दाग हैं मगर गरिमा रहे कुछ बाकी

Edited By ,Updated: 26 Jun, 2022 06:18 AM

there are stains but there is some dignity left

दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में आजादी के कुछ दशकों बाद जनप्रतिनिधियों की सत्ता के लिए भूख ने दलबदल की राजनीति को प्रश्रय दिया। इस दलबदल में जिस हद तक लोकतांत्रिक मूल्यों से

दुनिया के सबसे बड़े लोकतंत्र में आजादी के कुछ दशकों बाद जनप्रतिनिधियों की सत्ता के लिए भूख ने दलबदल की राजनीति को प्रश्रय दिया। इस दलबदल में जिस हद तक लोकतांत्रिक मूल्यों से समझौता किया गया, निश्चित ही उसने राजनेताओं के दामन पर दाग के छींटे डाले। जिस दल को दागदार बता कर व तमाम खामियां जता कर नेता चुनाव जीतता है, कुर्सी के लिए फिर उस दल में शामिल हो जाता है। दूसरा, चुनावी राजनीति के बेहद खर्चीली होने के कारण भी राजनीति में कदाचार को बढ़ावा मिला। 

सभी राजनेता ऐसे भी नहीं हैं। जनप्रतिनिधि लंबे राजनीतिक संघर्ष के बाद विधायक बनता है। वह लाखों लोगों का प्रतिनिधित्व करता है। ऐसे में कम से कम उसके खिलाफ मीडिया में ऐसी शब्दावली का प्रयोग तो नहीं ही होना, चाहिए जो जानवरों के लिए की जाती है। ऐसी शब्दावली से केवल जनप्रतिनिधियों की छवि को ही आंच नहीं, बल्कि लोकतंत्र की गरिमा को भी ठेस पहुंचती है। यह गरिमा बनाए रखना हमारा नैतिक दायित्व है। 

10 जून, 2022 को एक राष्ट्रीय दैनिक अखबार में यह समाचार छपा कि राज्यसभा के चुनावों के अखाड़े में दंगल आज। इसी तरीके के समाचार विभिन्न अखबारों में छपे जिस में यह कहा गया कि पाॢटयों द्वारा विधायकों को बाड़े के रूप में होटल में रखा गया। मैं ग्रामीण आंचल से संबंध रखता हूं, आज भी गांव में बाड़े को पशुशाला कहा जाता है। हमारे जनप्रतिनिधि एम.एल.ए. व एम.पी. के रूप में सरकारों के गठन में एक अहम भूमिका निभाते हैं। इसी तरह विधायक राज्यसभा के गठन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। 

विधायकों को होटलों में रखने की आवश्यकता इसलिए पड़ी क्योंकि विभिन्न सरकारों को बनाने या गिराने से लेकर राज्यसभा के चुनाव के समय विधायकों के मतों की जरूरत पड़ती है। विपक्ष में बैठे हुए सदस्यों को भी लाभ का लालच पद या पैसे के रूप में दिया जाता है। इस किस्म की विधायकों की खरीद-फरोख्त को राजनीति में ‘हॉर्स ट्रेडिंग’ कहा जाता है। 
कहां से आया यह शब्द? नि:संदेह इस शब्द का प्रयोग वाकई में घोड़ों की खरीद-फरोख्त के संदर्भ में होता रहा है। 

करीब 1820 के आस-पास घोड़ों के व्यापारी घोड़े बेचने के लिए इस शब्द का प्रयोग करते हुए अनैतिक नीति अपनाते थे। वे खरीददार को उसके अवगुण न बताते हुए घोड़ों को बेच देते थे। एक विधायक, जो कि लाखों लोगों का प्रतिनिधित्व करता है जब उसके बारे में यह कहा जाता है कि इस प्रदेश का एम.एल.ए. हॉर्स ट्रेडिंग में शामिल है, तो वहां की आम जनता  की भावना को ठेस पहुंचती है। हरियाणा का एक विधायक 3.04 लाख, राजस्थान का विधायक 3.91 लाख, कर्नाटक का 3.07 लाख, महाराष्ट्र का 4.06 लाख, उत्तर प्रदेश का विधायक 5.68 लाख लोगों का प्रतिनिधित्व करता है। उनके बारे में इस शब्द का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए। 

दुखद पहलू यह है कि किसी भी राजनीतिक दल या बुद्धिजीवी ने इस शब्द की आलोचना नहीं की। आखिर बाड़ेबंदी की जरूरत इसलिए पड़ी, क्योंकि विधायक द्वारा अपने हितों के लिए अपनी ही पार्टी के विरुद्ध वोट करने से राजनीतिक पार्टियों को अपने विधायकों पर विश्वास नहीं रहा। तभी उनको होटलों में बांधकर रखा जाता है और वहीं से ही विधानसभा या लोकसभा में लाया जाता है। पार्टी किसी भी राजनीतिज्ञ के लिए मां जैसी होती है। जब वह अपने राजनीतिक करियर की शुरूआत करता है तो पार्टी की सहायता से ही वह आगे एम.पी. बनता है और जब पार्टी सत्ता में आती है तब वह मंत्री बन कर सत्ता का भी भोग करता है। लेकिन जब पार्टी को उसकी जरूरत होती है तो वह अपना हित साधते हुए पार्टी से किनारा कर देता है। वह आर्थिक लाभ या पद के लिए लालच में बिकने के लिए तैयार होता है। बाड़ा व हॉर्स ट्रेडिंग का संबंध पशुओं से है, ऐसे में इन कांडों के जरिए भारतीय राजनीति का काला चेहरा सामने आता है। 

हरियाणा के कांग्रेसी जनप्रतिनिधियों को छत्तीसगढ़ के होटल में ले जाया गया। वहां उनको बताया गया कि कैसे वोट डालना है। उसके बाद एक वोट का भी कैंसिल हो जाना लोकतांत्रिक परंपरा के लिए गहरा तमाचा है। क्या विधायक इतने लंबे समय के बाद भी इतना प्रशिक्षित नहीं हो पाता कि ठीक से मतदान कर सके? जब हमारे जनप्रतिनिधियों की खरीद-फरोख्त की खबर आती है तो क्या हमारे लोकतंत्र की गरिमा बाधित नहीं होती? एक भूतपूर्व केंद्रीय मंत्री ने कहा था कि राज्यसभा का टिकट 100-100 करोड़ में बिकता है। जब जनप्रतिनिधियों की सीटें यूं ही बिकेंगी तो खरीदने वाला जनता की सेवा न करते हुए अपने पैसे पूरे करने के लिए भ्रष्टाचार को ही तो अपनाएगा।-अनिल गुप्ता ‘तरावड़ी’
 

Trending Topics

West Indies

137/10

26.0

India

225/3

36.0

India win by 119 runs (DLS Method)

RR 5.27
img title img title

Everyday news at your fingertips

Try the premium service

Subscribe Now!