Edited By Niyati Bhandari,Updated: 23 Oct, 2026 10:30 AM

Bharat Swastik Yatra: स्वास्तिक भारत यात्रा के अंतिम पड़ाव पर मोरारी बापू केदारनाथ पहुंचे। उन्होंने बाबा केदारनाथ के दर्शन कर कथा का वाचन किया और राष्ट्र को जोड़ने के आदि शंकराचार्य के प्रयासों को नमन किया।
केदारनाथ (परविंदर कुमार मिश्रा): कन्याकुमारी से शुरू हुई ऐतिहासिक 'स्वास्तिक भारत यात्रा' अपने अंतिम पड़ाव पर पावन धाम केदारनाथ पहुंच गई है। इस अवसर पर पूज्य मोरारी बापू ने बाबा केदारनाथ के दर्शन कर विशेष कथा का आयोजन किया। कथा में भारी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। व्यास पीठ से बापू ने कहा कि यह यात्रा राष्ट्र और दुनिया को आध्यात्मिक रूप से जोड़ने का एक अद्भुत प्रयास है। ऐसा प्रतीत होता है मानो स्वयं कन्याकुमारी बाबा केदार के दर्शन करने आई है।
हिमालय और तीर्थ देवताओं को नमन: मोरारी बापू ने पावन हिमालय को वेद और पुराणों के समान बताते हुए कहा कि यहां स्थित मंदिर, स्थान देवता, तीर्थ देवता, स्थानीय प्रशासन और प्रादेशिक विभाग सभी प्रणाम के योग्य हैं। उन्होंने कन्याकुमारी से ऋषिकेश तक यात्रा में शामिल रहे सभी श्रद्धालुओं और महापुरुषों का आभार व्यक्त किया।
यात्रा का संदेश: बापू ने श्रद्धालुओं से कहा कि यह इस यात्रा का अंतिम पड़ाव है, इसलिए यहां से अब किसी अन्य स्थान जाने के बजाय सीधे अपने घर लौटें। उन्होंने बताया कि स्वास्तिक यात्रा की प्रसिद्धि का अंदाज़ा इसी से लगाया जा सकता है कि अब 'स्वास्तिक मुशायरा' भी आयोजित हो रहा है।
आदि शंकराचार्य का दृष्टिकोण: बापू ने कहा कि केरला के कालडी से निकले जगद्गुरु आदि शंकराचार्य जी ने चार धामों (गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ, बद्रीनाथ) की स्थापना कर राष्ट्र को जोड़ने का प्रथम प्रयास किया था। यह स्थान (केदारनाथ) वही पवित्र भूमि है जहां शंकराचार्य जी ने समाधि ली थी। यहां पहुंचना, रहना और दर्शन पाना विशुद्ध रूप से ईश्वर की कृपा है।