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विशेषज्ञ लंबे समय से यह सोच रहे थे कि क्या फोन ने जन्म दर में गिरावट में कोई भूमिका निभाई है, जो 2007 में शुरू हुई थी, उसी वर्ष, जब एप्पल ने आईफोन...
दलबदल, आहत अहंकार और टूटी वफादारी के इस दौर में, हालिया राज्य चुनावों में तृणमूल कांग्रेस, द्रमुक और माकपा की हार और निराशा के कारण विपक्ष के...
10 जून, 2026 को, भारत अपनी लोकतांत्रिक यात्रा में एक उल्लेखनीय क्षण का गवाह बनेगा, जब नरेंद्र मोदी निरंतर कार्यकाल के मामले में देश के इतिहास में...
अमृतसर की चहल-पहल भरी सड़कों पर, जहां हरिमंदिर साहिब का सुनहरा गुंबद प्राचीन मंदिरों के साथ चमकता है, या पंजाब के उपजाऊ खेतों में, जहां दोनों धर्मों...
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हरियाणा की पहचान केवल कृषि, खेल और सैनिक परंपरा तक सीमित नहीं है, बल्कि सामाजिक सुरक्षा की अनेक जनहितकारी योजनाओं के कारण भी राज्य ने पूरे देश में अपनी अलग पहचान बनाई है। जब भी वृद्धावस्था पैंशन की बात होती है तो लोगों को सबसे पहले चौधरी देवीलाल का नाम याद आता है। हरियाणा देश का पहला राज्य माना जाता है जिसने बुजुर्गों के सम्मान और सामाजिक सुरक्षा के लिए बुढ़ापा पैंशन जैसी योजना को लागू किया।
आजकल इंटरनैट ऐसे पोस्ट से भरा पड़ा है जो भारतीयों के एक वर्ग के उस उच्छृंखल और शोर-शराबे वाले व्यवहार को दिखाते हैं, जब वे विदेश जाते हैं और खुद को मूर्ख साबित करने के साथ-साथ देश की प्रतिष्ठा को भी ठेस पहुंचाते हैं।
सिद्धारमैया, जो कर्नाटक के सबसे लंबे समय तक मुख्यमंत्री रहे हैं, ने इस्तीफा दे दिया और अपने कट्टर प्रतिद्वंद्वी डी.के. शिवकुमार के लिए रास्ता साफ कर दिया है। हालांकि, कांग्रेस आलाकमान को पार्टी के भीतर सिद्धारमैया के वफादारों को विश्वास में लेना होगा। इसमें उन्हें कैबिनेट में जगह देना और राज्य कांग्रेस इकाई में नेतृत्व के पद प्रदान करना शामिल हो सकता है।
हिंदी पत्रकारिता, जो कभी मिशन थी, अब बाजार के आतंक और भय के बीच पिस रही है। 30 मई को जब देश हिंदी पत्रकारिता दिवस मनाता है, तब यह उस यात्रा का स्मरण है, जिसकी शुरुआत 1826 में उदन्त मार्तण्ड से हुई थी और जो आज मोबाइल स्क्रीन, यूट्यूब चैनलों और डिजिटल स्टूडियो तक पहुंच चुकी है।
मेरे परम मित्र, उर्दू के विद्वान सेवानिवृत्त एस.डी.एम. महरूम जनाब बी.एल. सिक्का साहब ने वर्ष 1988 में फाजिल्का में एस.डी.एम. रहते हुए एक अंतर्राष्ट्रीय मुशायरे का आयोजन करवाया था।
भारत में कानून की समानता का सिद्धांत संविधान का मूल आधार है। अनुच्छेद 14 कहता है कि कानून के समक्ष सब समान हैं। लेकिन वास्तविकता अक्सर इसके उलट दिखती है। बलात्कार और हत्या के मामलों में सजा काट रहे डेरा सच्चा सौदा प्रमुख गुरमीत राम रहीम सिंह का मामला इसका स्पष्ट उदाहरण है। रोहतक की सुनारिया जेल, जहां वह बंद हैं, उनके लिए लगभग होटल जैसी सुविधाओं का केंद्र बन गई है, जबकि आम कैदी कठिन परिस्थितियों में सजा काटते हैं।
पंजाब की राजनीति में यह चर्चा जोरों पर चल रही है कि क्या विधानसभा के चुनाव अपने निर्धारित समय से पहले करवाए जा सकते हैं? हालांकि अभी तक सरकारी तौर पर ऐसा कोई ऐलान सामने नहीं आया, लेकिन राजनीतिक गलियारों, टी.वी. बहसों और सोशल मीडिया पर यह मुद्दा लगातार चर्चा का विषय बना हुआ है। समयपूर्व चुनाव होने की चर्चाओं के लिए केवल राजनीतिक नेताओं की बयानबाजी ही जिम्मेदार नहीं, बल्कि देश के अंदर चल रही एस.आई.आर., जनगणना और मौसम भी शामिल हैं। यह चर्चा क्यों शुरू हुई, इसे समझने के लिए हमें ऊपर दिए गए ङ्क्षबदु
13 मई को सी.बी.एस.ई. ने कक्षा 12 के परिणाम घोषित किए, जिसमें उत्तीर्ण प्रतिशत में तीन अंकों की गिरावट दर्ज की गई। यह गिरावट पिछले वर्ष के 88.39: से घटकर 85.20: हो गई है। कई छात्र पिछले वर्ष के छात्रों की तुलना में उत्तीर्ण प्रतिशत में पिछड़ गए होंगे। उत्तीर्ण प्रतिशत में यह भारी गिरावट इतनी तीव्र है कि ‘‘इसे इस वर्ष प्रश्नपत्र अधिक कठिन थे’’ जैसे सामान्य बहाने से टाला नहीं जा सकता।
सिख समुदाय और भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के बीच का संबंध आधुनिक भारतीय इतिहास के सबसे महत्वपूर्ण लेकिन सबसे कम ईमानदारी से जांचे गए अध्यायों में से एक है। इसकी शुरूआत स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान भरोसे, बलिदान और सांझा संघर्ष के साथ हुई थी, लेकिन समय के साथ यह अविश्वास, टकराव और अनसुलझे संवैधानिक सवालों में बदल गया।
शरद पवार ने देश की विदेश नीति पर आंतरिक राजनीतिक व्यवहार के संदर्भ में जो कुछ कहा है उस पर गंभीरता से विचार होना चाहिए। उन्होंने कहा है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भारत के बाहर देश की प्रतिष्ठा की रक्षा के लिए काम कर रहे हैं। हमारे राजनीतिक विचार अलग-अलग हो सकते हैं लेकिन जब देश के सम्मान की बात आती है तो राजनीतिक मतभेदों को बीच में नहीं लाना चाहिए।
भारत के मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत द्वारा अपनी अदालत में बिना सोचे-विचारे की गई टिप्पणियां, जिसमें उन्होंने युवा भारतीयों को कॉकरोच के रूप में वर्णित किया जो नौकरियां न मिलने पर ‘व्यवस्था पर हमला’ करने के लिए सोशल मीडिया, पत्रकारिता और आर.टी.आई. सक्रियता की ओर रुख करते हैं, वास्तव में अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण थीं।
हमारे देश भर में फैले जंगलों, पहाडिय़ों और दूरदराज की बस्तियों में एक शांत लेकिन सफल परिवर्तन चल रहा है। जनजातीय समुदाय लंबे समय से भारत की विकास गाथा के केंद्र में अपने उचित स्थान का इंतजार कर रहे थे। आज वे राष्ट्र की प्रगति के सक्रिय वास्तुकार के रूप में उभर रहे हैं। जनजातीय गरिमा उत्सव की यही भावना है-विकसित भारत की यात्रा का एक राष्ट्रीय उत्सव, जहां प्रगति भूगोल या परिस्थिति का विशेषाधिकार नहीं, बल्कि प्रत्येक नागरिक का समान अधिकार है।
वर्तमान लोकतांत्रिक व्यवस्था में चुनावों के समय हर कोई नेता और राजनीतिक दल देश के मतदाताओं को दिन में तारे दिखाने के बड़े-बड़े वादे करते हैं। वे उनके जीवन को अप्रत्याशित स्वर्ग जैसी सुविधाओं से लबालब सराबोर करने के दावे पर दावे ठोकते हैं। अमरीका जैसी लोकतांत्रिक महाशक्ति के भीतर भी राष्ट्रपति चुनावों के समय विभिन्न पाॢटयों से संबंधित नेता ऐसे ही वादे करते देखे जाते हैं। लेकिन व्यावहारिक तौर पर हमेशा ऐसे वादों और हकीकत में जमीन-आसमान का फर्क देखा जाता है।
‘पहले से ही ऐसे परजीवी हैं जो व्यवस्था पर हमला करते हैं और आप भी उनमें शामिल होना चाहते हैं। कॉक्रोच जैसे कुछ युवा हैं जिन्हें कोई रोजगार नहीं मिलता... उनमें से कुछ मीडिया बन जाते हैं, कुछ सोशल मीडिया, कुछ सूचना के अधिकार और वे हर किसी पर हमला करना शुरू कर देते हैं’, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की बेरोजगार युवाओं के बारे में इस टिप्पणी से सोशल मीडिया पर हलचल मच गई, विवादों का अंबार लग गया, और एक नई पार्टी का जन्म हुआ-कॉक्रोच जनता पार्टी (सी.जे.पी.)।
जब मैं तिरुप्पुर के स्कूल में पढ़ता था, तब मेरे मन में देश को लेकर कई सपने थे। मेरे मन में अक्सर ये सवाल उठते थे-भारत अपनी महानता कब वापस पाएगा? विश्व मंच पर एक शक्तिशाली राष्ट्र के रूप में कब उभरेगा?
हाल ही में आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री चंद्रबाबू नायडू ने कहा कि उनकी सरकार तीसरे बच्चे के जन्म पर 30 हजार और चौथे के जन्म पर 40 हजार रुपए देगी। इस देश में दशकों से परिवार नियोजन पालिसी के तहत लोगों को छोटे परिवार रखने के लिए कहा जाता रहा है। इस लेखिका ने अपने बचपन में रेलवे स्टेशनों पर ऐसे पोस्टर औ
मेष राशि वालों आज का दिन आपके लिए सामान्य रहेगा। कार्यक्षेत्र में आपको नए अवसर मिल सकते हैं। बेरोज़गार लोगों को काम मिल सकता है।
वृष राशि वालों आज का दिन आपके लिए शुभ अवसर लेकर आ सकता है। माता-पिता द्वारा दी गई किसी सलाह को आज नज़रअंदाज़ न करें।
मिथुन राशि वालों आज का दिन आपके लिए बढ़िया रहेगा। आज पैसों के मामले में सतर्क रहने की ज़रूरत है। दोस्तों के साथ किसी खास स्थान पर घूमने जाने का...
कर्क राशि वालों आज का दिन आपके लिए अनुकूल साबित हो सकता है। संतान को मिली सफलता से खुशी का माहौल रहेगा।
सिंह राशि वालों आज का दिन आपके लिए खुशनुमा रहेगा। लंबे समय से रुके काम आज गति पकड़ सकते हैं।
कन्या राशि वालों आज का दिन आपके लिए अच्छा रहेगा। उधार पर दिया पैसा आज वापस मिल सकता है। परिवार में किसी शुभ कार्य का आयोजन हो सकता है।
तुला राशि वालों आज का दिन आपके लिए बढ़िया रहेगा। कामकाज के चलते यात्रा करनी पड़ सकती है। बिज़नेस करने वालों को अपने कर्मचारियों पर ध्यान देने की...
वृश्चिक राशि वालों आज का दिन आपके लिए बेहतर साबित हो सकता है। लंबे समय से रुका हुआ काम पूरा होने के संकेत हैं।
धनु राशि वालों आज का दिन आपके लिए फेवरेबल रहेगा। नौकरीपेशा जातक काम में बदलाव के बारे में सोच सकते हैं।
मकर राशि वालों आज का दिन आपके लिए उत्साह से भरा रहेगा। आज अपनी वाणी में मधुरता बनाए रखें, नहीं तो बने-बनाए काम खराब हो सकते हैं।
कुंभ राशि वालों आज का दिन आपके लिए फायदेमंद रहेगा। व्यापार में अच्छा धन लाभ होने के योग हैं। युवा अपने करियर को लेकर नई योजना बना सकते हैं।
मीन राशि वालों आज का दिन आपके लिए शुभ रहेगा। कार्यक्षेत्र में आपके सुझावों की प्रशंसा हो सकती है। परिवार में सुख-शांति बनी रहेगी।
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14/06/2026 10:30 IST
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