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राजस्थानः बागी पार्टियां बनीं भाजपा-कांग्रेस की मुसीबत

राजस्थानः बागी पार्टियां बनीं भाजपा-कांग्रेस की मुसीबत

जोधपुर: राजस्थान में टिकट न मिलने से निर्दलीय के रूप में मैदान में ताल ठोक रहे विद्रोहियों से तो भाजपा और कांग्रेस जूझ ही रही हैं बागी हुए दिग्गज नेताओं की छोटी पार्टियों ने भी दोनों दलों के होश उड़ा दिए हैं। जातिगत आधार पर बने ये छोटे दल कांटे के मुकाबले में पासा किसी भी ओर पलटने का माद्दा रखते हैं। पूर्व शिक्षा मंत्री और आरएसएस से लंबे समय तक जुड़े रहे घनश्याम तिवाड़ी ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे से तीखे मतभेदों की वजह से भाजपा छोड़ भारत वाहिनी पार्टी नाम से नई पार्टी खड़ी कर दी। भावापा प्रदेश की सभी 200 विधानसभा सीटों पर चुनाव लड़ रही है। ऐसा ही हाल हनुमान बेनीवाल की नई पार्टी का है जो बराबर दोनों दलों की टेंशन बढ़ा रही है।
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ब्राह्मण समाज के बड़े नेता तिवाड़ी
ब्राह्मण समाज के बड़े नेता तिवाड़ी का कहना है कि इस बार भाजपा की हार तय है और उनकी पार्टी नई सरकार के गठन में अहम भूमिका निभाएगी। भाजपा और कांग्रेस के कई बागी नेता तिवाड़ी की पार्टी से मैदान में डटे हैं। तिवाड़ी की भारत वाहिनी पार्टी का प्रभाव उस 14-15 फीसदी वोट पर है ब्राह्मण समुदाय से ताल्लुक रखता है। इस पार्टी से जुड़े ब्राह्मण समुदाय का प्रदेश में 20-25 सीटों पर निर्णायक रुख माना जाता है।

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जाटों के बीच लोकप्रिय बेनीवाल
राजस्थान में जाटों के नेता और युवाओं के बीच लोकप्रिय बेनीवाल भी राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी बनाकर मैदान में डटे हैं। भले ही वह भाजपा छोड़कर आए हों लेकिन इस बार जाट समुदाय के समर्थन को लेकर आश्वस्त दिख रही कांग्रेस के लिए मुसीबत बन गए हैं। जयपुर यूनिवर्सिटी के छात्रसंघ अध्यक्ष रहे बेनीवाल छात्र राजनीति से लेकर विधानसभा तक आक्रामक तेवरों के लिए जाने जाते हैं। नागौर, बाड़मेर, बीकानेर, सीकर और जयपुर में किसानों की पांच हुंकार रैली कर बेनीवाल अपनी ताकत दिखा चुके हैं। जाट समुदाय नागौर, सीकर, बीकानेर सहित शेखावटी के कई जिलों की 60 से ज्यादा सीटों में परिणामों को प्रभावित कर सकता है। ऐसे में बेनीवाल की पार्टी 40-45 सीटों पर खेल बिगाड़ सकती है।

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बेनीवाल को एजेंट बता रहे बड़े दल
भाजपा और कांग्रेस दोनों ही घनश्याम तिवाड़ी को एक-दूसरे का एजेंट बताकर खारिज कर रहे हैं। अखिल भारतीय आदर्श जाट महासभा के अध्यक्ष प्रकाश बेनीवाल हनुमान बेनीवाल पर सवाल करते हैं कि उन्हें भाजपा का समर्थन हासिल है, आखिर एक किसान नेता कैसे हेलीकॉप्टर से प्रचार कर सकता है। राजस्थान जाट महासभा के नेता जीआर पूनिया मानते हैं कि बेनीवाल कुछ सीटों पर कांग्रेस को नुकसान पहुंचा सकते हैं। घनश्याम तिवाड़ी और बेनीवाल ने बसपा के साथ मिलकर राजस्थान में तीसरा मोर्चा खड़ा किया है और जातिगत आधार पर मजबूत सीटों पर एक-दूसरे को समर्थन दे रहे हैं। ये पार्टियां एक दूसरे के लिए रैली भी कर रही हैं। ऐसे में इस बार दोनों बड़े दलों के लिए चुनौती वो खुद नहीं ये छोटे दल भी हैं।

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