संयुक्त राष्ट्र में हिंदी को आधिकारिक भाषा बनाने को मॉरीशस का समर्थन

Edited By Updated: 21 Aug, 2018 08:12 PM

mauritius support to make hindi as official language in the united nations

मॉरीशस की राजधानी पोर्ट लुइस में तीन दिवसीय 11वें हिंदी विश्व सम्मेलन का आज समापन हो गया। समापन समारोह के अवसर पर देश के मार्गदर्शक मंत्री अनिरुद्ध जगन्नाथ ने हिंदी और हिंदुस्तान पर भावुक भाषण दिया।

नेशनल डेस्कः मॉरीशस की राजधानी पोर्ट लुइस में तीन दिवसीय 11वें हिंदी विश्व सम्मेलन का आज समापन हो गया। समापन समारोह के अवसर पर देश के मार्गदर्शक मंत्री अनिरुद्ध जगन्नाथ ने हिंदी और हिंदुस्तान पर भावुक भाषण दिया। उन्होंने कहा कि यदि हम भारत माता का माता कहते हैं तो मॉरीशस उस माता का पुत्र है। उन्होंने मॉरीशस की आजादी में हिंदी का योगदान का जिक्र करते हुए कहा कि हिंदी को संयुक्त राष्ट्र संघ की आधिकारिक भाषा बनाने की कोशिशों में मॉरीशस पूरी तरह अपना समर्थन देगा।

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मॉरीशस के राष्ट्रपित और पीएम पदों पर रह चुके जग्गनाथ ने कहा कि अब समय आ गया है। जब अन्य भाषाओं की तरह हिंदी को भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर स्थान मिलना चाहिए। उन्होंने अपने देश के सामाजिक, आर्थिक और राजनीतिक विकास में हिंदी की अहम भूमिका को स्वीकार करते हुए कहा मॉरीशस में विश्व हिंदी मंत्रालय की स्थापना पर खुशी जताई।

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जग्गनाथ ने कहा कि विश्व हिंदी सम्मेलन से दोनों देशों के बीच रिश्ते और अधिक मजबूत हुए हैं। उन्होंने कहा कि जब से उन्होंने देश की सत्ता संभाली है। हमेशा हिंदी को आगे बढ़ाने की कोशिश की है। अनिरुद्ध जग्गनाथ ने कहा कि भारत माता का पुत्र मॉरीशस अपना कर्तव्य अच्छी तरह से समझता है। हमारे पूर्वज मजदूरों की तरह मॉरीशस आए थे, तब उनके पास सिर्फ अपनी भाषा और संस्कृति ही थी, लेकिन अपने खून-पसीने से उन्होंने अपने परिवारों को पालने के साथ-साथ मॉरीशस को आजादी दिलाने में भी मदद की और अब अगली पीढ़ी देश को आगे ले जाने की कोशिश में है।

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हिंदी साहित्य में सास्कृतिक चिंदन पर हुई अनुशंसा में साहित्य और संस्कृति को मजबूत करने से लेकर भारत पर हो रहे सांस्कृतिक हमलों पर चिंता व्यक्त की गई। इसके अलावा ऐसे हमलों से निबटने के उपायों पर विचार करने को कहा गया। कार्यक्रम में तुलसीदास की कृतियों पर आधारित सास्कृतिक ग्रांम बनाने की अनुशंसा की गई।

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संचार माध्यम और भारतीय संस्कृति के सत्र पर आधारित अनुशंसा सत्यदेव टेंडर ने पेश की। इसमें उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के नाम पर हिंदी पत्रकारिता का विश्वविद्यालय बनाने की भी बात की। इसके अलावा वाजपेयी के पूरे लेखन को एक साथ प्रकाशन करने का प्रस्ताव भी दिया गया।

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