Edited By Niklesh-Jain/120" itemprop="url"> Niklesh Jain,Updated: 14 Oct, 2026 10:32 PM

नई दिल्ली ( निकलेश जैन ) । विश्व शतरंज संस्था फ़ीडे की आम सभा ने क्लासिकल शतरंज में कम समय वाले मुकाबलों के प्रस्ताव का समर्थन किया है। यह प्रस्ताव आइसलैंड शतरंज महासंघ ने रखा था, जिसे 33 वोट मिले। हालांकि नियम तुरंत नहीं बदलेंगे। आम सभा केवल दिशा...
नई दिल्ली ( निकलेश जैन ) । विश्व शतरंज संस्था फ़ीडे की आम सभा ने क्लासिकल शतरंज में कम समय वाले मुकाबलों के प्रस्ताव का समर्थन किया है। यह प्रस्ताव आइसलैंड शतरंज महासंघ ने रखा था, जिसे 33 वोट मिले। हालांकि नियम तुरंत नहीं बदलेंगे। आम सभा केवल दिशा तय करती है, असली नियम फ़ीडे काउंसिल बनाएगी।
अब तक क्या था नियम?
अब तक बड़े क्लासिकल टूर्नामेंट में हर खिलाड़ी को 90 मिनट मिलते थे और हर चाल पर 30 सेकंड अतिरिक्त (90+30)। इस साल फ़ीडे ने एक साल का प्रयोग शुरू किया था, जिसमें विशेष अनुमति लेकर 60+30 और कुछ मामलों में 45+30 का समय रखा जा सकता था।
काउंसिल क्या प्रस्ताव रखेगी?
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60 मिनट + 30 सेकंड (60+30) का समय अब बिना किसी अनुमति के इस्तेमाल हो सकेगा।
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45+30 का समय फ़ीडे सर्किट के बड़े टूर्नामेंटों में और उन टूर्नामेंटों में चलेगा, जहाँ कोई भी खिलाड़ी 2400 रेटिंग या उससे ऊपर का न हो।
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टाइटल और नॉर्म वाले टूर्नामेंटों में एक दिन में दो से ज़्यादा बाज़ियाँ नहीं होंगी।
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छोटे समय वाले टूर्नामेंट से खिलाड़ी अधिकतम एक ही नॉर्म गिन सकेगा।
क्यों ज़रूरी है यह बदलाव?
छोटे समय से टूर्नामेंट नौ दिन की बजाय पाँच-छह दिन में पूरे हो सकेंगे। इससे आयोजकों का खर्च घटेगा और खिलाड़ियों का समय बचेगा। लेकिन फ़ीडे का कहना है कि बहुत तेज़ करने से क्लासिकल शतरंज की गहराई कम हो सकती है, इसलिए संतुलन ज़रूरी है।
आगे क्या?
45+30 को आम बनाने और एक दिन में तीन बाज़ियों की अनुमति पर अंतिम फैसला सबकी राय लेने के बाद होगा। यह फैसला साल के अंत तक होने वाली ऑनलाइन आम सभा में लिया जा सकता है।