यौन शोषण मामलाः सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्‍यायाधीश गांगुली की परेशानियां बढ़ीं

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Thursday, December 05, 2013-1:06 AM

कोलकाता: सुप्रीम कोर्ट के पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति अशोक गांगुली की परेशानियां बढ़ती जा रहीं हैं और बुधवार को एक एनजीओ ने कानून की इंटर्न छात्रा के कथित यौन शोषण के मामले में उनके खिलाफ पुलिस से कार्रवाई की मांग की है। गांगुली ने मीडिया में सामने आए ताजा आरोपों को खारिज किया है।

न्यायमूर्ति गांगुली पर तृणमूल कांग्रेस ने भी हमला तेज कर दिया है और उन्हें पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद से हटाने की मांग की है। इंटर्न के साथ कथित र्दुव्‍यवहार को लेकर मीडिया में नये सिरे से खबरें आई हैं और न्यायमूर्ति ने इन आरोपों का आज फिर से खंडन किया।

दिल्ली में उच्चतम न्यायालय के सूत्रों ने कहा कि तीन न्यायाधीशों की समिति की रिपोर्ट विचाराधीन है। हालांकि रिपोर्ट के ब्योरे के बारे में कुछ भी बताने से उन्होंने इनकार कर दिया। स्थानीय एनजीओ ‘भारत बचाओ संस्थान’ ने आज हेयर स्ट्रीट थाने में ज्ञापन दिया और न्यायमूर्ति गांगुली के खिलाफ कानूनी कार्रवाई तथा प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की। न्यायमूर्ति गांगुली पर पिछले साल दिसंबर में कानून की एक इंटर्न के साथ एक पांच-सितारा होटल में दुर्व्‍यवहार करने और यौन शोषण की कोशिश करने के आरोप हैं।

संगठन के अध्यक्ष विनीत रइया ने यहां संवाददाताओं से कहा कि जब इतनी गंभीर शिकायत की गई है तो कानून के मुताबिक जरूरी पुलिस कार्रवाई तत्काल की जानी चाहिए। भारत बचाओ संस्थान ने हाल ही में पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के दफ्तर के बाहर विरोध प्रदर्शन किया था। रइया ने कहा कि पद पर बैठे होने के कारण वह गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं और जांच प्रक्रिया पर असर डाल सकते हैं। इसलिए हमें लगता है कि उन्हें तत्काल पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद से हटाया जाना चाहिए।

पुलिस उपायुक्त (मध्य) डीपी सिंह ने कहा कि हमें उनसे (एनजीओ से) पत्र मिला है। पिछले साल फरवरी में उच्चतम न्यायालय से सेवानिवृत्त हुए न्यायमूर्ति गांगुली ने इंटर्न के इन आरोपों को खारिज कर दिया कि उन्होंने लड़की की मंजूरी नहीं होने के बावजूद र्दुव्‍यवहार की कोशिश की थी। इंटर्न द्वारा उच्चतम न्यायालय की तीन न्यायाधीशों की समिति को दिये गये बयान के संबंध में एक राष्ट्रीय अखबार की खबर के बारे में पूछे जाने पर गांगुली ने कहा कि मैं पहले ही आरोपों को खारिज कर चुका हूं। इससे ज्यादा मैं क्या कहूं।

जब न्यायमूर्ति गांगुली से पूछा गया कि क्या उन्होंने अखबार की खबर पढ़ी तो उन्होंने कहा कि हां, मैंने पढ़ी है। मैं आरोपों को खारिज करता हूं। उन्होंने भविष्य की अपनी रणनीति के बारे में कुछ भी बताने से मना कर दिया। इस बीच तृणमूल कांग्रेस के राज्यसभा सदस्य और पार्टी प्रवक्ता डेरेक ओब्रायन ने आज गांगुली के पश्चिम बंगाल मानवाधिकार आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफे की मांग की।

उन्होंने कहा कि तृणमूल कांग्रेस ने न्यायमूर्ति के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोपों पर चिंता के साथ गौर किया है। ओब्रायन ने कहा कि सार्वजनिक जीवन में वरिष्ठ पदों पर बैठे लोगों को न केवल महिला सहकर्मियों के साथ आचरण के मानकों में बल्कि इस तरह के आरोपों पर संवेदनशीलता से और तत्परता से जवाब देने में भी आदर्श भूमिका निभानी चाहिए। उन्होंने कहा कि मैं न्यायमूर्ति गांगुली से अनुरोध करता हूं कि डब्ल्यूबीएचआरसी के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दें। (एजेंसी)


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