‘कोड ऑफ कंडक्ट लागू’ पांच राज्यों की चुनाव तारीखें घोषित

Edited By ,Updated: 09 Jan, 2022 05:52 AM

election dates of five states declared  code of conduct applicable

देश में कोरोना के बढ़ रहे प्रकोप के चलते 2 जनवरी को पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी ने चुनावी रैलियों पर रोक लगाने तथा 5 जनवरी को उत्तराखंड हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को चुनाव प्रचार के लिए

देश में कोरोना के बढ़ रहे प्रकोप के चलते 2 जनवरी को पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस.वाई. कुरैशी ने चुनावी रैलियों पर रोक लगाने तथा 5 जनवरी को उत्तराखंड हाईकोर्ट ने चुनाव आयोग को चुनाव प्रचार के लिए वर्चुअल रैलियां तथा ऑनलाइन वोटिंग पर विचार करने की सलाह दी थी। 

इस समय जबकि आम जनता के अलावा महाराष्ट्र के 10 मंत्री, सांसद मनोज तिवारी, अरविंद केजरीवाल और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी सहित बड़ी संख्या में केंद्रीय मंत्री भी कोरोना की चपेट में आए हुए हैं, चुनाव आयोग ने कोरोना के सुरक्षा नियम सख्तीपूर्वक लागू करने के दिशा-निर्देशों के साथ 5 राज्यों उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, मणिपुर और गोवा के चुनाव कार्यक्रम की घोषणा करके कोड ऑफ कंडक्ट (आदर्श चुनाव आचार संहिता) भी लागू कर दिया है। 

इसके अनुसार उत्तर प्रदेश में 10 फरवरी से 7 चरणों में, मणिपुर में 27 फरवरी से 2 चरणों तथा अन्य 3 राज्यों पंजाब, गोवा और उत्तराखंड में एक-एक चरण में 14 फरवरी को कोरोना प्रोटोकोल के नियमों का पालन करते हुए चुनाव करवाए जाएंगे और सभी परिणाम 10 मार्च को घोषित किए जाएंगे। इसके लिए मतदान केंद्रों पर थर्मल स्कैनिंग, मास्क और सैनिटाइजर की व्यवस्था करने का आदेश देते हुए कोरोना नियमों का उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई करने का सम्बन्धित अधिकारियों को आदेश दिया गया है। 

चुनाव आयुक्त ने जहां प्रत्येक मतदान केंद्र पर मतदाताओं की अधिकतम संख्या 1250 तय कर दी है, वहीं मतदान का समय 1 घंटा बढ़ाने के अलावा 80 वर्ष से अधिक आयु के मतदाताओं के लिए व्हीलचेयर तथा दिव्यांगों और कोविड प्रभावितों के लिए पोस्टल बैलेट की व्यवस्था करने को कहा है। चुनाव आयोग ने रात 8 बजे से सुबह 8 बजे के बीच किसी प्रकार की चुनावी रैली न करने का आदेश दिया है तथा घर-घर जाकर चुनाव प्रचार करने वालों की संख्या भी 5 तक सीमित कर दी है। 

आयोग ने 15 जनवरी तक सभी बड़ी रैलियों, रोड शो, साइकिल रैली, पद यात्रा और नुक्कड़ सभाओं पर रोक लगा दी है, जिसके बारे में रिव्यू मीटिंग के बाद अगला आदेश 15 जनवरी के बाद जारी किया जाएगा। यह पहला मौका है जब भारतीय चुनावों के इतिहास में चुनाव आयोग ने चुनाव प्रचार के लिए मोबाइल फोन एवं डिजिटल माध्यमों से वर्चुअल चुनावी रैलियां करने का सुझाव दिया और रैलियों पर पाबंदी लगाई है। 

कुछ समय पूर्व सुप्रीमकोर्ट ने कहा था कि राजनीतिक दलों को अपने चुनाव लड़ रहे उम्मीदवारों का आपराधिक रिकार्ड सार्वजनिक करना होगा। इसी पर अमल करके चुनाव आयोग ने सभी उम्मीदवारों को ऐसा करने को कहा है। चुनाव आयुक्त ने उम्मीदवारों के अधिकतम चुनावी खर्च की सीमा में भी वृद्धि कर दी है। छोटे राज्यों में विधानसभा चुनाव खर्च की सीमा 20 लाख रुपयों से बढ़ाकर 25 लाख रुपए कर दी गई है जबकि बड़े राज्यों में उम्मीदवार 28 लाख रुपए के स्थान पर अब 40 लाख रुपए खर्च कर सकेंगे। 

चुनावों में धन के इस्तेमाल और भ्रष्टाचार के प्रति शून्य सहनशीलता घोषित करते हुए इस मामले में सख्ती बरतने की बात कही गई है। राजनीतिक दलों को टैलीविजन पर दोगुना समय देने की घोषणा की गई है। मतगणना के बाद विजय जलूस निकालने पर भी रोक लगा दी गई है। मुख्य चुनाव आयुक्त ने चुनावों को ‘लोकतंत्र का उत्सव’ बताते हुए कहा है कि ‘‘इसमें मतदाताओं को पूरे उत्साह से भाग लेना चाहिए।’’ इसी के अनुरूप चुनावों में मतदाताओं की सुरक्षा और भागीदारी यकीनी बनाने के लिए उन्होंने उक्त आदेश जारी किए हैं। 

चुनाव आयोग के उक्त आदेशों पर कोरोना से बचाव संबंधी नियम कठोरतापूर्वक लागू करने से जहां महामारी के प्रकोप से किसी हद तक बचाव हो सकेगा, वहीं रात को रैलियों पर रोक लगने से झगड़े कम होंगे और उम्मीदवारों का चुनावी खर्च नियंत्रण में रहेगा। उम्मीदवारों का आपराधिक रिकार्ड सार्वजनिक करने से वे बेनकाब होंगे तथा मतदाताओं को अपना योग्य उम्मीदवार चुनने में सहायता मिलेगी। अत: आयोग के दिशा-निर्देशों का स्वागत किया जाना चाहिए। अब राजनीतिक दलों और उम्मीदवारों का कत्र्तव्य है कि वे इनका पालन यकीनी बनाएं।—विजय कुमार 
    

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