मौत दरवाजे पर आकर खड़ी रहेगी, यमदूत बैठे रहेंगे और...

Edited By ,Updated: 01 Sep, 2016 03:01 PM

motivational context

एक पक्षी तुम्हारे कमरे में घुस आता है। जिस द्वार से आया है, वह खुला है—इसीलिए भीतर आ सका है, द्वार बंद होता तो भीतर न आ सकता और फिर खिड़की से टकराता है, बंद खिड़की के कांच से टकराता है। चोंचें मारता है, पर फडफ़ड़ाता है। जितना फडफ़ड़ाता है, जितना...

एक पक्षी तुम्हारे कमरे में घुस आता है। जिस द्वार से आया है, वह खुला है—इसीलिए भीतर आ सका है, द्वार बंद होता तो भीतर न आ सकता और फिर खिड़की से टकराता है, बंद खिड़की के कांच से टकराता है। चोंचें मारता है, पर फडफ़ड़ाता है। जितना फडफ़ड़ाता है, जितना घबराता है, उतना बेचैन हुआ जाता है और खिड़की बंद है और टकराता है। लहूलुहान भी हो सकता है। पंख भी तोड़ ले सकता है। कभी तुमने बैठ कर सोचा, इस पक्षी का कैसा मूड है। अभी दरवाजे से आया है और दरवाजा खुला है, अभी उसी दरवाजे से वापस भी जा सकता है, मगर बंद खिड़की से टकरा रहा है। 
 
इस समय में शांडिल्य का सूत्र याद करना चाहिए। ऐसा ही आदमी है। तुम इस जगत में आए हो, तुम अपने को जगत में लाए नहीं हो, आए हो। तुमने अपने को निर्मित नहीं किया है। यह जीवन तुम्हारा कर्तव्य नहीं है, तुम्हारा कृत्य नहीं है, यह दान है, यह परमात्मा का प्रसाद है। यह द्वार खुला है, जहां से तुम आए। तुमसे किसने पूछा था जन्म से पहले कि महाराज, आप पैदा होना चाहते हैं? न किसी ने पूछा, न किसी ने तांछा। अचानक एक दिन तुमने पाया कि आंखें खुली हैं, श्वास चली है, जीवन की भेंट उतरी है। अचानक एक क्षण तुमने अपने को जीवित पाया। सारे जगत को रसविमुग्ध पाया। इसे तुमने चुपचाप स्वीकार कर लिया। तुमने कभी इस पर सोचा भी नहीं कि मुझसे किसी ने पूछा नहीं, मैंने निर्णय किया नहीं, यह जीवन सौगात है, प्रसाद है। यहीं से दरवाजा खुला, जहां से तुम आए और अब तुम प्रयास की बंद खिड़की पर सिर मार रहे हो, पंख तोड़े डाल रहे हो। जहां से आए हो, जैसे आए हो, उसी में सूत्र खोजो और ऐसा नहीं है कि तुम जब आए थे, तब प्रसाद मिला था, रोज प्रसाद मिल रहा है। 
 

यह श्वास तुम्हारे भीतर आता-जाता है, लेकिन तुम कहते हो-मैं श्वास ले रहा हूं। अहमन्यता की भी सीमा होती है। विक्षिप्त बातें मत कहो। तुम क्या सांस लोगे? सांस लेना तुम्हारे हाथ में होता, तो तुम मरोगे ही नहीं कभी फिर, तुम सांस लेते ही चले जाओगे। मौत दरवाजे पर आकर खड़ी रहेगी, यमदूत बैठे रहेंगे और तुम श्वास लेते रहोगे।  

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