Edited By Anu Malhotra,Updated: 04 Jun, 2026 12:14 PM

Pancreatic cancer: पैंक्रियाटिक कैंसर को दुनिया के सबसे खतरनाक और जानलेवा कैंसरों में गिना जाता है। इस बीमारी में मरीजों के बचने की संभावना काफी कम होती है और इलाज के options भी सीमित रहे हैं। लेकिन अब एक नई दवा ने मरीजों और डॉक्टरों दोनों के लिए...
Pancreatic cancer: पैंक्रियाटिक कैंसर को दुनिया के सबसे खतरनाक और जानलेवा कैंसरों में गिना जाता है। इस बीमारी में मरीजों के बचने की संभावना काफी कम होती है और इलाज के options भी सीमित रहे हैं। लेकिन अब एक नई दवा ने मरीजों और डॉक्टरों दोनों के लिए उम्मीद की नई किरण दिखाई है। हाल ही में एक अंतरराष्ट्रीय क्लिनिकल ट्रायल में 'डाराक्सोनरासिब' नाम की नई दवा के शानदाार परिणाम सामने आए हैं। यह दवा गोली के रूप में दी जाती है और दिन में केवल एक बार लेने की जरूरत होती है। स्टडी के मुताबिक, जिन मरीजों का कैंसर पहले के इलाज के बावजूद बढ़ रहा था, उनमें इस दवा ने जीवित रहने की अवधि को लगभग दोगुना करने में मदद की।
मुंबई के टाटा मेमोरियल सेंटर में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल कैंसर विशेषज्ञ प्रोफेसर अनंत रामास्वामी के अनुसार, पैंक्रियाटिक कैंसर का इलाज लंबे समय से बड़ी चुनौती बना हुआ है। इसकी सबसे बड़ी वजह यह है कि अधिकांश मामलों में बीमारी का पता तब चलता है जब कैंसर काफी फैल चुका होता है। इसके अलावा अन्य कैंसरों की तरह इसमें टार्गेटेड थेरेपी और इम्यूनोथेरेपी को भी अब तक सीमित सफलता मिली है।
कैसे काम करती है नई दवा?
वैज्ञानिकों के अनुसार पैंक्रियाटिक कैंसर के कई मामलों में KRAS नामक जीन में बदलाव पाया जाता है। यह बदलाव कैंसर कोशिकाओं को तेजी से बढ़ने में मदद करता है। नई दवा इसी KRAS सिग्नल को रोकने का काम करती है, जिससे कैंसर की वृद्धि को नियंत्रित किया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यह दवा केवल पैंक्रियाटिक कैंसर तक सीमित नहीं रहेगी। भविष्य में इसका इस्तेमाल फेफड़ों, कोलन और अन्य KRAS-आधारित कैंसरों के इलाज में भी किया जा सकता है।
क्या हैं दुष्प्रभाव?
हालांकि दवा के परिणाम उत्साहजनक हैं, लेकिन कुछ मरीजों में इसके साइड इफेक्ट भी देखे गए। इनमें मतली, दस्त, मुंह में छाले, थकान, उल्टी और खून में हीमोग्लोबिन की कमी जैसी समस्याएं शामिल हैं। कुछ मरीजों में दवा की खुराक भी कम करनी पड़ी।
किन मरीजों को मिल सकता है फायदा?
-जिन्हें पैंक्रियाटिक कैंसर है।
-जो पहले कीमोथेरेपी ले चुके हैं।
-जिनकी बीमारी उपचार के बाद भी बढ़ रही है। भविष्य में इसे शुरुआती चरण के मरीजों और अन्य प्रकार के कैंसरों में भी इस्तेमाल किए जाने की संभावना है।
भारत में पैंक्रियाटिक कैंसर
हर साल लगभग 23,000 नए मामले सामने आते हैं। पुरुषों में यह महिलाओं की तुलना में थोड़ा अधिक पाया जाता है। प्रमुख जोखिम कारकों में डायबिटीज, मोटापा, अस्वस्थ जीवनशैली और क्रॉनिक पैंक्रियाटाइटिस शामिल हैं।
शुरुआती लक्षण
पैंक्रियाटिक कैंसर अक्सर शुरुआती चरण में पकड़ में नहीं आता। इसके सामान्य लक्षण हैं:
-पीलिया (Jaundice)
-पेट या पीठ में दर्द
-भूख कम लगना
-अचानक वजन घटना
-नई शुरुआत वाली डायबिटीज
भारत में हर साल हजारों लोग पैंक्रियाटिक कैंसर से प्रभावित होते हैं। हालांकि इसकी संख्या पश्चिमी देशों की तुलना में कम है, लेकिन मृत्यु दर काफी अधिक रहती है। विशेषज्ञों के अनुसार डायबिटीज, मोटापा, खराब जीवनशैली और लंबे समय तक अग्न्याशय की सूजन इसके प्रमुख जोखिम कारकों में शामिल हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि यह दवा कैंसर उपचार में प्रिसिजन मेडिसिन की दिशा में एक बड़ा कदम साबित हो सकती है। हालांकि सर्जरी, कीमोथेरेपी और रेडियोथेरेपी अभी भी उपचार की मुख्य आधारशिला हैं, लेकिन ऐसी नई लक्षित दवाएं भविष्य में मरीजों के लिए बेहतर और अधिक प्रभावी विकल्प बन सकती हैं।