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भारत की राजनीति हर चीज को राजनीतिक नजरिए से देखने-दिखाने को अभिशप्त है। ताजा उदाहरण गहराते ऊर्जा संकट और बढ़ते विदेशी मुद्रा संकट से निपटने के लिए...
16 मई को ठीक 6 महीने हुए जब सरकार ने ‘सबको बीमा, सबकी रक्षा’ जैसे आकर्षक नाम से बीमा व्यवसाय को शत-प्रतिशत विदेशी पूंजी के लिए खोलने का बिल पेश किया...
यू.ए.पी.ए. जैसे कड़े कानून के तहत गिरफ्तार आरोपियों को जमानत देने पर सुप्रीम कोर्ट की विभिन्न बैंचों द्वारा लिए गए विरोधाभासी रुख के कारण कानून की...
क्या बीते 3 महीने से ईरान व अमरीका-इसराईल के बीच तनाव के चलते भारत में स्टील के दाम आसमान छू रहे हैं? एक मकान बनाने से लेकर देश के बड़े...
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भारतीय जेलें आज घोर अव्यवस्था का शिकार होने के कारण ‘सुधार घर’ की बजाय ‘बिगाड़ घर’ बन कर रह गई हैं। जेलोंमें ङ्क्षहसा, मारपीट और पुलिस की हिरासत से हवालातियों की फरारी एक आम बात हो गई है जिसकी इसी वर्ष लगभग 4 महीनों की घटनाएं निम्न में दर्ज हैं :
कुछ साल पहले, मैं एक बहुत लंबे प्रेरणादायक भाषण में बैठा था। वक्ता कड़ी मेहनत के बारे में भावुक होकर चिल्लाया, ‘‘कड़ी मेहनत करो!’’ उसने गरजते हुए कहा, ‘‘सफलता केवल कड़ी मेहनत से ही मिलती है!’’ लगभग एक घंटे तक उसने आलस्य पर हमला किया, अनुशासन की प्रशंसा की और संभवत: आधी भीड़ को डायरी खरीदने और सुबह 5 बजे उठने के लिए डरा दिया।
हाल ही में भारत की आंखें पंजाब से आई बेहद परेशान करने वाली खबरों से खुलीं। कथित तौर पर केंद्रीय जांच ब्यूरो (सी.बी.आई.) ने विजीलैंस प्रतिष्ठान से जुड़े अधिकारियों के परिसरों पर छापेमारी की, जबकि एक अन्य मामले में डी.आई.जी. रैंक के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी को रिश्वत के आरोपों में गिरफ्तार किया गया।
यह किसी से छिपा नहीं है कि भारत के धार्मिक स्थलों तथा अन्य धार्मिक संस्थानों, ट्रस्ट और कालेधन से खरीदे गए सोने का भंडार 15 से 20 हजार टन या इससे अधिक का होगा। इसका अर्थ है कि इसे अगर संवैधानिक और कानूनी तरीके से तिजोरियों से बाहर निकलवा लिया जाए और उसका इस्तेमाल तेल, गैस और अन्य नितांत आवश्यक वस्तुओं के आयात पर किया जाए तो हम वर्तमान विदेशी मुद्रा संकट, अगर वास्तव में है, से बखूबी निपट सकते हैं। लेकिन सबसे बड़ा सवाल यह है कि यह संभव कैसे हो? सीधा सा उत्तर है कि जैसे नोटबंदी की थी, वैसे ही सोनाब
श्री गुरु ग्रंथ साहिब और पावन गुटका साहिब की बेअदबी करने और सिख समाज की धार्मिक भावनाओं को भड़काने की घटनाएं सामने आने के कारण, सिख संगत और सिख संस्थाओं द्वारा ऐसी कार्रवाइयां करने वालों को कड़ी सजा देने के लिए एक प्रभावशाली कानून बनाने की मांग लंबे समय से की जा रही थी। इस कारण 2016 में अकाली-भाजपा सरकार द्वारा और 2018 में कांग्रेस सरकार द्वारा पंजाब विधानसभा के माध्यम से 2 बार बिल पास किए गए लेकिन ये कानून का रूप अख्तियार न कर सके, जिस कारण सिख संगत बेअदबी के दोषियों को कड़ी सजा दिलवाने के लिए
जब से प्रधानमंत्री ने देशवासियों को सोना न खरीदने की अपील की है, सोशल मीडिया पर कई तरह की प्रतिक्रियाएं आ रही हैं। उनमें से एक वीडियो पोस्ट काफी वायरल हो रहा है, जिसमें सरकार की सोने से जुड़ी नई नीति पर गहरी चिंता जताई गई है। पोस्ट में कहा गया है कि सरकार अब आम घरों में पड़े सोने को वित्तीय संपत्ति बनाने की दिशा में कदम बढ़ा रही है।
मई की इस तपती दोपहर में देश का भविष्य, हमारा युवा, सड़कों पर खड़ा है। दिल्ली का जंतर-मंतर हो या पटना की गलियां, हर तरफ एक ही आवाज गूंज रही है, ‘न्याय दो!’
रबीन्द्र नाथ टैगोर का जन्म 7 मई, 1861 और निधन 7 अगस्त, 1941 को हुआ। बापू गांधी 2 अक्तूबर, 1869 को जन्मे और 30 जनवरी, 1948 को मृत्यु को प्राप्त हुए। दोनों एक ही युग के प्रतिनिधि थे लेकिन भिन्न क्षेत्रों में, एक को गीतांजलि के कवि, राष्ट्रगान के रचयिता, नोबेल पुरस्कार विजेता और विश्व-कवि के रूप में याद किया जाता है और दूसरे को भारत का भाग्य विधाता, जिसने आजादी की लड़ाई में अग्रणी भूमिका निभाई। टैगोर ने शुरुआती वर्षों में ब्रिटिश शासन को पूरी तरह शत्रु की तरह नहीं देखा था। वह मानते थे कि पश्चिम से
देश की सबसे बड़ी मैडीकल प्रवेश परीक्षा नीट-यू.जी. 2026 को रद्द किए जाने के निर्णय ने करोड़ों भारतीय परिवारों को झकझोर दिया है। लाखों विद्यार्थियों ने वर्षों की मेहनत, अनुशासन और मानसिक संघर्ष के बाद इस परीक्षा में भाग लिया था। कई अभ्यर्थियों ने दिन-रात की पढ़ाई, सामाजिक जीवन से दूरी और आर्थिक कठिनाइयों के बीच डाक्टर बनने का सपना संजोया था। लेकिन परीक्षा रद्द होने की खबर ने अचानक उन सपनों के आगे अनिश्चितता का धुंधला पर्दा खड़ा कर दिया है।
शुभेंदु अधिकारी उन गिने-चुने राजनेताओं में से हैं, जिन्होंने विनम्रता, वैचारिक प्रतिबद्धता, हिंदू गौरव के प्रति निडर रुख और विकास की एक स्पष्ट दृष्टि दिखाई है। हालांकि मैं उनसे कभी मिला नहीं हूं, लेकिन मुझे लगता है कि वह डा. श्यामा प्रसाद मुखर्जी की विरासत के सच्चे उत्तराधिकारी हैं।
यह देखकर बहुत दुख और परेशानी होती है कि युवा माता-पिता अपने छोटे बच्चों को मोबाइल डिवाइस छीन लिए जाने पर रोते हुए देखकर खुश होते हैं या इस बात का गर्व करते हैं कि उनके बच्चे खुद से बेहतर तरीके से डिवाइस चलाना जानते हैं।
ईरान की राजधानी तेहरान में मंगलवार को भूकंप के तेज झटकों ने लोगों को दहशत में डाल दिया। रिक्टर स्केल पर इसकी तीव्रता 4.6 मापी गई है। भूकंप का अहसास होते ही राजधानी और आसपास के इलाकों में हड़कंप मच गया और लोग अपनी जान बचाने के लिए सड़कों पर दौड़ पड़े।
पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के कारण संयुक्त अरब अमीरात के निर्माणाधीन संपत्ति बाजार में संपत्तियों के हस्तांतरण में देरी होने की संभावना है, जो अन्यथा तेजी से बढ़ रहा है। कई डिवैल्पर्स को अब इनपुट आपूॢत में बाधाओं, लागत में वृद्धि और बैंकों द्वारा वित्तपोषण में सख्ती के कारण 6 से 9 महीने तक की देरी का सामना करना पड़ रहा है।
भारत की मिड-डे मील योजना, जिसे अब प्रधानमंत्री पोषण शक्ति निर्माण योजना कहा जाता है, दुनिया की सबसे बड़ी स्कूल पोषण योजनाओं में से एक है। हर दिन यह योजना करोड़ों बच्चों तक इस उम्मीद के साथ भोजन पहुंचाती है कि देश का कोई भी बच्चा भूखे पेट पढ़ाई न करे। लेकिन अपनी महत्वाकांक्षी सोच और बड़े दावों के बावजूद, यह योजना आज भी बदइंतजामी, भ्रष्टाचार, कमजोर निगरानी और पोषण की कमी जैसी गंभीर समस्याओं से जूझ रही है। आए दिन सामने आने वाली घटनाएं, जैसे भोजन विषाक्तता, सड़ी-गली सामग्री, गंदे रसोईघर और दूषित भोज
विघटन में एकता या एकता में विघटन? चकरा गए? निश्चित रूप से, क्योंकि भाजपा की जीत के बाद विपक्षी दरारें चौड़ी हो गईं और हाल के राज्य चुनावों में टी.एम.सी., द्रमुक, माकपा, की हार के साथ हताशा घुल-मिल गई। क्या इंडिया ब्लॉक ने अपनी जीवंतता खो दी है? क्या इसने अपना ‘आत्म-विनाश’ बटन दबा दिया है? क्या इसके दिन गिनती के रह गए हैं?
हाल ही में एक खबर आई थी कि 45 प्रतिशत भारतीय अब अमरीका में नहीं रहना चाहते। उन्हें लगता है कि अमरीका में न अब उनका रोजगार सुरक्षित है, न ही जीवन। इसका कारण भी है। जब सरकार के बड़े-बड़े नेताओं और अधिकारियों द्वारा प्रवासियों के खिलाफ रोज नफरत भरे बयान दिए जाएं, उन्हें अमरीकी लोगों के रोजगार का चोर बताया जाए, उन्हें नर्क से आने वाला कहा जाए, यही नहीं, नौकरी देने वालों पर यह शर्त लगाई जाए कि यदि किसी बाहरी को नौकरी दे रहे हो, तो पहले यह बताओ कि उस नौकरी के लिए क्या कोई अमरीकी उपलब्ध नहीं था?
मेष: स्वास्थ्य सम्बंधित शिकायत हो सकती है। दुविधाजनक स्थितियों से निकलने
वृष: अपमान का सामना करना पड़ सकता है। घर-परिवार में सुखद वातावरण बना रहेगा।
मिथुन: पुराने कार्य का सार्थक परिणाम मिलेगा। प्रतियोगिता में सफलता मिलने के
कर्क: आर्थिक स्थिति में मजबूती आएगी। निजी सम्बन्धों में उदासीनता रहेगी। गृहस्थी का
सिंह: सोच-समझकर ही धन निवेश करें। हानि होने के संकेत है। पारिवारिक तनाव
कन्या: शारीरिक पीड़ा हो सकती है। पड़ोसियों से कटुता बढ़ेगी। परिजनो से मधुरता बनायें
तुला: कहीं न कहीं लाभ के योग हैं। छात्रों के करियर में प्रगति होगी। सम्मान व लाभ
वृश्चिक: घरेलू खर्चों की अधिकता रहेगी। मन परेशान रहेगा। बेवजह मन में आशंका रहेगी।
धनु: अनहोनी घटना हेतु आशंकित रहेगे। सोच-समझकर व्यापारिक निर्णय लें। आर्थिक
मकर: संतान को लेकर मन चिंतित रहेगा। पारिवारिक बुर्जुगों का स्वास्थ्य परेशान करेगा।
कुंभ: व्यवसाय में लाभ मिलेगा। न व्यवसाय के प्रारंभ हेतु समय शुभ है। मित्रों संग
मीन: शारीरिक व मानसिक कष्ट रहेगा। सिर की चोट लग सकती है सावधान रहें। प्रेम
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21/05/2026 09:30 IST
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