सरकार पी-नोट्स पर बिना सोचे विचारे कोई फैसला नहीं लेगी: जेतली

Edited By ,Updated: 27 Jul, 2015 02:07 PM

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सरकार ने आज कहा कि वह पी-नोट्स के मामले में बिना सोचे विचारे एेसा कोई निर्णय नहीं लेगी जिससे कि देश के निवेश माहौल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े।

नई दिल्ली: सरकार ने आज कहा कि वह पी-नोट्स के मामले में बिना सोचे विचारे एेसा कोई निर्णय नहीं लेगी जिससे कि देश के निवेश माहौल पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े। कालेधन पर गठित विशेष जांच दल (एस.आई.टी.) की रिपोर्ट में पी-नोट्स से होने वाले निवेश पर नजर रखने के लिए कठोर नियमन की सिफारिश आने के बीच सरकार की तरफ से यह बात कही गई है।

वित्त मंत्री अरुण जेतली ने आज कहा कि कोई भी विचार पक्का करने से पहले सरकार सभी सुझावों का अध्ययन करेगी। उच्चतम न्यायालय द्वारा कालेधन पर रिपोर्ट तैयार करने के लिए गठित एस.आई.टी. ने पिछले सप्ताह सरकार को सौंपी अपनी रिपोर्ट में कहा है कि सेबी को पार्टिसिपेटरी नोट्स (पी-नोट्स) से होने वाले निवेश संबंधी नियमों को और सख्त बनाना चाहिए। इस सिफारिश के बाद आज शेयर बाजार में शुरूआती कारोबार में गिरावट रही।   

जेतली ने यहां संसद भवन स्थित अपने कार्यालय में संवाददाताओं से कहा, "यह कहना जल्दबाजी होगी कि सरकार इस बारे में क्या फैसला लेगी लेकिन यह पक्का है कि वह बिना सोचे समझे जल्दबाजी में एेसा कोई फैसला नहीं लेगी जिससे कि खासकर देश के निवेश परिवेश पर प्रतिकूल असर हो।"

जेतली ने कहा कि कालेधन पर एस.आई.टी. ने जो सिफारिशें दी हैं वह सरकार के समक्ष आएंगी और सरकार कुछ समय में इसका अध्ययन करेगी। उसके बाद देश में निवेश के माहौल, साथ ही एस.आई.टी. की सिफारिशों के पीछे के उद्देश्य को ध्यान में रखते हुए ही कोई अंतिम निर्णय लेगी। बंबई शेयर बाजार का संवेदी सूचकांक आज दोपहर तक के कारोबार में 383 अंक यानी 1.36 प्रतिशत गिरकर 27,728.88 अंक पर आ गया जबकि डॉलर के मुकाबले रुपए भी गिरकर 64.03 अंक रह गया।

एस.आई.टी. ने कहा है कि शेयर बाजार में कालेधन के इस्तेमाल और कर चोरी रोकने के लिए सेबी को पी-नोट्स के जरिए होने वाले निवेश और दूसरे विदेशी निवेश साधनों की निगरानी के लिए कड़े नियमन तय करने चाहिए। वर्ष 2007 में भी इसी प्रकार की सिफारिशें दी गईं थी जिससे शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आ गई थी जिसकी वजह से तत्कालीन वित्त मंत्री पी. चिदंबरम को यह घोषणा करनी पड़ी थी कि सरकार एेसे कोई उपाय नहीं करेगी।   

पार्टिसिपेटरी नोट्स यानी पी-नोट्स भारत में पंजीकृत विदेशी संस्थागत निवेशकों (एफ.आई.आई.) द्वारा विदेशी धनी निवेशकों को जारी किए जाते हैं। एेसे विदेशी निवेशक जो भारतीय बाजारों में निवेश करना चाहते हैं लेकिन वह बाजार नियामक के पास खुद को पंजीकृत कराने की लंबी और समय खपाने वाली प्रक्रिया से बचते हैं, इन पी-नोट्स का इस्तेमाल करते हैं। इससे सीधी उनकी पहचान छुपी रहती है। 

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