यहां सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील वर्कर्स की होती है अनदेखी, सैलरी सिर्फ 30 रुपए

Edited By Punjab Kesari,Updated: 29 Nov, 2017 03:12 PM

आज के दौर में जहां लाखों रु पए से गुजारा करना भी मुशिकल है तो वहीं एक वर्ग ऐसा भी है जो कि अनदेखी के कारण 30 रुपए प्रति महीना वेतन ले रहा है, जिसके कारण उनका सरकार के प्रति रोष बना हुआ है।

साम्बा : आज के दौर में जहां लाखों रु पए से गुजारा करना भी मुशिकल है तो वहीं एक वर्ग ऐसा भी है जो कि अनदेखी के कारण 30 रुपए प्रति महीना वेतन ले रहा है, जिसके कारण उनका सरकार के प्रति रोष बना हुआ है। सरकारी स्कूलों में पिछले 10 सालों से भी ज्यादा समय से काम कर रहे वाटर एवं मिड-डे मील वर्करों ने सरकार पर उनकी अनदेखी करने का आरोप लगाते हुए हीरानगर में धरना प्रदर्शन किया। वाटर एंड मिड डे मील वर्कर्स यूनियन के बैनर तले प्रदर्शन ने सरकार से उन्हें नियमित करने की मांग उठाते हुए न्यूनतम बेसिज लागू करने की मांग की। 


 यूनियन के प्रधान मोहम्मद यूसुफ भट्ट ने कहा कि सरकार की अनदेखी के चलते उन्हें परेशान होना पड़ रहा है। स्कूलों में पानी पिलाने वाले को 30 रु पए महीने का वेतन दिया जाता है, जबकि मिड-डे-मिल वर्करों को एक हजार लेकिन वह भी समय पर नहीं मिलता है। उन्होंने कहा कि सरकार ही उन्हें समझाए कि कोई कैसे 30 रुपए महीने वेतन से अपने घर का गुजारा कर सकता है। उन्होंने कहा कि 30 रुपए महीने वेतन भी कई सालों बाद नसीब होता है। इसलिए सरकार से मांग की जाती है कि इसके लिए कोई पॉलिसी तैयार की जाए।
 

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