अल्पसंख्यकों के लिए मौलाना आजाद सेहत योजना व नालंदा प्रोजेक्ट शुरू

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Wednesday, March 05, 2014-12:23 AM
नई दिल्ली : 2014 लोकसभा चुनाव सिर पर हैं, ऐसे में अल्पसंख्यकों को रिझाने के लिए भी सरकार के पिटारे से कई तरह की स्किमें निकलनी शुरू हो गई हैं। इंडिया इस्लामिक कल्चरल सेंटर में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री के रहमान खां ने अल्पसंख्यकों के लिए दो नई योजनाएं शुरू कीं। 
 
अल्पसंख्यक गैर सरकारी स्कूलों में पढऩे वाले छात्रों के लिए मौलाना आजाद सेहत योजना और उच्च शिक्षा के संस्थानों में पढ़ाने वाले शिक्षकों की ट्रेनिंग और वहां जारी विभिन्न प्रोग्रामों के विकास और उनके आधुनिकीरण के लिए नालंदा प्रोजेक्ट की शुरूआत की। इस मौके पर छात्रों को सेहत कार्ड भी जारी किए गए।
 
इस मौके पर अल्पसंख्यक कार्य राज्य मंत्री निनोंग ऐरिंग, योजना आयोग के सदस्या डॉ. सईदा हमीद, एएमयू के प्रोफेसर ए.आर. किदवई, सचिव ललित के पंवार, प्रिंसिपल सेकेट्री बदरूद्दीन खां, संयुक्त सचिव राकेश मोहन आदि मौजूद थे। इनके अलावा कार्यक्रम में मौलाना इसरारूलहक कासमी, दिल्ली  अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष सफदर हुसैन खां, कमीशन के सदस्य हरविंदर सिंह सरना, इब्राहीम एम पाटियानी, पूर्व आईपीएस सैयद कमर अहमद जैदी व एएमयू से आए छात्र, नालंदा, आंध्र और दिल्ली  के विभिन्न स्थानों से आए लोगों ने शिरकत की।
 
के रहमान खां ने कहा कि अगर बच्चों की शुरू से जांच की जाती रहे तो वह किसी बड़ी बीमारी से बच सकते हैं। हमने शुरूआत उन अल्पसंख्यक संस्थाओं से की है जो मौलाना आजाद एजुकेशन फाउंडेशन में दर्ज है। तीन सौ बच्चों वाले स्कूलों की निशानदेही की गई है। वहां सप्ताह में दो बार डॉक्टर बच्चों के स्वास्थ्य की जांच करेंगे। गंभीर रोगियों के इलाज के लिए 2 लाख रुपए तक की मेडिकल सहायता दी जाएगी। इन स्कीमों के लिए 100 करेड़ रुपए निर्धारित किए गए हैं।
 
के. रहमान ने नालंदा प्रोजेक्ट के बारे में बताया कि अल्पसंख्यकों के बहुत से कॉलेज और विश्वविद्यालय हैं लेकिन उनका शैक्षिक स्तर उच्च नहीं है। इसके लिए यह प्रोजेक्ट एएमयू से शुरू किया गया है। इसके तहत शिक्षकों को आधुनिक तरीके से ट्रेनिंग दी जाएगी।  शिक्षकों का संबंध बच्चों के भविष्य से होता है। अगर बच्चों को सही शिक्षा नहीं दी गई तो खराबियां पैदा हो सकती हैं। 
 

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