Edited By Anu Malhotra,Updated: 07 Sep, 2026 09:16 AM

भारत के किसी भी सरकारी दफ्तर में आपने देखा होगा कि साहब की रिवॉल्विंग चेयर पर अकसर सफेद तौलिया होता है क्या आप जानते है कि ऐसा क्यों? इस चलन की शुरुआत के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी तो नहीं है, लेकिन इतिहासकार, रिटायर्ड अफसर और आम लोग इसे पुराने...
नई दिल्ली: भारत के किसी भी सरकारी दफ्तर में आपने देखा होगा कि साहब की रिवॉल्विंग चेयर पर अकसर सफेद तौलिया होता है क्या आप जानते है कि ऐसा क्यों? इस चलन की शुरुआत के बारे में कोई आधिकारिक जानकारी तो नहीं है, लेकिन इतिहासकार, रिटायर्ड अफसर और आम लोग इसे पुराने समय की मौसम की ज़रूरतों, साफ-सफाई की आदतों और औपनिवेशिक दौर के ऑफ़िस hierarchy का मिला-जुला नतीजा मानते हैं।
हाल ही में सोशल मीडिया पर इस बात पर फिर चर्चा हुई जब X पर एक पोस्ट शेयर कर एक यूज़र ने लिखा कि अफ़सरों की कुर्सियों पर तौलिया "ताक़त की एक आम निशानी" है। उन्होंने उत्तर प्रदेश की उन घटनाओं का भी ज़िक्र किया जहां नेताओं ने शिकायत की थी कि उन्हें तौलिया लगी कुर्सियां नहीं दी गईं, जबकि अफसर 'ऊंची, तौलिया लगी कुर्सियों' पर बैठते थे। बस इसी एक बात से सब कुछ साफ़ हो जाता है। ऊंची पीठ वाली सरकारी कुर्सी पर रखा सफ़ेद तौलिया सिर्फ कपड़ा नहीं है, यह ओहदे की निशानी है।
गर्मी और पसीने से शुरू हुई थी कहानी
एयर कंडीशनर (AC) और आधुनिक लग्जरी फर्नीचर आने से बहुत पहले, भारत की प्रचंड गर्मी में अफसरों को लंबा सफर तय करना पड़ता था। घोड़े, बग्गी, ट्रेन या गाड़ियों में यात्रा के बाद जब अफसर दफ्तर पहुंचते थे, तो पसीना और धूल-मिट्टी उनके साथ होती थी। ऐसे में कुर्सी पर रखा तौलिया एक साथ कई काम करता था.. जैसे कि चेहरा और गर्दन पोंछने के काम आता था। यह कुर्सी के महंगे गद्दे और रेक्सीन को खराब होने से बचाता था। सिर में तेल लगाने की भारतीय परंपरा के कारण कुर्सी की पीठ को गंदा होने से रोकता था। इसे रोजाना धोना और बदलना काफी आसान था। जो चीज ऑफिस के काम-काज को आसान बनाने के लिए शुरू हुई थी, धीरे-धीरे उसका एक और मकसद भी जुड़ गया।
सुविधा जब बन गई 'स्टेटस सिंबल'
ब्रिटिश हुकूमतके दौरान हर छोटी चीज से अफसर का ओहदा तय होता था। कमरे का साइज, टेबल की लकड़ी, यहां तक कि इस्तेमाल होने वाली स्याही का रंग भी पद के हिसाब से बदलता था। सफेद तौलिया भी धीरे-धीरे इसी सिस्टम में समा गया। बड़े अफसर की कुर्सी पर तौलिया बिछने लगा, जबकि जूनियर कर्मचारियों या आगंतुकों को बिना तौलिए की साधारण कुर्सियां दी जाती थीं। अंग्रेज़ तो चले गए, लेकिन नौकरशाही का यह 'तौलिया कल्चर' भारत में वहीं का वहीं रह गया।
सफेद रंग ही क्यों?
सफेद रंग को हमेशा से स्वच्छता, औपचारिकता और अनुशासन से जोड़कर देखा जाता है। सफेद कपड़े पर दाग तुरंत दिख जाता है, इसलिए इसे रोज बदलना पड़ता है। चमचमाता सफेद तौलिया अफसर की कुर्सी को पूरे कमरे में एक अलग और 'खास' पहचान देता है।
आधुनिक भारत में डिजिटल फ़ाइलें, शानदार ऑफ़िस और स्टार्टअप कल्चर है। फिर भी, प्रशासन की कई आदतें बनी हुई हैं क्योंकि सिस्टम खुद को दोहराते रहते हैं। नए अफ़सरों को पुराने कमरे, पुराना फ़र्नीचर और पुराने रीति-रिवाज़ विरासत में मिलते हैं।