन ने कहा कि इस सेवा के फिर से शुरू होने से दक्षिण एशिया में उसके आठ राउंड-ट्रिप रूट पर कुल ऑपरेशन बढ़कर हर हफ़्ते 100 से ज़्यादा फ्लाइट्स हो जाएंगे।  हाल के महीनों में भारत और चीन के बीच हवाई कनेक्टिविटी में धीरे-धीरे सुधार हुआ है। एयर चाइना ने अप्रैल में अपनी बीजिंग-दिल्ली सर्विस फिर से शुरू की, जबकि चाइना ईस्टर्न एयरलाइंस ने 18 अप्रैल को कुनमिंग और कोलकाता के बीच सीधी उड़ानें फिर से शुरू कीं। 

कोलकाता और शंघाई के बीच रोज़ाना नॉन-स्टॉप सर्विस शुरू 
भारतीय एयरलाइन इंडिगो ने भी 30 मार्च को कोलकाता और शंघाई के बीच रोज़ाना नॉन-स्टॉप सर्विस शुरू की। एयरलाइन ने पहले कोलकाता से ग्वांगझू के लिए उड़ानें फिर से शुरू की थीं और बाद में दिल्ली से चीनी शहर के लिए ऑपरेशन शुरू किया। सीधी उड़ानें फिर से शुरू करने का फ़ैसला भारत के विदेश मंत्रालय की मंज़ूरी के बाद लिया गया।  
 
शी के प्रतिनिधिमंडल में कम्युनिस्ट पार्टी ऑफ़ चाइना के पोलित ब्यूरो की स्थायी समिति के सदस्य और इसके जनरल ऑफ़िस के निदेशक काई ची और चीनी विदेश मंत्री वांग यी शामिल हैं। शिन्हुआ के अनुसार, उम्मीद है कि शी बिश्केक में शंघाई सहयोग संगठन समिट में अपनी बातों को आगे बढ़ाते हुए 'ग्लोबल साउथ' देशों के बीच सहयोग के प्रस्ताव पेश करेंगे। 

ब्रिक्स उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए व्यापार, वित्त, टेक्नोलॉजी, विकास और वैश्विक शासन पर तालमेल बिठाने का एक बड़ा मंच बन गया है। यह समूह 'ग्लोबल साउथ' के देशों के बीच ज़्यादा सहयोग को बढ़ावा देने का भी प्रयास करता है।

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