Edited By Rahul Rana,Updated: 06 Aug, 2026 02:45 PM

बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने घोषणा की है कि वह हर हाल में अपने देश लौटेंगी। उन्होंने कहा कि चाहे उन्हें जेल जाना पड़े या किसी भी तरह की मुश्किल का सामना करना पड़े, लेकिन वह दिसंबर में बांग्लादेश वापस जाएंगी।
नई दिल्ली: बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने घोषणा की है कि वह हर हाल में अपने देश लौटेंगी। उन्होंने कहा कि चाहे उन्हें जेल जाना पड़े या किसी भी तरह की मुश्किल का सामना करना पड़े, लेकिन वह दिसंबर में बांग्लादेश वापस जाएंगी। पिछले करीब दो वर्षों से भारत में रह रहीं शेख हसीना ने एक वर्चुअल कार्यक्रम के दौरान यह घोषणा की।
दिल्ली के फॉरेन कॉरेस्पोंडेंट्स क्लब (FCC) में आयोजित वर्चुअल कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शेख हसीना ने कहा कि उन्हें अपने देश से दूर रहने के लिए मजबूर किया गया, लेकिन उनका रिश्ता बांग्लादेश की जनता से कभी नहीं टूटा। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य सत्ता हासिल करना नहीं, बल्कि बांग्लादेश को विकास और धर्मनिरपेक्षता की राह पर वापस लाना है।
2024 के आंदोलन पर क्या बोलीं?
शेख हसीना ने जुलाई-अगस्त 2024 में हुए आंदोलन को लेकर भी अपनी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने दावा किया कि यह सिर्फ छात्रों का शांतिपूर्ण आंदोलन नहीं था। उनके मुताबिक उनकी सरकार ने बातचीत और कानूनी प्रक्रिया के जरिए हालात संभालने की कोशिश की थी, लेकिन कुछ संगठित समूहों ने छात्रों के आंदोलन को हिंसक राजनीतिक अभियान में बदल दिया। उन्होंने कहा कि आज का बांग्लादेश उस देश जैसा नहीं रह गया है, जिसके लिए 1971 में लाखों लोगों ने बलिदान दिया था। उनका कहना था कि पिछले दो वर्षों में देश ने बेहद कठिन दौर देखा है।
अवामी लीग से प्रतिबंध हटाने की मांग
शेख हसीना ने अपनी पार्टी अवामी लीग पर लगे प्रतिबंध को हटाने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में सभी राजनीतिक दलों को चुनाव लड़ने का समान अधिकार मिलना चाहिए और राजनीतिक प्रतिस्पर्धा लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। अपने संबोधन में शेख हसीना ने बांग्लादेश के संस्थापक और अपने पिता शेख मुजीबुर रहमान को भी याद किया। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ कट्टरपंथी ताकतें उनके पिता की विरासत और पहचान को मिटाने की कोशिश कर रही हैं।
क्यों छोड़ना पड़ा था देश?
5 अगस्त 2024 को आरक्षण विरोधी आंदोलन के दौरान बांग्लादेश में हिंसा और राजनीतिक संकट गहरा गया था। हालात बिगड़ने के बाद शेख हसीना ने प्रधानमंत्री पद छोड़ दिया और सुरक्षा कारणों से उन्हें भारत लाया गया। तब से वह भारत में रह रही हैं। वर्चुअल कार्यक्रम के दौरान उनका वीडियो प्रसारित नहीं किया गया, केवल ऑडियो संदेश सुनाया गया। भारत सरकार की ओर से उनकी सुरक्षा व्यवस्था को लेकर आधिकारिक तौर पर कोई सार्वजनिक जानकारी नहीं दी गई है।