सत्ता की चाबी क्षेत्रीय दलों के पास, UPA से आगे NDA: सर्वे

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Thursday, October 17, 2013-10:47 AM

नई दिल्ली: केंद्र में 2014 में सरकार के गठन में क्षेत्रीय दल महत्वपूर्ण भूमिका निभाने जा रहे हैं और सत्ता की चाबी इन्हीं दलों के पास होगी। इतना ही नहीं आज कराए गए एक चुनाव सर्वेक्षण में यह बात भी सामने आयी है कि भाजपा की अगुवाई वाला गठबंधन राजग सत्तारूढ़ संप्रग को काफी पीछे धकेल देगा।

16 अगस्त से 15 अक्तूबर के बीच चुनिंदा 24, 284 प्रतिभागियों के बीच इंडिया टीवी टाइम्स नाउ सी वोटर द्वारा कराए गए राष्ट्रीय नमूना सर्वेक्षण में आंध्र प्रदेश, उत्तर प्रदेश , राजस्थान और केरल में कांग्रेस को भारी नुकसान दिखाया गया है जहां उसे पिछली बार अच्छी खासी सीटें मिली थीं । उत्तर प्रदेश और बिहार में भाजपा को अच्छा लाभ मिलने की बात कही गयी है जबकि राजस्थान में भी उसके सत्ता में फिर से लौटने की भविष्यवाणी की गयी है।

राजस्थान, मध्य प्रदेश, दिल्ली और छत्तीसगढ़ जैसे चार राज्यों में आगामी विधानसभा चुनावों को एक प्रकार से अगले आम चुनाव के सेमी फाइनल के रूप में देखा जा रहा है और ऐसे में सर्वेक्षण में पहले तीन राज्यों में कांग्रेस को भारी नुकसान होने तथा केवल छत्तीसगढ़ में उसके लिए उम्मीद की किरण बचे होने की भविष्यवाणी की गयी है। सर्वेक्षण के अनुसार, भाजपा, शिवसेना, अकाली दल , आरपीआई (अठावले) मेघालय की राकांपा और हरियाणा जनहित कांग्रेस वाले राजग को 186 सीटों जबकि संप्रग को अपने मौजूदा सहयोगियों के साथ मात्र 117 सीटें मिलने की बात कही गयी है।

वर्ष 2009 के लोकसभा चुनाव में सत्तारूढ़ गठबंधन को 259 सीटें जबकि राजग को 159 सीटें मिली थीं। सर्वेक्षण में बताया गया है कि इस बार केंद्र में सत्ता की चाबी कुछ क्षेत्रीय दलों के हाथों में होगी जिनमें अन्नाद्रमुक, सपा, बसपा, वाम मोर्चा, तृणमूल कांग्रेस, राजद, बीजद, वाईएसआर कांग्रेस और टीएसआर शामिल हैं। इन सभी के लोकसभा की 543 सीटों में से 240 पर जीत हासिल करने की संभावना है।

कांग्रेस और भाजपा के बीच सीटों का अंतर भी बढऩे की संभावना जतायी गयी है क्योंकि सर्वेक्षण में कांग्रेस को केवल 102 और भाजपा को 162 सीटें मिलने की बात कही गयी है। पिछली बार कांग्रेस ने 206 तथा भाजपा ने 116 सीटें जीती थीं। इस प्रकार सर्वेक्षण कहता है कि कांग्रेस 2009 में जीती गयी अपनी सीटों में से लगभग 50 फीसदी गंवा देगी और भाजपा अपने प्रदर्शन में करीब 40 फीसदी का सुधार करेगी।

वाम दलों के खाते में 32 सीटें और मायावती की बसपा के 31 सीटों पर कब्जा जमाने की भविष्यवाणी की गयी है। उत्तर प्रदेश में बसपा की धुर प्रतिद्वंद्वी मुलायम सिंह यादव की समाजवादी पार्टी को 25, जयललिता की अन्नाद्रमुक को 28 और ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस को 23 सीटें मिलने की उम्मीद है।

सर्वेक्षण में लालू प्रसाद के राजद को 14 सीटें मिलने की भविष्यवाणी की गयी है जो इस बात का संकेत है कि चारा घोटाले में सुनायी गयी सजा के बावजूद उनके कद में कोई कमी नहीं आयी है। सर्वेक्षण कहता है कि बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की जनता दल यू को मात्र नौ सीटें मिलेंगी। उसने नरेन्द्र मोदी को भाजपा का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने के विरोध में भगवा पार्टी से अपने संबंध तोड़ लिए थे।

सर्वेक्षण के नतीजे बताते हैं कि तेलंगाना की बाजी के बावजूद कांगे्रस को कोई बहुत बड़ा फायदा नहीं होगा क्योंकि प्रदेश से कुल 42 सीटों में से वाईएसआर कांग्रेस और तेलंगाना राष्ट्र समिति को 13-13 सीटें मिलने की भविष्यवाणी की गयी है। सर्वेक्षण में कहा गया है कि कांग्रेस को प्रदेश में केवल सात सीटें मिलेंगी जहां पिछले लोकसभा चुनाव में उसने 33 सीटें जीती थीं। इसमें एन चंद्रबाबू नायडू की तेदेपा को आठ सीटें दी गयी हैं।

इसी प्रकार सौर पैनल घोटाले से ग्रस्त केरल कांग्रेस को मात्र चार सीटें मिलने की बात कही गयी है जिसने पिछले लोकसभा चुनाव में 13 सीटें जीती थीं । पिछले चुनाव में मात्र चार सीटें जीतने वाले वाम मोर्चा के खाते में इस बार 13 सीटें जाने की भविष्यवाणी की गयी है। पिछले लोकसभा चुनाव में उत्तर प्रदेश में 22 सीटें जीतने वाले कांग्रेस के खाते में इस बार राज्य से मात्र पांच सीटें आने की बात कही गयी है जबकि भाजपा की दस सीटों के बढ़कर 17 तक पहुंच जाने की संभावना जतायी गयी है।

हालांकि प्रदेश में 31 सीटों के साथ बसपा और 25 सीटों के साथ सपा के मुख्य खिलाड़ी बने रहने की भविष्यवाणी की गयी है। सर्वे के आंकड़ों में नरेन्द्र मोदी को भाजपा का प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित किए जाने से चार सप्ताह पूर्व और चार सप्ताह बाद के आंकड़ें एकत्र किए गए हैं। मोदी शासित गुजरात में सर्वे में भाजपा को कुल 26 सीटों में से 22 पर जीत की भविष्यवाणी की गयी है जो कि पिछली बार से सात सीट ज्यादा है। प्रदेश में कांग्रेस के सात सीटें गंवाने की बात भी कही गयी है। पिछली बार कांग्रेस राज्य में 11 सीटें जीती थी लेकिन सर्वे बता रहा है कि इस बार वह केवल चार सीटें ही जीत पाएगी।  


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