जगन्नाथ रथ यात्रा: यहां आज भी धड़कता है भगवान श्रीकृष्ण का दिल, हर 12 साल में मंदिर में होता है कुछ खास

Edited By Seema Sharma,Updated: 04 Jul, 2022 02:00 PM

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भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा का शुभारंभ हो चुका है। 1 जुलाई से 12 जुलाई तक चलने वाली इस रथ यात्रा के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। इस बार बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा में शामिल हो रहे हैं।

नेशनल डेस्क: भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा का शुभारंभ हो चुका है। 1 जुलाई से 12 जुलाई तक चलने वाली इस रथ यात्रा के लिए सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम किए गए हैं। इस बार बड़ी संख्या में श्रद्धालु भगवान जगन्नाथ की रथ यात्रा में शामिल हो रहे हैं। दरअसल कोरोना के चलते भक्तों को पिछले दो सालों से इस रथ यात्रा में जाने की अनुमति नहीं थी। हिंदू पंचांग के मुताबिक, हर साल आषाढ़ मास की शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को रथ यात्रा निकाली जाती है। उड़ीसा के पुरी में स्थित भगवान जगन्नाथ मंदिर भारत के चार पवित्र धामों में से एक है। इस मंदिर में भगवान श्रीकृष्ण जगन्नाथ के रूप में अफने बड़े भाई बलभद्र और बहन सुभद्रा जी के साथ विराजते हैं।

इसलिए निकाली जाती है रथ यात्रा
मान्यता है कि एक बार बहन सुभद्रा ने भगवान जगन्नाथ से नगर देखने की इच्छा जताई। बहन की इस इच्छा को पूरा करने के लिए भगवान जगन्नाथ और बलभद्र उन्हें रथ पर बैठाकर नगर दिखाने निकल गए। इस दौरान वे अपनी मौसी के घर भी गए जो गुंडिचा में रहती थीं। तभी से इस रथ यात्रा की परंपरा का शुभारंभ हुआ।

जगन्नाथ मंदिर से जुड़े कुछ रहस्य
पुरी स्थित जगन्नाथ मंदिर में भगवान जगन्नाथ, बलभद्र और बहन सुभद्रा की काठ (लकड़ी) की मूर्तियां विराजमान हैं। मान्यता है कि जब भगवान कृष्ण ने अपना देह त्याग किया था तो पांडवों ने यहीं पर उनका अंतिम संस्कार किया था। भगवान कृष्ण का शरीर तो पंचतत्व में विलीन हो गया लेकिन उनका दिल जिंदा रहा। तभी से उनका दिल आज तक सुरक्षित है और यह भगवान जगन्नाथ की मूर्ति के अंदर आज भी धड़कता है।

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हर 12 साल में बदली जाती है मूर्तियां
हर 12 साल बाद भगवान जगन्नाथ , बलभद्र और उनकी बहन सुभद्रा की मूर्तियों को बदला जाता है। जब भी इन मूर्तियों को बदला जाता है उस समय पूरे शहर की बिजली बंद कर दी जाती है। इस दौरान मंदिर के आसपास पूरा अंधेरा कर दिया जाता है। मंदिर की सुरक्षा सीआरपीएफ के हवाले कर दी जाती है। किसी का भी मंदिर में प्रवेश वर्जित होता है। इन मूर्तियों बदलने के लिए सिर्फ एक पुजारी को मंदिर में जाने की अनुमति होती है। मूर्तियां बदलते समय पुजारी के हाथों में दस्ताने होते हैं और आंखों पर पट्टी बंधी होती है ताकि वह भी मूर्तियों को ना देख सकें।

आखिर में बदला जाता है ब्रह्म पदार्थ 
मूर्तियां बदलने के आखिर में सबसे अहम होता है ब्रह्म पदार्थ को पुरानी मूर्ति से नई में डालना। जब मूर्तियां बदली जाती हैं तब सबकुछ नया होता हैं लेकिन जो नहीं बदलता है वो है ब्रह्म पदार्थ। ब्रह्म पदार्थ कुछ और नहीं है बल्कि भगवान श्रीकृष्ण का दिल है। ब्रह्म पदार्थ को लेकर मान्यता है कि अगर इसे किसी ने भी देख लिया तो उसकी तुरंत मौत हो जाएगी। आज तक जिस भी पुजारी ने ब्रह्म पदार्थ को भगवान जगन्नाथ के पुराने विग्रह से नए विग्रह में स्थापित किया, उन्होंने बताया कि उस दौरान अलग ही अनुभव होता है। यह कुछ उछलता हुआ-सा महसूस होता है। पुजारियों ने कभी इसे देखा नहीं लेकिन उनका कहना है कि यह एक खरगोश जैसा लगता है जो उछल रहा होता है।

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