Baglamukhi Jayanti 2022: हर संकट से उबारेंगी मां बगलामुखी, करें प्रमुख मंदिरों का दर्शन

Edited By Niyati Bhandari, Updated: 09 May, 2022 09:13 AM

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दस महाविद्याओं के अंतर्गत 10 देवियां मुख्य मानी जाती हैं- काली, तारा, महाविद्या, भुवनेश्वरी, त्रिपुर भैरवी, छिन्नमस्तिका, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला। इनमें से आठवीं महाविद्या मां बगलामुखी चिंता

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Baglamukhi Jayanti 2022: दस महाविद्याओं के अंतर्गत 10 देवियां मुख्य मानी जाती हैं- काली, तारा, महाविद्या, भुवनेश्वरी, त्रिपुर भैरवी, छिन्नमस्तिका, धूमावती, बगलामुखी, मातंगी और कमला। इनमें से आठवीं महाविद्या मां बगलामुखी चिंता निवारक, संकट नाशिनी हैं जिन्हें पिताम्बरा भी कहते हैं। इनकी साधना प्राय: शत्रु भय से मुक्ति और वाक्सिद्धि के लिए की जाती है। 

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वर्तमान युग महत्वाकांक्षा एवं संघर्ष का युग है और न चाहते हुए भी हमारे जीवन में शत्रु, बाधाएं और समस्याएं हैं। आज प्रत्येक व्यक्ति एक-दूसरे से आगे बढ़ने की होड़ में लगा हुआ है। ऐसे विकट काल में मां बगलामुखी की साधना परम उपयोगी व सहायक है। इनका चिंतन-मनन करने से मनुष्य को कोई भय नहीं रहता। 

बगलामुखी को अग्नि पुराण में सिद्ध विद्या कह कर संबोधित किया गया है। माता बगलामुखी भोग और मोक्ष दोनों देने वाली हैं। सांख्यायन तंत्र के अनुसार कलियुग के तमाम संकटों का निवारण करने में भगवती बगलामुखी की साधना उत्तम मानी गई है। बगलामुखी माता की साधना के लिए दृढ़ निश्चय, आत्मविश्वास तथा निर्मल चित्त का होना अति आवश्यक है। स्वच्छता का विशेष ध्यान रखें। बगलामुखी शब्द संस्कृत भाषा के ‘वल्गा’ का अपंभ्रश है, जिसका अर्थ होता है ‘दुल्हन’। मां के अलौकिक सौंदर्य और स्तम्भन शक्ति के कारण ही इन्हें यह नाम प्राप्त है। 

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Maa Baglamukhi Devi Mandir माता के तीन प्रमुख मंदिर
बगलामुखी देवी का प्रकाट्य स्थल गुजरात के सौराष्ट्र क्षेत्र में माना गया है। देश में मां बगलामुखी के तीन प्रमुख ऐतिहासिक मंदिर माने गए हैं जो दतिया (मध्य प्रदेश), कांगड़ा (हिमाचल) तथा बलखेड़ा जिला शाजापुर (मध्य प्रदेश) में हैं। तीनों ही मंदिर अलग-अलग महत्व रखते हैं। यहां देश भर से शैव और शाक्त मार्गी साधु-संत तांत्रिक अनुष्ठान के लिए आते रहते हैं। 

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हिमाचल में कांगड़ा जिला के रसीताल देहरा सड़क के किनारे वनखंडी में स्थित सिद्धपीठ माता बगलामुखी मंदिर की द्वापर युग में पांडवों द्वारा अज्ञातवास के दौरान एक रात में ही स्थापना की गई थी। वहां सर्वप्रथम अर्जुन और भीम द्वारा युद्ध में शक्ति प्राप्त करने तथा माता बगलामुखी की कृपा पाने के लिए विशेष पूजा की गई। मंदिर के साथ प्राचीन शिवालय में आदमकद शिवलिंग स्थापित है जहां लोग माता के दर्शन के उपरांत शिवलिंग का अभिषेक करते हैं।

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How do you worship Baglamukhi Mata बगलामुखी अनुष्ठान में पीले रंग, पीले वस्त्र, पीले पुष्प, पीले पदार्थ, हल्दी की गांठ का विशेष महत्व है। मां बगलामुखी की उपासना साध्य साधक और गुरु के सान्निध्य में ही की जानी चाहिए।

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