क्या वक्त से पहले होंगे 2019 लोकसभा चुनाव?

Edited By Yaspal,Updated: 16 Jul, 2018 06:39 PM

will the 2019 lok sabha elections be held before the time

संसद का मानसून सत्र 18 जुलाई से शुरू हो रहा है। यह सत्र कई कारणों से अहम हो सकता है क्योंकि केंद्र में मोदी सरकार का यह आखिरी सत्र होने की अटकलें लगाई जा रही हैं और यह अटकलें बेवजह नहीं है, मौजूदा राजनीतिक स्थितियां और सियासी माहौल इसका संकेत दे रहे...

नेशनल डेस्कः संसद का मानसून सत्र 18 जुलाई से शुरू हो रहा है। यह सत्र कई कारणों से अहम हो सकता है क्योंकि केंद्र में मोदी सरकार का यह आखिरी सत्र होने की अटकलें लगाई जा रही हैं और यह अटकलें बेवजह नहीं है, मौजूदा राजनीतिक स्थितियां और सियासी माहौल इसका संकेत दे रहे हैं। बसपा प्रमुख मायावती शनिवार को प्रेस कॉन्फ्रेंस कर इस बारे आशंका भी जता चुकी हैं। अगर मोदी सरकार वक्त से पहले चुनाव कराने का फैसला करती है तो शीतकालीन सत्र की नौबत ही नहीं आएगी।

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केंद्र सरकार के कार्यकाल के अब केवल 10 महीने ही शेष हैं, जबकि चार महीने बाद ही देश के तीन बड़े राज्यों में विधानसभा चुनाव होने हैं। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उनकी बीजेपी लगातार ही एक देश, एक चुनाव की वकालत कर रही है। इसे देश की कुछ और सियासी पार्टियों का समर्थन भी हासिल हुआ है। हालांकि कांग्रेस समेत ज्यादातर विपक्षी दलों ने इसे लोकतंत्र के लिए खतरा बताया है। पीएम मोदी और उनकी पार्टी अगर इस दिशा में कदम बढ़ाती है तो उसके सामने अच्छा मौका आने वाला है और साल के अंत में वो एक साथ लोकसभा और करीब आधे राज्यों के विधानसभा चुनाव करा सकती है।

बीजेपी शासित प्रदेशों का कार्यकाल समाप्ति की ओर
बीजेपी शासित तीन राज्यों राजस्थान, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ और कांग्रेस शासित मिजोरम सरकार का कार्यकाल जनवरी 2019 में खत्म हो रहा है। इसके अलावा मई 2019 में मोदी सरकार का कार्यकाल भी पूरा हो जाएगा। माना जा रहा है कि एक साथ चुनाव के लिए सरकार इन चार राज्यों के विधानसभा चुनावों के साथ ही लोकसभा चुनाव भी करा सकती है।

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कई अन्य राज्य भी हो सकते हैं शामिल
इसमें उन राज्यों को भी शामिल किया जा सकता है, जिनका कार्यकाल उनके अंतिम साल में है। जैसे- हरियाणा, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, अरुणाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, झारखंड, ओडिशा और सिक्किम उनमें शामिल हैं। इस तरह केंद्र और 12 राज्यों  चुनाव एक साथ कराए जा सकते हैं। जम्मू-कश्मीर में जिस तरह की राजनीतिक स्थिति है, वहां भी विधानसभा को भंग कर साल के अंत में चुनाव कराए जा सकते हैं।

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मोदी सरकार का एक देश, एक चुनाव के पीछे तर्क है कि इससे संसाधन और वक्त की बचत होगी। ये भी बताया जा रहा है कि हर समय आचार संहिता लगे होने के चलते विकास कार्यों पर ब्रेक लगता है। लेकिन अगर मौजूदा राजनीतिक परिस्थितियां देखें तो यह योजना बीजेपी के लिए बेहद फायदेमंद लग रही है और वक्त से पहले आम चुनाव कराकर वो एक तीर से कई निशाने साध सकती है।

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