विवाद ‘आप’ सरकार के लिए शुभ संकेत नहीं

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Wednesday, January 08, 2014-1:27 AM

नई दिल्ली : दिल्ली की 5वीं विधानसभा का पहला सत्र मंगलवार को खत्म हो गया। लेकिन आप सरकार को जनता से किए वादों को पूरा करने के लिए अभी बहुत कुछ करना है। सरकार बने अभी 11 दिन ही हुए हैं लेकिन उनके 2 मंत्री जिस तरह से विवादों से घिर रहे हैं, इसे केजरीवाल सरकार के लिए शुभ संकेत नहीं माना जा सकता।

मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने भरोसा दिलाया था कि उनके पास ऐसी योजना हैं कि बिजली के बिल 50 प्रतिशत तक कम करवा दिए जाएंगे। अभी तक तो ऐसी किसी योजना  को उन्होंने उजागर नहीं की है। यह घोषणा जरूर कर दी है कि 400 यूनिट तक बिजली का उपयोग करने वाले उपभोक्ताओं को बिल में 50 प्रतिशत की राहत दी जाएगी। यह ठीक है कि जनता को कुछ तो राहत मिलेगी लेकिन सरकार ने इसके लिए किसी खास योजना का ऐलान नहीं किया है बल्कि इस रकम को सबसिडी के रूप मे बिजली कंपनियों को दिया जाएगा।

इसी तरह से सभी को 700 लीटर पानी मुफ्त देने की घोषणा भी कम लोगों को राहत देने वाली प्रतीत हो रही है। ऐसा इसलिए है क्योंकि दिल्ली जल बोर्ड का पानी 70 फीसदी घरों में जाता ही नहीं है। दिल्ली की आबादी 1.75 करोड़ है तो इस योजना का लाभ केवल 4.5 लाख उन लोगों को मिलेगा, जिनके घरों में पानी के मीटर लगे हुए हैं।

बाकी लोग आखिर इस सुविधा से वंचित क्यों रहें? क्या उन लोगों ने आप को समर्थन देने में कोई कसर छोड़ी थी? सच्चाई तो यह है कि चुनाव में ज्यादातर अनधिकृत कॉलोनियों के लोगों ने आप उम्मीदवारों को खासा समर्थन दिया लेकिन उनकी उम्मीदें पूरी होती अभी नहीं दिख रही हैं। अरविंद केजरीवाल ने जिस दिन ऐतिहासिक रामलीला मैदान में मुख्यमंत्री के रूप मे शपथ ली थी, उसी समय कहा था कि भ्रष्ट लोगों को रंगेहाथ पकडऩे के लिए आप की सरकार अगले 2 दिनों में फोन नंबर जारी कर देगी, जहां घूसखोरों से परेशान लोग अपनी शिकायत दर्ज करवा सकेंगे।

सरकार गठित होने के बाद वह फोन नंबर आज तक जारी नहीं हो सका है। शायद इसीलिए कुछ लोगों ने यहां तक कहना शुरू कर दिया है कि मुख्यमंत्री पहले योजना तैयार करें और फिर उसकी घोषणा करें। इसमें दोराय नहीं कि मुख्यमंत्री के इरादे नेक और हौसला बुलंद है लेकिन उन्हें किसी भी बात पर विपक्ष को बोलने का मौका नहीं देना चाहिए। एक सच्चाई यह भी है कि चुनाव में आप को जो भारी समर्थन मिला, उसमें कांग्रेस ही नहीं बल्कि भाजपा की गलत नीतियों के त्रस्त लोग भी शामिल थे।

उनको भरोसा है कि मुख्यमंत्री बनकर अरविंद केजरीवाल कॉमनवैल्थ गेम्स के दौरान हुए घोटालों के खिलाफ जरूर सख्त कदम उठाएंगे, लेकिन अब वह उल्टा मुख्यमंत्री केजरीवाल भाजपा विधायक दल के नेता डॉ. हर्षवर्धन से कह रहे हैं कि पिछली सरकार के भ्रष्टाचार के मामलों की जानकारी दें। यह तो वही कहावत चरितार्थ हो रही है कि जो बोले वही कुंडा खोले।


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