‘इमरान धड़े’ का बेलगाम उभार

Edited By ,Updated: 30 Mar, 2023 05:23 AM

unbridled rise of  imran faction

जिस कार में इमरान यात्रा कर रहे हैं, उस कार के शीशे को चूमते हुए, सुरक्षाकर्मियों पर हमला करते हुए अनुयायियों की तस्वीरें, जब उन्हें गिरफ्तार करने का प्रयास किया जाता है और जब वह सार्वजनिक रूप से आते हैं तो उन्मादी भीड़ एक पंथ के श्रद्धेय प्रमुख के...

जिस कार में इमरान यात्रा कर रहे हैं, उस कार के शीशे को चूमते हुए, सुरक्षाकर्मियों पर हमला करते हुए अनुयायियों की तस्वीरें, जब उन्हें गिरफ्तार करने का प्रयास किया जाता है और जब वह सार्वजनिक रूप से आते हैं तो उन्मादी भीड़ एक पंथ के श्रद्धेय प्रमुख के दृश्यों को सामने लाती है, जो अपने शब्दों और मात्र उपस्थिति के साथ अपने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर देता है। इमरान ने खुद के लिए एक ऐसे मसीहा की शख्सियत बनाई है, जो पाकिस्तान को उसकी सारी बुराइयों से छुटकारा दिलाएगा और उसे एक ‘मदीना’ राज्य में बदल देगा। उन्होंने सत्ता को चुनौती दी है, जैसा कि इतिहास में किसी अन्य पी.एम. ने नहीं किया था। 

इमरान खान ने खुद को एक वैचारिक धड़े या पंथ के नेता के रूप में पेश किया, जिसके समर्थक उनके लिए अपने प्राणों की आहुति तक दे सकते हैं। इमरान ने अपने फैन्स को उकसाते हुए कहा, ‘‘पुलिस द्वारा लाठीचार्ज/जेल किए जाने की चिंता मत करो। इसी तरह अल्लाह लोगों की परीक्षा लेता है। अगर तुम सब्र करो तो अल्लाह तुम्हें वैसा ही अज्र्र देगा, जैसा उसने मदीना में मुसलमानों को दिया। जो पुलिस आज तुम पर लाठीचार्ज कर रही है, वह कल तुम्हें सलामी देगी।’’ इमरान ने आत्मसमर्पण करने से इन्कार करते हुए ङ्क्षहसा को प्रोत्साहित किया, यह जानते हुए कि उन्हें गिरफ्तार करके राज्य उन्हें अलग-थलग कर सकता है, आगामी चुनावों में उनके प्रभाव को सीमित कर सकता है। 

2016 में नवाज शरीफ के सत्ता से बेदखल होने और शहबाज के सेना की लाइन पर चलने से इन्कार करने के बाद, इमरान प्रधानमंत्री के रूप में एकमात्र विकल्प बने रहे। राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों को भुला दिया गया, राजनीतिक दलों को तोड़ दिया गया और उनकी जीत सुनिश्चित करने के लिए चुनाव तय किए गए। उन्होंने अपने चुनाव अभियान के दौरान किए गए हर वादे से पलटने के बावजूद ईमानदारी और क्षमता का एक संस्कारी व्यक्तित्व बनाने के लिए पी.एम. के रूप में अपनी स्थिति का फायदा उठाया। 

एक सच्चे पंथ नेता की विशेषता ‘आलोचना के प्रति असहिष्णुता’ है और यही इमरान प्रदर्शित करना जारी रखे हैं। वह अपने सत्ता से बाहर होने पर साजिश के सिद्धांतों को जन्म देते हैं, राजनेताओं और सेना पर उसके खिलाफ काम करने का आरोप लगाते हैं और हत्या के प्रयासों की चेतावनी देते हैं, जबकि यह संदेश देते हैं कि वह अकेले ही पाकिस्तान को उसकी मौजूदा गड़बड़ी से बचा सकते हैं, यह अनदेखा करते हुए कि ये उसकी त्रुटिपूर्ण नीतियां थीं, जिनसे देश अपनी मौजूदा स्थिति में है। 

किसी भी कल्ट नेता की तरह इमरान के भाषण भी आत्ममुग्धता, भव्यता से भरे होते हैं। वह राज्य पर सेना के व्यापक प्रभाव को हटाने की धमकी भी देते हैं। वह न्याय की मांग करते हैं लेकिन उसे प्रस्तुत करने से इन्कार करते हैं, जो यह संदेश देता है कि वह किसी भी मानवीय न्याय प्रणाली से ऊपर हैं और वर्तमान न्यायिक प्रणाली उन्हें गिरफ्तार करने और खत्म करने के लिए बनाई गई है। 

इमरान ने अपने आवास से अनुयायियों को संबोधित किया और उन्हें अपने बचाव में आने के लिए उकसाया, आंसू गैस के गोले दागे, अपने किले को एक स्वतंत्र राज्य के रूप में पेश किया, जिसे भंग नहीं किया जा सकता था। जब सुरक्षा बल बचने के लिए पीछे हटे तो इमरान और उनके समर्थकों ने राज्य की हार पर जीत का जश्न मनाया। इस्लामाबाद और रावलपिंडी में मौजूदा व्यवस्था इमरान की मांगों पर गिरफ्तारी वारंट रद्द करने से हिचक रही थीं। अदालतें बचाव में आईं और इमरान खान को खुद को पेश करने के लिए एक अतिरिक्त दिन दिया। यह सरकार की ओर से समर्पण का विनम्र संदेश था, जिसने इमरान की ताकत को बढ़ाया। 

यह सुनिश्चित करने के लिए कि हिंसा के कृत्यों की पुनरावृत्ति न हो, पुलिस ने तलाशी लेते हुए इमरान के आवास की दीवारों और दरवाजों को तोड़ दिया, जैसा कि दुनिया भर में पंथों पर अंकुश लगाने के लिए किया गया है। यह सब तब हुआ जब इमरान कोर्ट जा रहे थे। समय एकदम सही था क्योंकि इमरान के पास पीछे मुड़कर कार्रवाई में बाधा डालने का कोई विकल्प नहीं था। उनके निवास से गोला-बारूद और बमों की बरामदगी ने संकेत दिया कि इमरान एक लंबी घेराबंदी के लिए तैयार थे और किसी भी पुलिस कार्रवाई को रोक सकते थे। पाकिस्तान में इमरान खान पंथ ने जड़ें जमा ली हैं। यदि इसे कम नहीं किया गया तो यह एक चुनौती होगी क्योंकि यह एक तानाशाह के उभरने के लिए स्थितियां पैदा कर सकता है, जो कानून के आधार पर नहीं, बल्कि अपनी सनक के आधार पर शासन करेगा।-मेजर जनरल हर्ष कक्कड़ 

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