आतंकियों द्वारा प्रवासियों पर हमले कश्मीर के विकास और प्रगति में बाधक

Edited By ,Updated: 12 Feb, 2024 02:23 AM

attacks on migrants by terrorists hinder the development and progress of kashmir

जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान के पाले हुए आतंकवादियों द्वारा हिंसक गतिविधियां लगातार जारी हैं। गत वर्ष दिसम्बर में पुंछ में सेना के 2 वाहनों पर घात लगा कर किए गए हमले में चार सैनिकों की मौत हो गई जबकि इस वर्ष जनवरी में पुंछ क्षेत्र में कृष्णा घाटी के...

जम्मू-कश्मीर में पाकिस्तान के पाले हुए आतंकवादियों द्वारा हिंसक गतिविधियां लगातार जारी हैं। गत वर्ष दिसम्बर में पुंछ में सेना के 2 वाहनों पर घात लगा कर किए गए हमले में चार सैनिकों की मौत हो गई जबकि इस वर्ष जनवरी में पुंछ क्षेत्र में कृष्णा घाटी के नजदीक एक जंगल से सेना के एक काफिले पर भारी गोलीबारी की गई। उल्लेखनीय है कि 5 अगस्त, 2019 को गृहमंत्री अमित शाह ने राज्यसभा में जम्मू-कश्मीर बारे पार्टी का संकल्प घोषित करते हुए राज्य को विशेष अधिकार देने वाली धारा 370 हटाने की घोषणा की थी। 

इसके बाद जम्मू-कश्मीर में पाक प्रायोजित आतंकवाद की घटनाओं में कुछ कमी आई थी परंतु अब कुछ समय से यहां हिंसा की घटनाओं में वृद्धि देखने को मिल रही है। न सिर्फ सुरक्षा बलों के सदस्यों पर हमले हो रहे हैं बल्कि स्थानीय लोगों के अलावा यहां दूसरे राज्यों से आकर काम करने वाले प्रवासियों को भी निशाना बनाया जा रहा है। इस वर्ष की दूसरी आतंकवादी घटना में 7 फरवरी को हुई जब आतंकवादियों ने रोजगार के सिलसिले में श्रीनगर आए अमृतसर (पंजाब) के रहने वाले दो प्रवासियों को गोली मार दी। इनमें से 31 वर्षीय अमृतपाल की तो मौके पर ही मौत हो गई जबकि 25 वर्षीय रोहित ने अगले दिन इलाज के दौरान दम तोड़ा। अधिकारियों के अनुसार इन हत्याओं का उद्देश्य कश्मीर में बाहर से आकर काम करने वाले लोगों में भय उत्पन्न करना था। 

यह पहला मौका नहीं है जब कश्मीर में प्रवासियों पर आतंकियों का हमला हुआ है। नवम्बर, 2022 में उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले के रहने वाले मोनीश कुमार व राम सागर नाम के 2 मजदूरों की आतंकियों ने शोपियां में ग्रेनेड मारकर हत्या कर दी थी, जबकि अगस्त, 2022 में बांदीपोरा में बिहार के मधेपुरा के रहने वाले 19 वर्र्षीय मोहम्मद अमरेज की आतंकियों ने गोली मारकर हत्या कर दी थी। इसी प्रकार गत वर्ष  30 मई को अनंतनाग में सर्कस में काम करने वाले एक कर्मचारी की गोली मार कर तथा 31 अक्तूबर को पुलवामा जिले में बिहार के एक ईंट भट्ठा मजदूर की हत्या कर दी गई थी। बहरहाल, 7 फरवरी की घटना के बाद पुलिस ने कश्मीर में गैर-कश्मीरियों की रिहायश वाले इलाकों में सुरक्षा व्यवस्था और पुलिस गश्त बढ़ा दी है। 

उल्लेखनीय है कि कश्मीरी पंडित और बाहरी राज्यों से आने वाले कामगार तथा बाहर से आए सरकारी कर्मचारी सरकारी क्वार्टरों या कश्मीर के कुछ विशेष इलाकों में रहते हैं जिन्हें ‘माइनोरिटी क्लस्टर’ के रूप में चिन्हित किया गया है। कश्मीर पुलिस के आई.जी. विधि कुमार विरदी ने जवानों को सुरक्षा व्यवस्था की समीक्षा करने और ऐसे हमलों से बचाव तथा सद्भावना पूर्ण वातावरण बनाए रखने के लिए व्यवस्था करने के निर्देश भी दिए हैं। इसी के अंतर्गत उन्होंने कश्मीर के सभी जिलों के जिलाधीशों और जिला पुलिस प्रमुखों के साथ-साथ वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों के साथ बैठक भी की और सुरक्षा व्यवस्था चाक-चौबंद करने के निर्देश भी दिए हैं। 

वास्तव में कश्मीर में गैर-कश्मीरियों तथा कश्मीरी पंडितों की टारगेट किलिंग का यह सिलसिला अगस्त 2019 में धारा 370 हटाए जाने के बाद शुरू हुआ है। आतंकवादी कश्मीरी पंडितों और गैर-कश्मीरियों की हत्या करके उनमें भय उत्पन्न करना चाहते हैं ताकि केंद्र सरकार द्वारा पुनर्वास की यह योजना पटरी से उतर जाए। अपनी इस योजना के कारण ही आतंकवादियों ने कश्मीरी पंडितों, प्रवासी गैर कश्मीरियों तथा पुलिस विभाग में काम करने वाले उन स्थानीय मुस्लिमों को भी निशाना बनाया है जिन्हें वे राष्ट्रवादी भारतीय मानते हैं। 

जम्मू-कश्मीर के विकास के लिए देश के हर हिस्से में बसने वाले लोगों के योगदान की जरूरत है। ये उत्तर प्रदेश और बिहार से वहां जाने वाले मजदूर भी हो सकते हैं, मुम्बई से फिल्मों की शूटिंग के लिए जाने वाले कलाकार भी हो सकते हैं और अन्य राज्यों के व्यापारी भी यहां आकर कश्मीर की आर्थिक प्रगति में योगदान दे सकते हैं। परंतु ऐसा तभी संभव होगा यदि गैर-कश्मीरी यहां स्वयं को सुरक्षित अनुभव करेंगे। अत: जहां ऐसी तुच्छ हरकतें करने वाले आतंकियों के विरुद्ध कठोरतम कार्रवाई करने की जरूरत है, वहां सुरक्षा व्यवस्था को भी स्थायी तौर पर मजबूत किया जाना चाहिए ताकि आतंकवादी इस तरह के हमले न कर सकें और गैर-कश्मीरी स्वयं को कश्मीर में सुरक्षित अनुभव करें।

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