Film industry से आई बुरी खबर: सिनेमा की मशहूर एक्ट्रेस और डायरेक्टर ने दुनिया को कहा अलविदा

Edited By Updated: 01 Jul, 2026 12:38 PM

veteran theatre personality vijaya mehta passes away at the age of 92

भारतीय सिनेमा और थिएटर जगत के लिए एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। मराठी रंगमंच की रीढ़ मानी जाने वाली जानी-मानी अभिनेत्री, निर्देशक और निर्माता विजया मेहता का 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। उन्होंने अपने निवास स्थान पर अंतिम सांस ली। उनके निधन की...

Vijaya Mehta Passes Away : भारतीय सिनेमा और थिएटर जगत के लिए एक बेहद दुखद खबर सामने आई है। मराठी रंगमंच की रीढ़ मानी जाने वाली जानी-मानी अभिनेत्री, निर्देशक और निर्माता विजया मेहता का 92 वर्ष की आयु में निधन हो गया है। उन्होंने अपने निवास स्थान पर अंतिम सांस ली। उनके निधन की खबर से पूरी मराठी फिल्म इंडस्ट्री और भारतीय थिएटर जगत में शोक की लहर दौड़ गई है।

जानकारी के लिए बता दें कि विजया मेहता का जन्म 4 नवंबर 1934 को गुजरात के वडोदरा में हुआ था और उनका शुरुआती नाम विजया जयवंत था। उन्होंने मुंबई यूनिवर्सिटी से अपनी पढ़ाई पूरी की थी। कला के प्रति उनके जुनून ने उन्हें थियेटर के महान गुरुओं, इब्राहिम अल्काजी और आदि मर्जबान तक पहुंचाया जिनसे उन्होंने अभिनय और निर्देशन की बारीकियां सीखीं। मराठी थिएटर में उन्हें बेहद आदर और प्यार से ‘बाई’ कहकर पुकारा जाता था।

सिनेमा जगत में भी बिखेरा कला का जादू

सिर्फ मंच ही नहीं विजया मेहता ने बड़े पर्दे पर भी अपनी गहरी छाप छोड़ी। उन्होंने ‘रावसाहेब’ और ‘पेस्तनजी’ जैसी बेहतरीन फिल्मों का निर्देशन किया। वहीं, ‘पार्टी’ और ‘कलियुग’ जैसी क्लासिक फिल्मों में अपने दमदार अभिनय से दर्शकों का दिल जीता। दूरदर्शन के सुनहरे दौर में उनके द्वारा बनाए गए टीवी सीरियल ‘स्मृतिचित्रे’ और ‘लाइफलाइन’ काफी लोकप्रिय रहे थे।

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विजया मेहता कला के क्षेत्र में अपने कड़े अनुशासन और काम के प्रति अटूट समर्पण के लिए जानी जाती थीं। उनके मार्गदर्शन में अभिनय सीखकर नाना पाटेकर, विक्रम गोखले, नीना कुलकर्णी और अशोक सराफ जैसे कलाकारों ने अभिनय की दुनिया में एक बड़ा मुकाम हासिल किया। उन्होंने अपनी यादों और कला के सफर को समेटते हुए एक आत्मकथात्मक संस्मरण (Autobiography) भी लिखा था जिसका नाम ‘झिम्मा: आठवणींचा गोफ’ है।

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बता दें कि भारतीय रंगमंच और सिनेमा में उनके अमूल्य योगदान के लिए उन्हें भारत सरकार द्वारा पद्मश्री से सम्मानित किया गया था। इसके अलावा उन्हें संगीत नाटक अकादमी पुरस्कार, कालिदास सम्मान, विष्णुदास भवे सुवर्ण पदक और संगीत नाटक अकादमी टैगोर रत्न जैसे कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा गया। फिल्म ‘रावसाहेब’ में उनके बेमिसाल अभिनय के लिए उन्हें राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार में सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेत्री का गौरव भी मिला था। उनके जाने से भारतीय रंगमंच का एक स्वर्णिम युग समाप्त हो गया है।

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