जब पीएम मोदी ने गुनगुनाई फाकिर की गजल, 'वो कागज की कश्ती'

Edited By Seema Sharma,Updated: 27 May, 2018 03:24 PM

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परंपरागत भारतीय खेलों को बढ़ावा देने का आह्वान करते हुए आज कहा कि इनकी विविधता में राष्ट्रीय एकता मौजूद है और इनसे पीढिय़ों के अंतर (जेनेरेशन गैप) को समाप्त किया जा सकता है। मोदी ने आकाशवाणी पर अपने मासिक कार्यक्रम ‘मन...

नई दिल्लीः प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने परंपरागत भारतीय खेलों को बढ़ावा देने का आह्वान करते हुए आज कहा कि इनकी विविधता में राष्ट्रीय एकता मौजूद है और इनसे पीढिय़ों के अंतर (जेनेरेशन गैप) को समाप्त किया जा सकता है। मोदी ने आकाशवाणी पर अपने मासिक कार्यक्रम ‘मन की बात’ की 44वीं कड़ी में कहा, ‘कभी-कभी चिंता होती है कि कहीं हमारे ये खेल खो न जाएं और सिर्फ खेल ही नहीं खो जाएगा, कहीं बचपन ही खो जाएगा और फिर उस कविताओं को हम सुनते रहेंगे। उन्होंने इसके लिए शायर सुदर्शन फाकिर की मशहूर गजल -‘’यह दौलत भी ले लो, यह शौहरत भी ले लो, भले छीन लो मुझसे मेरी जवानी, मगर मुझको लौटा दो बचपन का सावन, वो कागज की कश्ती, वो बारिश का पानी का उल्लेख किया।

उन्होंने परंपरागत खेलों के संरक्षण करने और इनको बढ़ावा देने का आह्वान करते हुए कहा कि पारंपरिक खेलों को खोना नहीं है। आज आवश्यकता है कि स्कूल, मोहल्ले, युवा-मंडल आगे आकर इन खेलों को बढ़ावा दें। जनता के सहयोग से अपने पारंपरिक खेलों का एक बहुत बड़ा संग्रह बना सकते हैं। इन खेलों के वीडियो बनाए जा सकते हैं, जिनमें खेलों के नियम, खेलने के तरीके के बारे में दिखाया जा सकता है। ऐनिमेनेशन भी बनाई जा सकती हैं ताकि नई पीढ़ी को इनसे परिचित कराया जा सके। मोदी ने कहा कि इन खेलों को खेलने की कोई उम्र तो है ही नहीं। बच्चों से ले करके दादा-दादी, नाना-नानी जब सब खेलते हैं तो पीढिय़ों का अंतर समाप्त हो जाता है। साथ ही यह संस्कृति और परंपराओं का ज्ञान कराते हैं। कई खेल समाज, पर्यावरण आदि के बारे में भी जागरूक करते हैं।

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