बाबू नहीं कर पाएंगे सोशल साइट का प्रयोग

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Thursday, March 27, 2014-3:15 PM

नई दिल्ली:केंद्र सरकार ने सुरक्षा कारणों को देखते हुए जल्द की सरकारी कर्मियों को एक  ई-मेल एकाऊंट दे दिया है। वहीं सभी कर्मियों को एडवाइजरी जारी करके निर्देेश दिया जाएगा कि कोई भी सरकारी कर्मी अपने कार्यालय के कम्प्यूटर व नैटवर्क से सोशल साइट का प्रयोग न करें।  यह आश्वासन सरकार की तरफ से दिल्ली उच्च न्यायालय के समक्ष दिया गया है। 

कार्यकारी मुख्य न्यायाधीश बी.डी.अहमद व न्याय मूर्ति  सिद्धार्थ मृदुल की खंडपीठ ने सरकार से कहा है कि वह इस संबंध में जल्दी से एडवाइजारी जारी कर दें, ताकि जिन सरकारी कर्मियों को आधिकारिक ई-मेल एकाऊंट दे दिए गए हैं, वो बाहरी सरवर का प्रयोग न करें। 

खंडपीठ के समक्ष ए.एस.जी राजीव मेहरा ने बताया कि साढ़े 4 लाख सरकारी कर्मियों को आधिकारिक ई-मेल एकाऊंट दे दिए गए हैं और उन्होंने प्रयोग भी करना शुरू कर दिया है। इन सभी एकाऊंट का सरवर भारत में हैं, परंतु इभी इन सब ई-मेल एकाऊंट के लिए सरकार को संसाधन जुटाने होंगे,जिसमें अभी थोड़ा समय लगेगा, जिसके बाद अदालत ने कहा सरकार जल्द से इस दिशा में काम करें। साथ ही सरकार से  कहा है कि वह अगले एक महीने में राष्ट्रीय ई-मेल पॉलिसी को अंतिम रूप देकर उसे लागू कर दे, जिसके लिए लगभग साढ़े 4 लाख कर्मियों को एडवाइजरी जारी कर दी जाए।

अब इस मामले में 10 अप्रैल को सुनवाई होगी। इस मामले में सरकार ने एक हलफनामा दायर करके अदालत को बताया था कि लगभग साढ़े 4 सरकारी कर्मियों को एक ई-मेल एकाऊंट दे दिया गया है,जिसे सरकारी कामकाज में प्रयोग किया जाएगा। अब सरकारी कर्मियों को सरकारी सूचनाओं के आदान-प्रदान के लिए बाहरी सरवर का प्रयोग करने की   अनुमति  नहीं दी जाएगी।

आंकड़े सुरक्षित हो

इलैक्ट्रॉनिक एंड सूचना तकनीक विभाग की तरफ से दायर हलफनामे में कहा गया है कि  इस पॉलिसी का का एक उद्देश्य है कि सरकारी आंकड़ों को सुरक्षित रखा जाए। भाजपा नेता के.एन. चतुर्वेदी ने एक जनहित याचिका दायर कर रखी है, जिसमें कहा गया है कि सरकारी कर्मियों को बाहरी ई-मेल  सरवर प्रयोग करने से रोका जाए।


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