पंजाब में आतंक फैलाने के लिए इस्तेमाल किए जा रहे हैं गरीब गैर सिख नौजवान

Edited By Seema Sharma, Updated: 06 May, 2022 12:56 PM

poor non sikh youth are being used to spread terror in punjab

पंजाब में एक बार फिर से आतंकवाद दस्तक दे रहा है। पंजाब की हिंसक और आतंकियों के पकड़े जाने की हालिया घटनाएं चिंताजनक है। इसी बीच मीडिया की एक रिपोर्ट में खुफिया विभाग के सूत्रों का हवाला देते हुए खुलासा किया गया है

जालंधर (विशेष): पंजाब में एक बार फिर से आतंकवाद दस्तक दे रहा है। पंजाब की हिंसक और आतंकियों के पकड़े जाने की हालिया घटनाएं चिंताजनक है। इसी बीच मीडिया की एक रिपोर्ट में खुफिया विभाग के सूत्रों का हवाला देते हुए खुलासा किया गया है कि जिन लोगों को आतंक फैलाने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा है उनमें से अधिकांश लोग गरीब वित्तीय पृष्ठभूमि वाले गैर-सिख परिवारों से हैं। रिपोर्ट के मुताबिक आंतरिक सुरक्षा शाखा के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि गिरफ्तार किए गए युवक ज्यादातर बेरोजगार थे और उन्हें पैसे देने या विदेश में नौकरियां दिलाने का वादा किया गया था। खालिस्तान समर्थक मॉड्यूल का भंडाफोड़ करने की जांच से पता चला है कि विदेशी आधारित आतंकवादी और उनके स्थानीय आका राज्य के युवाओं को लुभाने के लिए धन का उपयोग कर रहे हैं, जिनमें वास्तव में वैचारिक विश्वास की कमी है।

 

विदेश में नौकरियों दिलाने का झांसा
पठानकोट ग्रेनेड विस्फोट में एसबीएस नगर पुलिस द्वारा पहचाने गए छह संदिग्धों में पाकिस्तान स्थित अंतर्राष्ट्रीय युवा सिख महासंघ (आईवाईएसएफ) के प्रमुख लखबीर सिंह रोडे भी शामिल है। वह इस घटना का मास्टरमाइंड था, जबकि चार बहुत गरीब परिवारों से संबंध रखते हैं। इन संदिग्धों से पूछताछ करने वाले पुलिस अधिकारियों का दावा है कि गुरदासपुर के खारल गांव के 30 वर्षीय गुरविंदर सिंह को दुबई में नौकरी देने और भारत से मुफ्त यात्रा का किया गया था, जबकि 19 वर्षीय रमन कुमार नशे का आदी था और उसे  मॉड्यूल में शामिल होने के लिए मामूली रकम 12,000 हजार रुपए  का भुगतान किया गया था।

 

गिरफ्तार किए युवा नहीं है कट्टरपंथी
इसी तरह सीआईए थाने के मामले में लुधियाना के कुलदीप कुमार उर्फ सनी के अलावा मॉड्यूल के सदस्य सामान्य युवक थे, जिन्हें पिछले साल 7 नवंबर को एसबीएस नगर में ग्रेनेड हमले को अंजाम देने के लिए प्रेरित किया था। पुलिस जांच में पाया गया कि सनी ने व्यक्तिगत संबंधों या दूर की दोस्ती का इस्तेमाल करके स्थानीय युवाओं को फुसलाया और उनकी भूमिका के अनुसार पैसे आवंटित किए थे। एसबीएस नगर के वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (एसएसपी) संदीप शर्मा ने मीडिया को दिए बयान में कहा कि जिन्होंने अपने आकाओं के मार्गदर्शन में कार्य किया, वे न तो कट्टरपंथी हैं और न ही वे खालिस्तान के बारे में ज्यादा जानते हैं। शर्मा ने कहा कि सनी को 15 हजार से 1 लाख रुपए तक के पैसे का प्रलोभन दिया गया था।

 

कई युवाओं की आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं
रूपनगर पुलिस चौकी पर बीते साल हुए हमले में हिमाचल प्रदेश के ऊना के एक गांव से गिरफ्तार किए गए लोगों की कोई आपराधिक पृष्ठभूमि नहीं थी और वे गरीब परिवारों के थे। 28 वर्षीय अमन जिसने कुएं में टिफिन बम छिपाया था, वह ऊना गांव के एक अन्य संदिग्ध का चचेरा भाई है, जो लुधियाना में रहने के दौरान सनी के संपर्क में आया था। जांच से पता चला है कि अमन ने एक स्थानीय कॉलेज से वाणिज्य स्नातक किया था और उसे विदेश प्रवास के अलावा 1 रुपए लाख देने का वादा किया गया था। प्राथमिकी के मुताबिक इस मामले में मुख्य साजिशकर्ता के तौर पर रिंडा की पहचान की गई है। वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कहना है कि पिछले साल सितंबर में फाजिल्का के जलालाबाद में मोटरसाइकिल विस्फोट के लिए आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ करने में भी बम लगाने वाले युवक प्रवीण कुमार का कोई कट्टरपंथी झुकाव नहीं था।

 

सोशल मीडिया से संपर्क में आते हैं युवा
पंजाब पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों का कहना है कि नया चलन पहले के चलन के विपरीत है जब इस तरह के मॉड्यूल चलाने वाले सोशल मीडिया के माध्यम से युवाओं को खालिस्तान समर्थक प्रचार के साथ कट्टरपंथी बनाते थे और फिर उन्हें आतंकी गतिविधियों को अंजाम देने के लिए प्रेरित करते थे। एक आंतरिक सुरक्षा विंग के अधिकारी ने अब यह देखा जा रहा है कि विदेश में बैठा मास्टरमाइंड पंजाब में अपने सहयोगी को निर्देश देता है, जो  स्थानीय युवाओं के साथियों पर दबाव, ड्रग्स या पैसे का उपयोग करके उन्हें मॉड्यूल में शामिल करता है। यह एक चिंताजनक प्रवृत्ति है जो निश्चित रूप से हमारे लिए एक बड़ी चुनौती है।

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