कहीं आप अपना जीवन डर और चिंता के साए में तो नहीं जी रहे

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Wednesday, March 19, 2014-8:57 AM

जहां निचले स्तर की भावनात्मक अवस्थाएं हमें कमजोर करती हैं वहीं उच्च स्तर की अवस्थाएं हमें शक्तिशाली बनाती हैं। हिम्मत शक्ति और कमजोरी के बीच की वह रेखा होती है जो इन दोनों अवस्थाओं को विभाजित करती है। यह पहली सकारात्मक अवस्था होती है।

निचले स्तरों पर दुनिया हताशा, उदासी, डर और निराशा से भरी हुई एक जगह नजर आती है लेकिन हिम्मत के स्तर पर जीवन उत्साह, चुनौतीपूर्ण और जोश से भरा हुआ लगने लगता है। रुकावटें उन लोगों, जिनकी चेतना का स्तर निम्न होता है, को आसानी से हरा देती हैं। वही रुकावटें उन लोगों को जुनून से भर देती हैं जो कि खुद को वास्तविक शक्ति के पहले स्तर तक उठा लेते हैं और यहीं से उत्पादकता की शुरूआत होती है। अगर आप उस परिस्थिति से आगे निकलना चाहते हैं जहां पर आप अपना जीवन डर और चिंता के साए में जीते हैं तो अंतत: आपको हिम्मत की शक्ति को अपनाना ही होगा। इसका असर यह होता है कि आपके जीवन से डर का प्रभाव धीरे-धीरे कम होने लगता है और ऐसा इसलिए होता है ताकि आप विकसित होकर ऊंचे स्तरों तक पहुंच पाएं जहां पर आपकी जरूरतें आसानी से पूरी हो सकें और डर की जरूरत ही खत्म हो जाए।

आप समझ जाते हैं कि किसी चीज से डरने की कोई जरूरत ही नहीं है और डर आपको उतना ही डराता है जितना डरावना आप उसे अपने मन में बनाते हैं। जब ऐसा होता है तो आप सीख जाते हैं कि कैसे आप अपने भीतर डर की रचना करना बंद कर सकते हैं।


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