जम्मू-कश्मीर विधानसभा भंग: 08 बार लगा है राज्यपाल शासन

Edited By Anil dev,Updated: 22 Nov, 2018 12:13 PM

2014 में हुए चुनाव के बाद गठित विधानसभा को राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने भंग कर दिया। अभी इसका कार्यकाल 2020 तक बचा हुआ था। दिलचस्प बात ये है कि भंग करने का निर्णय उस समय किया गया, जब पीडीपी कांग्रेस के साथ गठबंधन करके सरकार बनाने की कोशिश में लगी थी।

नई दिल्ली: 2014 में हुए चुनाव के बाद गठित विधानसभा को राज्यपाल सत्यपाल मलिक ने भंग कर दिया। अभी इसका कार्यकाल 2020 तक बचा हुआ था। दिलचस्प बात ये है कि भंग करने का निर्णय उस समय किया गया, जब पीडीपी कांग्रेस के साथ गठबंधन करके सरकार बनाने की कोशिश में लगी थी। बता दें कि 2014 में भाजपा-पीडीपी के बीच हुआ गठबंधन जून 2018 में टूट गया था। तब से राज्यपाल शासन लगा हुआ था। इससे पहले जम्मू कश्मीर में सात बार राज्यपाल शासन लागू किया गया है।

26 मार्च-9 जुलाई 1977
 राज्यपाल: एलके झा (105 दिन)

पहली बार राज्यपाल शासन लगाया गया जब कांग्रेस ने शेख अब्दुल्ला की अगुवाई वाली गठबंधन सरकार से समर्थन वापस ले लिया।

6 मार्च-7 नवम्बर 1986
राज्यपाल: जगमोहन (246 दिन)

जुलाई 1984 में शेख अब्दुल्ला के दामाद गुलाम मुहम्मद शाह ने 26 कांग्रेस विधायकों और 12 एनसी दोषियों की मदद से डॉ. फारुक अब्दुल्ला की अध्यक्षता वाली सरकार को हटा दिया। मार्च 1986 में कांग्रेस ने शाह से समर्थन वापस लेकर राज्यपाल शासन के एक और दौर का मार्ग प्रशस्त किया।

19 जनवरी 1990-9 अक्तूबर 1996
राज्यपाल: जगमोहन (6 साल 264 दिन)

1990 में जम्मू-कश्मीर में राज्यपाल शासन का सबसे लंबा दौर जरूरी हो गया, जब राज्य में सशस्त्र संघर्ष शुरू हो गया। जगमोहन की नियुक्ति के खिलाफ फारूक अब्दुल्ला की अगुआई वाली सरकार ने इस्तीफा दिया तो राज्यपाल शासन लगाना पड़ा। ये अक्तूबर 1996 तक जारी रहा जब आतंकवाद के लंबे दौर के बाद विधानसभा चुनाव कराए गए। 

18 अक्तूबर-9 नवम्बर 2002
राज्यपाल: जीसी सक्सेना (15 दिन)

2002 के विधानसभा चुनाव के नतीजे के बाद जब कांगे्रस और पीडीपी ने सरकार गठन के लिए विधायक जुटाने का समय मांगा और फारूक अब्दुल्ला ने इस दौरान कार्यवाहक मुख्यमंत्री बनने से इंकार कर दिया तो 15 दिन के लिए राज्यपाल शासन लागू कर दिया गया।

11 जुलाई 2008-5 जनवरी 2009
राज्यपाल: एनएन वोहरा (178 दिन)

इस बार गुलाम नबी आजाद की अगुवाई वाली गठबंधन सरकार गिरने पर राज्यपाल शासन लगाया गया था। आजाद ने विधानसभा में विश्वास मत का सामना किए बिना मुख्यमंत्री के पद से इस्तीफा दे दिया। पीडीपी ने जून 2008 में अमरनाथ की भूमि हस्तांतरण के मुद्दे पर आजाद की सरकार से समर्थन वापस ले लिया था। 

9 जनवरी-1 मार्च 2015
राज्यपाल: एनएन वोहरा (51 दिन)

23 दिसंबर 2014 को विधानसभा चुनाव के नतीजे आने पर छठी बार राज्यपाल शासन लगा, जब कोई भी पार्टी या गठबंधन सरकार बनाने का दावा नहीं कर सकी और कार्यवाहक मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला ने अपने कर्तव्यों से मुक्त होने की बात कही। 

8 जनवरी-4 अप्रैल 2016
राज्यपाल: एनएन वोहरा (87 दिन)

तब 8 जनवरी 2016 को सीएम मुफ्ती मोहम्मद सईद की मौत के बाद सातवीं बार राज्यपाल शासन लागू किया गया। पीडीपी और बीजेपी ने चार दिवसीय शोक अवधि के अंत तक सरकार गठन की प्रक्रिया स्थगित कर दी थी।

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