भारत को इंडो​नेशिया से मिला खास गिफ्ट, चीन को लगा बड़ा झटका

Edited By Tanuja,Updated: 30 May, 2018 10:28 AM

indonesia gives india access to strategic port of sabang

इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर 5 दिवसीय  दौरे पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए सबसे खास इंडोनेशिया दौरा है। भारत को इंडो​नेशिया से एक खास गिफ्ट मिला है जिससे चीन की टैंशन बढ़ गई है...

 जकार्ताः इंडोनेशिया, मलेशिया और सिंगापुर 5 दिवसीय  दौरे पर गए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए सबसे खास इंडोनेशिया दौरा है। भारत को इंडो​नेशिया से एक खास गिफ्ट मिला है जिससे चीन की टैंशन बढ़ गई है। इंडोनेश‍िया ने यह गिफ्ट मोदी के दौरे से पहले ही भारत को दे दिया था। प्रधानमंत्री के रूप में मोदी की यह पहली इंडोनेशिया यात्रा है। राष्ट्रपति जोको विडोडो ने उन्‍हें न्योता दिया था।

 दरअसल  इंडो​नेशिया ने भारत को सामरिक रूप से महत्वपूर्ण सबांग बंदरगाह के आर्थिक और सैन्य इस्तेमाल की मंजूरी दे दी है जिसे चीन के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है।सामरिक दृष्टिकोण से से बेहद खास यह बंदरगाह द्वीप सबांग अंडमान निकोबार द्वीप समूह से 710 किलोमीटर की दूरी पर है।  चीन ने भी इसमें दिलचस्पी दिखाई थी।

ये द्वीप सुमात्रा के उत्तरी छोर पर है और मलक्का स्ट्रैट के भी क़रीब है।  एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत सबांग के पोर्ट और इकोनॉमिक ज़ोन में निवेश करेगा और एक अस्पताल भी बनाएगा।मलक्का स्ट्रैट को दुनिया के समंदर के रास्ते में छह में से वो एक पतला रास्ता माना जाता है। सैन्‍य और आर्थ‍िक रूप से यह काफी महत्‍वपूर्ण है।साथ ही इस रास्‍ते से कच्‍चे तेल से लदे जहाज भी गुज़रते हैं। यह जिस इलाके में यह पड़ता है उससे भारत का 40 फीसदी समुद्री व्यापार होता है। 

हालात ही कुछ ऐसे हैं कि कारोबार हो या सामरिक मामला, भारत और चीन एक-दूसरे के हर क़दम पर निगाह रखते हैं। इस बार क़दम भारत ने उठाया और प्रतिक्रिया चीन में हो रही है।  सामरिक लिहाज से देखें तो सबांग द्वीप के इस बंदरगाह की गहराई 40 मीटर की है जिसे पनडुब्बियों समेत हर तरह के जहाजों के ठहरने के लिए उपयुक्त माना जाता है। वर्ल्‍ड वॉर 2 के समय जापान ने इस द्वीप का इस्‍तेमाल अपने सैन्‍य ठ‍िकाने के रूप में किया था।साथ ही यहां अपने जहाज खड़े किए थे। तब चीन ने सबांग इलाके के इस्तेमाल और विकास के प्रति दिलचस्पी दिखाई थी।

बता दें कि भारत और इंडोनेशिया ने सबांग में सहयोग के प्रस्ताव पर 2014-15 में सोचना शुरू किया था।हिंद-प्रशांत महासागर क्षेत्र में चीन की बढ़ती पैठ ने भारत और इंडोनेशिया की चिंता बढ़ा दी थी और इसी वजह से सबांग को लेकर सहमति बनी है।  पंडजैतान ने चीन की वन बेल्ट एंड वन रोड इनिशिएटिव को लेकर फ़िक्र जताई थी।   इंडोनेश‍िया चीन के करीब भी है।वह चीन के वन बेल्‍ट और वन रोड इनिश‍िएटिव फोरम में हिस्‍सा ले चुका है,हालांकि इंडोनेश‍िया नहीं चाहता कि बीआरआई उसे कंट्रोल करे। 

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