भारत-अमेरिका व्यापार समझौते को जल्द अंतिम रूप दिए जाने की उम्मीद, विदेश मंत्री का बड़ा दावा

Edited By Updated: 24 May, 2026 07:08 PM

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अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने रविवार को कहा कि भारत और अमेरिका बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते को जल्द ही अंतिम रूप दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह समझौता दोनों देशों के लिए ''लाभकारी'' और ''टिकाऊ'' होगा तथा भारत-अमेरिका के पारस्परिक हितों को...

नेशनल डेस्क : अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो ने रविवार को कहा कि भारत और अमेरिका बहुप्रतीक्षित व्यापार समझौते को जल्द ही अंतिम रूप दे सकते हैं। उन्होंने कहा कि यह समझौता दोनों देशों के लिए ''लाभकारी'' और ''टिकाऊ'' होगा तथा भारत-अमेरिका के पारस्परिक हितों को आगे बढ़ाएगा। भारत की चार दिवसीय यात्रा पर आए रूबियो ने विदेश मंत्री एस. जयशंकर के साथ व्यापक वार्ता के बाद यह टिप्पणी की। दोनों नेताओं के बीच व्यापार, दुर्लभ खनिज, ऊर्जा और रक्षा सहयोग बढ़ाने पर चर्चा हुई।

अमेरिकी विदेश मंत्री की यह पहली भारत यात्रा ऐसे समय हो रही है जब पिछले एक वर्ष में व्यापार और शुल्क (टैरिफ) नीतियों को लेकर दोनों देशों के संबंधों में तनाव देखने को मिला। रूबियो ने कहा, ''हमने काफी प्रगति की है और मुझे लगता है कि अमेरिका और भारत के बीच ऐसा व्यापार समझौता होगा जो लंबे समय तक कायम रहेगा, यह दोनों पक्षों के लिए लाभकारी होगा और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखेगा।'' उन्होंने कहा कि (अमेरिकी राष्ट्रपति) डोनाल्ड ट्रंप प्रशासन की व्यापार नीति किसी खास देश को निशाना बनाने के लिए नहीं है, बल्कि इसका उद्देश्य वैश्विक व्यापार व्यवस्था के प्रति अमेरिका के दृष्टिकोण को संतुलित करना है।

रूबियो ने कहा, ''राष्ट्रपति ने यह नहीं कहा कि भारत के साथ व्यापार को लेकर तनाव पैदा किया जाए। उन्होंने कहा कि अमेरिका की व्यापार व्यवस्था में असंतुलन है और इसे ठीक करने की जरूरत है।'' उन्होंने कहा कि यह मुद्दा केवल भारत तक सीमित नहीं है और दुनिया के लगभग हर देश के साथ बातचीत में व्यापार असंतुलन का विषय सामने आया है। रूबियो ने कहा, ''अच्छी बात यह है कि इस संतुलन प्रक्रिया के जरिए हम ऐसे व्यापारिक समझौतों तक पहुंचना चाहते हैं जो अमेरिका के साथ-साथ हमारे व्यापारिक साझेदारों के लिए भी लाभकारी हों। हमें उम्मीद है कि भारत के साथ भी ऐसा समझौता जल्द होगा।'' उन्होंने कहा कि अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि बहुत जल्द भारत आ सकते हैं ताकि प्रस्तावित व्यापार समझौते पर बातचीत को आगे बढ़ाया जा सके।

अमेरिकी विदेश मंत्री ने कहा कि अमेरिका के व्यापार संबंधी मुद्दे यूरोपीय संघ जैसे सहयोगी देशों के साथ भी रहे हैं। रूबियो ने कहा, ''भारत दुनिया की बड़ी अर्थव्यवस्थाओं में शामिल है और अमेरिका का प्रमुख व्यापारिक साझेदार भी है। ऐसे बड़े और व्यापक व्यापारिक संबंध वाले देश के साथ व्यापार असंतुलन को दूर करने की प्रक्रिया अधिक जटिल और व्यापक है।'' उन्होंने कहा कि भारत-अमेरिका संबंध मजबूत बने हुए हैं और ट्रंप प्रशासन के कार्यकाल के अंत तक इनके और अधिक मजबूत होने की उम्मीद है।

रूबियो ने अमेरिका समर्थित 'पैक्स सिलिका' पहल का भी उल्लेख किया। यह पहल महत्वपूर्ण खनिजों और कृत्रिम मेधा (एआई) आधारित आपूर्ति श्रृंखला को सुरक्षित और मजबूत बनाने के उद्देश्य से शुरू की गई थी। भारत इस पहल में फरवरी में शामिल हुआ था। चीन और पाकिस्तान के साथ अमेरिका के बढ़ते संबंधों को लेकर पूछे गए सवाल पर रूबियो ने कहा कि अमेरिका अन्य देशों के साथ अपने संबंधों को भारत के साथ अपनी रणनीतिक साझेदारी की कीमत पर नहीं देखता।

रूबियो ने कहा, ''जहां तक अन्य देशों के साथ हमारे संबंधों का सवाल है, हम दुनिया के कई देशों के साथ विभिन्न स्तरों पर सहयोग और संपर्क रखते हैं। भारत भी ऐसा करता है। जिम्मेदार देश इसी तरह अपने राष्ट्रीय हितों के अनुसार विभिन्न देशों के साथ संबंध बनाए रखते हैं।'' उन्होंने कहा, ''लेकिन मैं दुनिया के किसी भी देश के साथ अमेरिका के संबंधों को भारत के साथ हमारी रणनीतिक साझेदारी की कीमत पर नहीं देखता। जैसा कि मैंने पहले भी कहा, भारत के साथ हमारे संबंध अपने आप में बेहद महत्वपूर्ण हैं।'' जयशंकर ने भी व्यापार समझौते पर शीघ्र सहमति की आवश्यकता को रेखांकित किया।

उन्होंने कहा, ''आर्थिक मोर्चे पर हमने पारस्परिक और दोनों पक्षों के लिए लाभकारी अंतरिम व्यापार समझौते के अंतिम मसौदे को जल्द पूरा करने के महत्व पर चर्चा की।'' विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि यह समझौता व्यापक द्विपक्षीय व्यापार समझौते की दिशा में महत्वपूर्ण कदम होगा, जिसकी परिकल्पना प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के बीच फरवरी 2025 में वाशिंगटन में हुई वार्ता के दौरान की गई थी। 

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