जबलपुर हादसे में हुआ चौंकाने वाला खुलासा, फायर सेफ्टी के नहीं थे प्रावधान, NOC भी एक्स्पायर थी

Edited By Anil dev,Updated: 03 Aug, 2022 01:20 PM

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मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने मंगलवार को कहा कि जबलपुर के निजी अस्पताल में आग लगने की घटना की प्रारंभिक जांच के पता चला है कि उसके अग्नि अनापत्ति प्रमाण पत्र (फायर एनओसी) की अवधि समाप्त हो गई थी और वहां अग्नि सुरक्षा संबंधी कई कमियां...

नेशनल डेस्क: मध्य प्रदेश के गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा ने मंगलवार को कहा कि जबलपुर के निजी अस्पताल में आग लगने की घटना की प्रारंभिक जांच के पता चला है कि उसके अग्नि अनापत्ति प्रमाण पत्र (फायर एनओसी) की अवधि समाप्त हो गई थी और वहां अग्नि सुरक्षा संबंधी कई कमियां थीं। शाम को जबलपुर के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी रत्नेश कुरारिया ने इस अस्पताल का पंजीकरण रद्द कर दिया। मिश्रा ने कहा कि पुलिस ने अस्पताल के चार डॉक्टर और मालिकों के खिलाफ गैर-इरादतन हत्या का मामला दर्ज किया है और अस्पताल के प्रबंधक को गिरफ्तार कर लिया गया है। 

सोमवार दोपहर को हुए इस हादसे में चार मरीजों सहित आठ लोगों की मौत हो गई थी और पांच अन्य लोग घायल हो गए थे। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा कि चार डॉक्टर फरार हैं और पुलिस उसकी तलाश कर रही है। मिश्रा ने कहा कि प्रारंभिक जांच में पाया गया है कि न्यू लाइफ मल्टी स्पेशियलिटी अस्पताल का अग्नि अनापत्ति प्रमाण पत्र समाप्त हो गया था और अस्पताल की ओर से अग्नि सुरक्षा को लेकर कई कमियां पाई गई हैं। उन्होंने भोपाल में पत्रकारों से बातचीत में इस घटना को ‘ बेहद दुर्भाग्यपूर्ण' बताते हुए कहा कि जबलपुर की घटना में अस्पताल के चार डॉक्टरों और मालिकों के खिलाफ भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की संबंधित धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की गई है। मिश्रा ने बताया कि पुलिस ने जिन पांच लोगों के खिलाफ मामला दर्ज किया है, उनमें अस्पताल के निदेशक और मालिक डॉ. निशित गुप्ता, डॉ. सुरेश पटेल, डॉ. संजय पटेल, डॉ. संतोष सोनी और प्रबंधक राम सोनी शामिल हैं।

 मिश्रा ने कहा, ‘‘प्रथम दृष्टया अस्पताल में अग्नि सुरक्षा के संबंध में कई कमियां पाई गईं। अस्पताल की आग संबंधी एनओसी की अवधि समाप्त हो गई थी। संभागीय आयुक्त की अध्यक्षता में एक जांच समिति गठित की गई है, जिसमें स्वास्थ्य और नगर नियोजन के संयुक्त निदेशक और इंजीनियर शामिल हैं। वे अग्नि सुरक्षा और स्वास्थ्य सहित विभिन्न मुद्दों पर एक रिपोर्ट पेश करेंगे।'' जबलपुर शहर के नगर पुलिस अधीक्षक (सीएसपी) अखिलेश गौर ने कहा कि विजय नगर पुलिस थाने में दर्ज प्राथमिकी में आईपीसी की धारा 34 भी शामिल है। उन्होंने कहा, ‘‘चारों डॉक्टर फरार हैं। पुलिस ने उन्हें पकड़ने के लिए चार दल गठित किए हैं।'' जबलपुर के जिलाधिकारी इलैयाराजा टी ने ‘पीटीआई भाषा' को बताया, ‘‘यहां सरकारी मेडिकल कॉलेज में उपचार करा रहे दो लोगों सहित पांचों घायलों की हालत स्थिर है।'' 

उन्होंने सोमवार को कहा था कि पांच घायलों में से दो की हालत गंभीर है और उन्हें जबलपुर के सरकारी मेडिकल कॉलेज के आईसीयू में भर्ती कराया गया है। इस हादसे में जिन लोगों की मौत हुई है, उनमें अस्पताल के तीन कर्मचारी हैं। इनकी पहचान महिमा जाटव (23), स्वाति वर्मा (24) और वीर सिंह (30) के रूप में हुई है। चार अन्य मृतकों की पहचान दुर्गेश सिंह (42), तन्मय विश्वकर्मा (19), सोनू यादव (26) और अनुसूया यादव (55) के तौर पर की गई है, जबकि एक महिला की शिनाख्त अभी तक नहीं हो सकी है। अधिकारियों ने बताया कि बिजली के शार्ट सर्किट के कारण आग लगी। आग की लपटें भूतल से शुरू हुईं और फिर पूरी इमारत को अपनी चपेट में ले लिया। 
 

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