हीटवेव के कारण आलू-प्याज के बाद अब टमाटर की बढ़ी कीमतें

Edited By jyoti choudhary,Updated: 18 Jun, 2024 02:50 PM

after potatoes and onions now tomato prices have increased due to heatwave

कुछ दिन पहले प्याज की बढ़ती कीमतों को लेकर खबरें आई थीं, अब टमाटर की कीमत में इजाफे को लेकर खबरें आ रही हैं। देश के कई हिस्सों में टमाटर के भाव दो से तीन हफ्तों में दोगुने से ज्यादा हो गए हैं। टमाटर की कीमत में ये बढ़ोतरी महाराष्ट्र और दक्षिणी...

बिजनेस डेस्कः कुछ दिन पहले प्याज की बढ़ती कीमतों को लेकर खबरें आई थीं, अब टमाटर की कीमत में इजाफे को लेकर खबरें आ रही हैं। देश के कई हिस्सों में टमाटर के भाव दो से तीन हफ्तों में दोगुने से ज्यादा हो गए हैं। टमाटर की कीमत में ये बढ़ोतरी महाराष्ट्र और दक्षिणी राज्यों कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तमिलनाडु और केरल में देखने को मिली है, जिसका कारण भीषण गर्मी और प्रोडक्शन कम होना बताया जा रहा है।

इन राज्यों के थोक बाजारों में टमाटर की औसत कीमत 40-50 रुपए प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। हालांकि, भीषण गर्मी के कारण तेजी से पकने वाले टमाटरों की अधिक सप्लाई की वजह से उत्तर भारत के राज्यों में टमाटर के दाम में कोई इजाफा देखने को नहीं मिला है। जुलाई में स्थिति मुश्किल हो सकती है जब सप्लाई की कमी के कारण कीमतें आमतौर पर बढ़ जाती हैं।

इतने पहुंंचे टमाटर के दाम

सरकारी पोर्टल, एगमार्कनेट के आंकड़ों के अनुसार, दक्षिणी राज्यों में टमाटर की औसत थोक कीमतें 35 रुपए से 50 रुपए प्रति किलोग्राम के बीच हैं, जबकि कर्नाटक के कुछ बाज़ारों में टमाटर की कीमतें 60 रुपए तक पहुंच चुकी हैं। एगमार्कनेट डेटा से यह भी पता चलता है कि पिछले दो-तीन हफ्तों के दौरान और एक साल पहले की तुलना में कीमतें लगभग दोगुनी हो गई हैं। बेंगलुरु में रविवार को टमाटर रिटेल में 80 प्रति किलो बिक रहा था।

महाराष्ट्र के नासिक जिले में पिंपलगांव एपीएमसी के एक अधिकारी सचिन पाटिल ने मीडिया रिपोर्ट में कहा कि इस साल लंबे समय तक तापमान 42-44 डिग्री सेल्सियस रहा, जिससे फूल और फल खराब हो गए जिसके असर से प्रोडक्शन पर असर देखने को मिला है। उत्तर भारत में कीमतें अभी भी कंट्रोल में है। इसका कारण बताते हुए उन्होंने कहा कि टमाटर पौधों पर तेजी से पक रहे हैं, क्योंकि उत्तरी राज्य अभी भी गर्मी की लहरों के प्रभाव में हैं, जिससे किसानों को उनकी कटाई करने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है और इस तरह बाजार में सप्लाई बढ़ रही है। पके फलों की शेल्फ लाइफ कम होने के कारण थोक बाजार में उनकी मांग आमतौर पर कम होती है।

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