Shri Amarnath Yatra: आषाढ़ पूर्णिमा से श्री अमरनाथ यात्रा आरंभ, ये है अमरत्व का रहस्य

Edited By Niyati Bhandari,Updated: 28 Jun, 2022 09:26 AM

shri amarnath yatra

श्री अमरनाथ को तीर्थों का तीर्थ कहा जाता है क्योंकि यहीं पर भगवान शिव ने मां पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया था। इस तीर्थ की प्रमुख विशेषता पवित्र गुफा में बर्फ से प्राकृतिक शिवलिंग का निर्मित होना है।

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Shri Amarnath Yatra 2022: श्री अमरनाथ को तीर्थों का तीर्थ कहा जाता है क्योंकि यहीं पर भगवान शिव ने मां पार्वती को अमरत्व का रहस्य बताया था। इस तीर्थ की प्रमुख विशेषता पवित्र गुफा में बर्फ से प्राकृतिक शिवलिंग का निर्मित होना है। प्राकृतिक हिम से निर्मित होने के कारण इसे स्वयंभू हिमानी शिवलिंग भी कहते हैं। पवित्र गुफा समुद्र तल से 13,600 फुट की ऊंचाई पर स्थित है जिसकी भीतर की ओर गहराई 19 मीटर व चौड़ाई 16 मीटर है। अमरनाथ गुफा भगवान शिव के प्रमुख धार्मिक स्थलों में से एक है।

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आषाढ़ पूर्णिमा से शुरू होकर रक्षाबंधन तक पूरे सावन महीने में पवित्र हिमलिंग के दर्शनों के लिए लाखों लोग यहां आते हैं। गुफा की छत से पानी की बूंदें जगह-जगह टपकती रहती हैं।

गुफा में एक स्थान ऐसा है जहां हिम बूंदों से लगभग 10 से 12 फुट ऊंचा हिम शिवलिंग बनता है। चंद्रमा के घटने-बढ़ने से शिवलिंग का आकार भी घटता-बढ़ता रहता है। श्रावण पूर्णिमा को यह अपने पूरे आकार में आ जाता है और अमावस्या तक धीरे-धीरे छोटा होता जाता है।

आश्चर्य की बात है कि शिवलिंग ठोस बर्फ का होता है जबकि गुफा में आमतौर पर कच्ची बर्फ ही होती है जो हाथ में लेते ही भुरभुरा जाती है। हिम शिवलिंग से कुछ फुट दूर गणेश, भैरव और पार्वती जी के वैसे ही अलग-अलग हिमखंड होते हैं। गुफा में आज भी श्रद्धालुओं को कबूतरों का एक जोड़ा दिखाई देता है जिन्हें श्रद्धालु ‘अमरपक्षी’ बताते हैं। मान्यता है कि वे भी अमर कथा सुनकर अमर हुए थे और जिन श्रद्धालुओं को कबूतरों का जोड़ा दिखाई देता है, उन्हें शिव-पार्वती मुक्ति प्रदान करते हैं।

माना जाता है कि भगवान शिव भोले भंडारी ने पार्वती माता को इसी गुफा में वह कथा सुनाई जिसमें अमरनाथ यात्रा और उसके मार्ग में आने वाले अनेक स्थलों का वर्णन है। यह कथा कालान्तर में अमर कथा नाम से विख्यात हुई।

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16वीं शताब्दी में सबसे पहले इस गुफा का पता एक मुसलमान गडरिए को चला था। आज भी चढ़ावे का चौथा हिस्सा उसके परिवार को जाता है। अमरनाथ यात्रा पर जाने के लिए दो रास्ते हैं- एक पहलगाम होकर और दूसरा सोनमर्ग बालटाल से। पहलगाम से जाने वाले रास्ते को सरल एवं सुविधाजनक समझा जाता है। बालटाल से पवित्र गुफा 14 किलोमीटर दूर है। पहलगाम से पहला पड़ाव चंदनबाड़ी है जो 8 किलोमीटर दूर है फिर चंदनवाड़ी से 14 किलोमीटर दूर शेषनाग झील है। झील में शेषनाग का वास बताया जाता है। शेषनाग से आगे पंचतरणी है। मार्ग में महागुणास दर्रे को पार करना पड़ता है। पंचतरणी से पवित्र गुफा 8 किलोमीटर दूर है। रास्ते में बर्फ जमी रहती है।

जैसे ही सावन का मास आता है। भक्तों के मन में खुशी, शांति व शीतलता के भाव उत्पन्न होने लगते हैं। उन्हें परमपिता परमात्मा शिव से शांति, शीतलता व कल्याण प्राप्त होता है क्योंकि वह तो सदैव कल्याणकारी शक्ति के दाता हैं। जब-जब देवताओं पर कोई भी संकट आया तो वे शिव जी की ही शरण में गए और संकट से छुटकारा पाया। भोलेनाथ भंडारी शिव, जिन्हें शिवलिंग के रूप में पूजा जाता है, निराकारी भी कहलाते हैं।

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भगवान शिव को नीलकंठ, महादेव, शंकर, पशुपतिनाथ, नटराज, त्रिनेत्रधारी, भोलेनाथ, रुद्रशिव, कैलाशी, अर्धनारीश्वर, वैद्यनाथ, महाकाल, चंद्रशेखर, जटाधारी, नागनाथ, मृत्युंजय, त्रयम्बक, महेश, विषधर, उमापति, भूतनाथ, रुद्र, काल भैरव आदि नामों से भी जाना जाता है।

अमरनाथ यात्रा के दौरान श्रद्धालुओं द्वारा मार्ग में कई स्थलों पर तीर्थयात्रियों के लिए शुद्ध भोजन, रात्रि विश्राम की व्यवस्था की जाती है।

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