चुनावी जंग में पेयजल का मुद्दा दिखाएगा रंग

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Monday, December 02, 2013-2:42 PM

वेस्ट दिल्ली (राजन शर्मा): पिछले 15 सालों से कांग्रेस के गढ़ बवाना विधानसभा में इस बार पानी का मुद्दा गरमाया हुआ है। इस मुद्दे को लेकर भाजपा के गगन सिंह और आम आदमी पार्टी के गजानंद कांग्रेस प्रत्याशी और विधायक सुरेन्द्र कुमार को घेरने की कोशिश कर रहे है क्योंकि इस क्षेत्र से जो भी विधानसभा जाएगा वह पानी के मुद्दे को लेकर ही आगे बढ़ेगा।

किसान बाहुल्य इलाके में मुख्य समस्या साफ पेयजल, गंदे पानी की ठोस निकासी व्यवस्था और बवाना में पिछले 15 सालों से बंद वाटर प्लांट की है। तीनों ही समस्याओं में पानी का अहम रोल है, जिसे देखते हुए भाजपा और आप के उम्मीदवार लोगों के सामने जीतने पर क्षेत्र में पानी लाने की कसमें खा रहें है लेकिन वर्तमान स्थिति में कांग्रेस के सुरेन्द्र और भाजपा के गगन सिंह के बीच कड़ा मुकाबला है। वहीं, आप यहां कांग्रेस को नुक्सान पहुंचा सकता है क्योंकि जो ग्रामीण वोटर कांग्रेस का परांपरागत वोट बैंक था, वो आप के पाले में जा सकता है।

वहीं सुरेन्द्र कुमार इलाके में सरकारी स्कूलों के नविनीकरण, बरातघर निर्माण और खेतों में नीलगायों को रोकने के लिए किए गए प्रयासों को लेकर लोगों के बीच में है। उनका कहना है कि क्षेत्र में किए गए विकास कार्यों को देख जनता फिर कांग्रेस को ही जीताएगी लेकिन भाजपा के गगन सिंह की किसान नेता की छवी और कांग्रेस की सरकार और विधायक होने के बाद भी क्षेत्र के किसानों को ट्युबवेल कनैशन न मिलने की बात कह वो किसानों का रुख अपनी ओर मोडऩे में कामयाब रह सकते हैं। आरक्षित विधानसभा सीट से पहली बार (1993) भाजपा के चांदराम ने जीत दर्ल की, जबकि इसके बाद(1998) से लगातार 3 बार कांग्र्रेस के सुरेन्द्र कुमार जीते हैं।

बवाना दिल्ली के देहात इलाके में आता है। जहां खेती के पानी की ज्यादा जरूरत है। ऐसे में क्षेत्र की सबसे बढ़ी समस्या पानी को लेकर है। यहां बनाया गया वाटर प्लांट 15 सालों से बंद है। इसके अलावा क्षेत्र में मैट्रो का न आना, पशु अस्पताल में सुविधाओं का अभाव और किसानों को ट्युबवेल के कनैशन न मिलाना है। जिससे स्थानीय लोगों में रोष है।


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