MP: जद (यू) की अगुवाई में पक रही गठजोड़ की खिचड़ी!

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Sunday, March 16, 2014-2:03 PM

भोपाल: मध्य प्रदेश में एक बार फिर चुनाव से पहले दलों में गठजोड़ की कवायद तेज हो गई है। विभिन्न वर्गों के बीच काम करने वाले चार दलों के बीच रिश्ते बढ़ाने की कोशिश चल पड़ी हैं और वे मिलकर लोकसभा चुनाव लडऩे का मन बना चुके हैं। समाजवादियों का प्रभाव कम होने के बाद जनता दल-युनाइटेड ने अपनी ताकत बढ़ाने के लिए पिछले विधानसभा चुनाव में जहां पहले गोंडवाना गणतंत्र पार्टी (गोंगपा) से गठजोड़ किया था, तो अब बहुजन संघर्ष दल तथा आदिमजन मुक्ति मोर्चा से करीबी बढऩे लगी है। ये चारों दल मिलकर चुनाव लडऩे का मन बना रहे हैं।

राज्य में लोकसभा चुनाव में मुख्य मुकाबला कांग्रेस और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में होता है, कभी-कभी बहुजन समाज पार्टी (बसपा) अपनी ताकत का लोहा मनवा लेती है। यही कारण है कि दोनों प्रमुख दलों के अलावा बसपा का भी उम्मीदवार जीत जाता है। इसके बावजूद दलित, जनजातीय वर्ग के साथ समाजवादियों की ताकत को नकारा नहीं जा सकता। इन तीनों वर्गों के मतदाताओं की पर्याप्त संख्या तो है, मगर ये अपनी राजनीतिक ताकत का इजहार नहीं कर पाते, क्योंकि इनके पास कोई ताकतवर नेतृत्व नहीं है और तीनों वर्ग किसी एक दल के झंडे तले नहीं हैं। यही कारण है कि इन वर्गों का हमदर्द होने का दावा करने वाले ये दल अब गलबहियां करने लगे हैं।

विधानसभा चुनाव में जद (यू) ने गोंड जनजाति के बीच गहरी पैठ करने वाले गोंगपा के साथ मिलकर चुनाव लड़ा था। यह गठबंधन कोई सीट तो नहीं जीत पाया था, लेकिन कई क्षेत्रों में वोट का प्रतिशत अच्छा जरूर रहा। अब गोंड जनजातीय वर्ग के बीच काम करने वाले विभिन्न दल एक हो गए हैं। अब जद (यू) व गोंगपा के गठजोड़ के साथ दो और दल इनसे हाथ मिला रहे हैं। ये हैं ग्वालियर-चंबल इलाके के प्रभावशाली दलित नेता फूल सिंह बरैया का बहुजन संघर्ष दल और मालवा में जनजातीय वर्ग के बीच सक्रिय आदिमजन मुक्ति मोर्चा। इस तरह तीन वर्गों से नाता रखने वाले ये चार दल लोकसभा चुनाव में साझा उम्मीदवार उतारने की तैयारी में हैं।

जद (यू) के प्रदेशाध्यक्ष गोविंद यादव का कहना है कि उपेक्षित वर्ग के हक की लड़ाई यह दल अपने-अपने तरह से लड़ते आ रहे हैं। अब इन दलों ने मिलकर लड़ाई लडऩे का मन बनाया है, जिसका असर लोकसभा चुनाव में नजर आएगा। राज्य के 29 सीटों पर चारों दल अपने अपने प्रभाव वाले क्षेत्रों में उम्मीदवार उतारेंगे। चुनाव से पहले एक और गठजोड़ आकार ले रहा है, यह देखने वाली बात होगी कि जनता इस पर कितना भरोसा करती है और इनके प्रभाव के चलते चुनाव नतीजों पर कितना असर रहता है। 


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