श्रीनगर के लाल चौक पर बना इतिहास, पहली बार "सबसे पहले देश’ टेलीविजन कॉन्क्लेव का हुआ लाइव प्रसारण

Edited By Tanuja,Updated: 06 Aug, 2022 05:07 PM

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पूरे देश में स्वतंत्र दिवस की तैयारियां जोरों पर हैं । इस बार श्रीनगर के लाल चौक पर राष्ट्रीय ध्वज की आन-बान और शान ही निराली है।  श्रीनगर...

 नेशनल डेस्कः पूरे देश में स्वतंत्र दिवस की तैयारियां जोरों पर हैं । इस बार श्रीनगर के लाल चौक पर राष्ट्रीय ध्वज की आन-बान और शान ही निराली है।  श्रीनगर का लाल चौक पर हर तरफ तिरंगे ही तिरंगे लगे हैं । लाल चौक में क्लॉक टॉवर की प्रतीकात्मक पृष्ठभूमि निर्माण में इतिहास की मेजबानी कर रही थी। धारा 370 हटने के 3 साल पूरे होने पर  इस स्थल से पहला लाइव टेलीविजन कॉन्क्लेव, ‘द लाल चौक मंच’ का प्रसारण  किया गया । लाल चौक मंच की शुरूआत ‘कश्मीरियत’ को श्रद्धांजलि और ‘नया कश्मीर’ के लिए गति निर्माण के साथ हुई।

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कॉन्क्लेव ने रिमोट-लिंक, स्थानीय राजनीतिक और व्यापारिक नेताओं के साथ-साथ उद्यमियों, राज्य के भविष्य के सभी हितधारकों के माध्यम से नई दिल्ली की आवाजों को एक साथ लाया। इस दौरान केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह, डीजीपी जम्मू-कश्मीर दिलबाग सिंह, पूर्व डीजीपी जम्मू-कश्मीर एसपी वैद, पूर्व सेना प्रमुख जनरल जेजे सिंह ने कॉन्क्लेव पोडियम को संबोधित किया। कॉन्क्लेव ने राष्ट्रीय टीवी प्रसारक इंडिया न्यूज ‘सबसे पहले देश’ ‘इंडिया फर्स्ट’ के प्रमुख समर्पण की शुरूआत को भी चिह्नित किया। ‘सबसे पहले देश’ पर आधारित, विकास, बुनियादी ढांचे, कल के नेताओं, राजनीति, व्यापार, उद्यमिता और स्टार्ट-अप से लेकर चर्चाएं हुई।

 

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श्रीनगर के लाल चौक पर पूरे स्थल को भारतीय झंडों से सजाकर ‘हर घर तिरंगा’ अभियान को समर्पित किया गया। स्वतंत्र भारत के इतिहास में यह पहली बार था कि श्रीनगर के लाल चौक से समिट स्तर का सीधा प्रसारण किया गया। सुरक्षा का माहौल बनाने के लिए भारतीय सेना और जम्मू-कश्मीर पुलिस को श्रद्धांजलि दी गई।
अपनी बातचीत के दौरान केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह ने कहा, “हर घर तिरंगा सभी भारतीयों के लिए गर्व की बात है। यह हमारी विरासत से जुड़ने का एक तरीका है। झंडा सभी भारतीयों का है, चाहे वह किसी भी धर्म या राजनीतिक संबद्धता का हो।”

 

पूर्व सेना प्रमुख जनरल जे जे सिंह ने कॉन्क्लेव में   कहा, “चीन ‘दावा किए गए’ क्षेत्रों पर कब्जा करने के प्रयास कर रहा है। भारत को इस विश्वास को नहीं छोड़ना चाहिए कि अगर वह चीनियों के साथ नरम दृष्टिकोण की कोशिश करता है, तो मर्यादा में रहने को राजी हो जाएगा। सम्मेलन में बोलते हुए जम्मू-कश्मीर के डीजीपी दिलबाग सिंह ने कहा 1954 का हिंदी-चीनी भाई-भाई नारा भारत की सबसे बड़ी भूल थी। कश्मीर के युवाओं का भविष्य अब बदल रहा है। मैं कश्मीरी युवाओं को अपनी बेहतरी और जम्मू-कश्मीर की बेहतरी के लिए काम करने के लिए बधाई देता हूं।”

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जम्मू-कश्मीर के पूर्व डीजीपी एसपी वैद ने कॉन्क्लेव में  कहा, “तथ्य यह है कि आप एक लाइव टेलीकास्ट करने में सक्षम हो रहे हैं, यह कश्मीर के लिए नई आशा का एक उदाहरण है। आज आप जो देख रहे हैं वह कश्मीर से काफी अलग है। पर्यटन फलफूल रहा है, सात मेडिकल कॉलेज बनाए गए हैं, एम्स, आईआईटी, आईआईएम सभी कश्मीर आ रहे हैं, लगभग 50 हजार करोड़ रुपये का निवेश है, यूएई के एक प्रतिनिधिमंडल ने दौरा किया, यह सब एक नई उम्मीद पैदा कर रहा है

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