जानें कैसे बनें धन और एेश्वर्य के स्वामी

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Sunday, February 23, 2014-6:40 AM

सनातन धर्म में गृहस्थ जीवन के लिए चार पुरुषार्थ बताए गए हैं धर्म, अर्थ, काम और मोक्ष। जीवन यापन करने के लिए आप इन चारों के लिए प्रयास करें, चारों को जीएं। धर्म के कार्य करें, पर अर्थ का उपार्जन भी करें। अर्थ का उपार्जन करें, पर काम का भोग भी करें। काम का भोग करें, पर धर्म और मोक्ष का भी ध्यान बना रहे। न अति, न रिक्ति, बल्कि मध्यम मार्ग।

 संसार में रहकर गृहस्थ जीवन का यापन करने के लिए सुख-समृद्धि एवं धन का होना अत्यन्त अवश्यक है। इसके अभाव में घर गृहस्थी की कल्पना भी नहीं की जा सकती। कुछ टोने-टोटके अपनाने से जीवन में धन, यश, मान, पद, प्रतिष्ठा, और एैश्वर्य की अभिवृद्धि होती है। ऐसा करने से निश्चय ही अतुलनीय धन और एेश्वर्य का स्वामी बना जा सकता है।

1. पूर्णिमा को प्रातकाल पीपल के वृक्ष पर जल अर्पित करें।

2. तुलसी मां के पौधे पर बृहस्पतिवार को कच्ची लस्सी अर्पित करें।

3. बरगद के पेड़ के नीचे कोई पौधा उगा हो तो उसे प्रणाम करके उखाड़े और अपने घर पर पवित्र स्थान पर लगा लें।

4. गूलर की जड़ लेकर उसे किसी नवीन वस्त्र में बांधकर ताबीज में डालें और अपनी बाजु पर बांध लें।

5. पीपल के वृक्ष की छाया तले खड़े होकर एक लोहे के पात्र में कच्ची लस्सी लें और उसे पीपल की जड़ में डालें।

6. धन समृद्धि की देवी मां लक्ष्मी को एकादशी के दिन नौ बत्तियों वाला शुद्ध घी का दीपक अर्पित करें।

7. घर की दहलीज पर तांबे के एक सिक्के को लाल रंग के नए कपड़े में बांध कर लटकाएं।

8. शनिवार के दिन श्यामल पशु पक्षीयों को रोटी खिलाएं।


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