सुप्रीम कोर्ट ने दी मुल्ला को फांसी की सजा

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Tuesday, September 17, 2013-4:22 PM

ढाका   बंगलादेश के उच्चतम न्यायालय ने 1971 की आजादी की लडाई  के दौरान युद्धापराध के आरोप में विपक्षी जमात ए इस्लामी पार्टी के प्रमुख नेता अब्दुल कादिर मुल्ला को फांसी की सजा सुनाई दी है।

इस वर्ष फरवरी में एक युद्धापराध न्यायाधिकरण ने मुल्ला को उम्रकैद की सजा सुनाई थी।  इसके खिलाफ उसने उच्चतम न्यायालय में याचिका दी थी1 अदालत ने उसकी सजा को सजा ए मौत में बदल दी।  मुल्ला पर आरोप था कि पाकिस्तान के खिलाफ 1971  की लडाई के दौरान ढाका के मीरपुर इलाके में कई नरसंहारों के पीछे उसका हाथ था।  जिसके कारण उसे मीरपुर के कसाई की संज्ञा भी मिली थी।

1971 की लडाई दौरान जिसमें 30 लाख से अधिक लोग मारे गये थे। वह अल बदर नामक संगठन का सदस्य बन गया था जो आजादी की मांग करने वालों के खिलाफ लड रहा था। जमात का मानना था कि एक इस्लामी राष्ट्र को बांटना इस्लाम के विरुद्ध है और इसलिए वह विभाजन के खिलाफ था। मुल्ला 2010 में देश के मुख्य इस्लामी दल जमात ए इस्लामी का उपमहासचिव बना।

अभियोग पक्ष के वकील जियाद अल मलूम ने बताया कि अदालत ने एक के मुकाबले चार न्यायाधीशों के मत से उसकी फांसी की सजा को मंजूरी दी । वहीं बचाव पक्ष के वकील ताजुल इस्लाम का कहना था कि वह इस फैसले से हैरान है। उसने कहा यह दक्षिण एशिया के न्यायिक इतिहास में पहला मौका है जब उच्चतम न्यायालय ने किसी निचली अदालत की सजा को बढा दिया हो।
 


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