उत्तराखंड में मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना शुरू

Edited By PTI News Agency,Updated: 28 May, 2020 08:43 PM

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देहरादून, 28 मई (भाषा) उत्तराखंड के उद्यमशील युवाओं और कोविड-19 के कारण राज्य में लौटे प्रवासी कामगारों को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करने हेतु मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना की शुरुआत की।

देहरादून, 28 मई (भाषा) उत्तराखंड के उद्यमशील युवाओं और कोविड-19 के कारण राज्य में लौटे प्रवासी कामगारों को स्वरोजगार के लिए प्रोत्साहित करने हेतु मुख्यमंत्री त्रिवेन्द्र सिंह रावत ने बृहस्पतिवार को मुख्यमंत्री स्वरोजगार योजना की शुरुआत की।

इस योजना के तहत कुशल और अकुशल दस्तकारों, हस्तशिल्पियों और बेरोजगार युवाओं को अपना व्यवसाय शुरू करने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा। योजना के तहत राष्ट्रीयकृत बैंकों, अनुसूचित वाणिज्यिक बैंकों और सहकारी बैंकों के माध्यम से लाभार्थियों को ऋण सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी।

यहां जारी एक सरकारी विज्ञप्ति के अनुसार, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग :एमएसएमई: विभाग द्वारा योजना के अन्तर्गत मार्जिन मनी की धनराशि अनुदान के रूप में उपलब्ध कराई जायेगी। विनिर्माण क्षेत्र में परियेाजना की अधिकतम लागत 25 लाख रुपये और सेवा व व्यवसाय क्षेत्र के लिए अधिकतम लागत 10 लाख रूपये होगी।

एमएसएमई नीति के अनुसार वर्गीकृत श्रेणी ए में मार्जिन मनी की अधिकतम सीमा कुल परियोजना लागत का 25 प्रतिशत, श्रेणी बी में 20 प्रतिशत तथा सी व डी श्रेणी में कुल परियोजना लागत का 15 प्रतिशत तक मार्जिन मनी के रूप में देय होगी।

उद्यम के दो वर्ष तक सफल संचालन के बाद मार्जिन मनी अनुदान के रूप में समायोजित की जायेगी। योजना के अन्तर्गत सामान्य श्रेणी के लाभार्थियों द्वारा परियोजना लागत का 10 प्रतिशत जबकि विशेष श्रेणी के लाभार्थियों को कुल परियोजना लागत का पांच प्रतिशत स्वयं के अंशदान के रूप में जमा करना होगा।

इस योजना के अन्तर्गत आवेदक की आयु कम से कम 18 वर्ष होनी चाहिए जबकि शैक्षिक योग्यता की कोई बाध्यता नहीं रखी गयी है। आवेदक अथवा उसके परिवार के सदस्य को योजना के तहत केवल एक बार लाभ मिलेगा। लाभार्थियों का चयन अधिक आवेदन प्राप्त होने पर व्यवहारिकता के आधार पर ‘पहले आओ पहले पाओ’ के आधार पर किया जायेगा।

योजना के क्रियान्वयन के लिए एमएसएमई विभाग के नियंत्रणाधीन उद्योग निदेशालय को नोडल विभाग बनाया गया है जबकि जिला स्तर पर योजना का क्रियान्वयन जिला उद्योग केन्द्र द्वारा किया जायेगा।
मुख्यमंत्री रावत ने अधिकारियों को इस योजना की जानकारी गांव-गांव तक पहुंचाने के निर्देश देते हुए कहा कि जन प्रतिनिधियों एवं जिलास्तरीय अधिकारियों के माध्यम से योजना का व्यापक प्रचार-प्रसार किया जाये जिससे अधिक से अधिक लोग इस योजना का लाभ उठा सकें ।


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