‘वन रैंक वन पैंशन’ का फैसला पहले हो जाना चाहिए था: राहुल

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Tuesday, February 25, 2014-4:45 PM

चंडीगढ़: सीमा पर जोखिम भरी स्थितियों में दुश्मन का मुकाबला करने वाले बहादुर सैनिकों को देश हमेशा सलाम करता है परंतु सोमवार को दृश्य कुछ अलग ही था। देश के लिए अहम युद्ध लडऩे वाले बहादुर पूर्व सैनिक कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी के आगे नतमस्तक दिखे। देर शाम चंडीगढ़ क्लब के पास पंजाब कांग्रेस के कार्यक्रम में बड़ी संख्या में पहुंचे पंजाब-हरियाणा के पूर्व सैनिक ‘वन रैंक वन पैंशन की मांग मानने पर आभार जताने पहुंचे थे। राहुल निर्धारित समय से 2 घंटे बाद पहुंचे।

राहुल ने मंच पर जाने से पहले सभी पूर्व सैनिक अधिकारियों के पास जाकर अकेले-अकेले बात की। इससे पूर्व सैनिकों का जोश और भी बढ़ गया और उन्होंने राहुल के पक्ष में नारे लगाने शुरू कर दिए। इसके बाद पूर्व सैनिकों की सभा को संबोधित करते हुए राहुल ने स्वीकारा कि फैसले में देरी हुई और 25 साल से लटक रहा यह फैसला पहले हो जाना चाहिए था। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह फैसला प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का है।

उन्होंने तो इसे लागू करवाने में सहायता की है। यह फैसला दिल से लिया गया है, क्योंकि सैनिक भी देश के लिए दिल से कार्य करते हैं। उन्होंने कहा कि पूर्व सैनिक अपनी जिंदगी, पसीना व खून देश को देते हैं। उन्हें हमारा धन्यवाद नहीं करना चाहिए, बल्कि हम उनके कर्जदार हैं। हाल ही में उत्तराखंड में आए कुदरती संकट के समय जिस तरह सेना व एयरफोर्स के जवानों ने लोगों की जानें बचाईं, उसकी मिसाल देना मुश्किल है। राहुल ने बेशक कोई राजनीतिक बात तो सीधे तौर पर नहीं की पर अप्रत्यक्ष तौर पर कहा कि वायदे करना तो आसान है परंतु इन्हें लागू करना सबसे बड़ी चुनौती होती है। 

पंजाब प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष प्रताप सिंह बाजवा ने कहा कि वन रैंक वन पैंशन की मांग पूरी होने के बाद 14 लाख इन सर्विस तथा 25 लाख पूर्व सैनिकों को लाभ मिलेगा। पंजाब के विपक्ष के नेता सुनील जाखड़ ने कहा कि यह एक साहसिक फैसला है। मंच पर थल, जल व हवाई सेना के पूर्व अधिकारियों ने राहुल को पूर्व सैनिकों की ओर से सम्मान चिन्ह पेश किया। मंच की कार्रवाई चला रहे रिटायर्ड ब्रि. कुलदीप सिंह काहलों ने अलग-अलग पूर्व सैनिक संगठनों की ओर से अपनी मांगों संबंधी दिए गए ज्ञापन राहुल गांधी को सौंपे।

आत्मविश्वास से भर रहे हैं राहुल

महीनेभर पहले एक चैनल पर इंटरव्यू के दौरान मुद्दों से भटकने और आत्मविश्वास खोने के लिए बुरी तरह आलोचनाएं झेल चुके कांग्रेस के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष राहुल गांधी अब धीरे-धीरे मैज्योरिटी दिखाने लगे हैं। सोमवार को यहां समाचार पत्रों के संपादकों के साथ एक इंटरएक्शन में राहुल पहले से कहीं अधिक आत्मविश्वास से लबरेज दिखे। कठिन से कठिन सवालों का भी उन्होंने बड़ी बेबाकी और हाजिर जवाबी से उत्तर दिया।

करीब आधे घंटे तक चले इस अनौपचारिक इंटरएक्शन में करीब 2 दर्जन संपादकों तथा उनके प्रतिनिधियों ने भाग लिया। पिछले महीने चैनल पर इंटरव्यू के दौरान राहुल जिस तरह घबराए-घबराए लग रहे थे और साधारण प्रश्नों का उत्तर देने में भी कठिनाई महसूस कर रहे थे, आज वैसा कुछ भी देखने को नहीं मिला।

न तो राहुल किसी प्रश्न के उत्तर में कहीं अटके और न ही कोई बात दोहराई। संपादकों ने राहुल से भारत के प्रति उनका विजन, सिस्टम में बदलाव, औरतों का सशक्तिकरण, शिक्षा क्षेत्र का आधुनिकीकरण, 1984 के सिख विरोधी दंगों तथा उनमें कुछ कांग्रेसियों का हाथ होने की बात स्वीकारने, पूर्व सैनिकों के लिए ‘वन रैंक, वन पैंशन’ फार्मूला लागू करने के संबंध में कुछ वर्गों द्वारा जताई गई आशंकाएं, उनके पिता राजीव गांधी के हत्यारों तथा कुछ अन्य को जेल से रिहा करने पर उनकी प्रतिक्रिया और पंजाब कांग्रेस में गुटबाजी से जुड़े सवाल पूछे थे।

इस प्रकार के इंटरएक्शन राहुल देशभर के समाचार पत्रों के संपादकों तथा अन्य वर्गों के साथ कर रहे हैं। संभवत: यह आत्मविश्वास इसी कवायद का नतीजा है। स्पष्ट है कि राहुल गांधी बड़ी तेजी से अपने इमेज मेकओवर की कोशिश में जुटे हुए हैं।

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