आप भी जानकर हो जाएंगे हैरान आखिर क्यों, महाभारत युद्ध के बाद शकुनि को मिला स्वर्ग और पांडव गए नर्क

Edited By Prachi Sharma,Updated: 10 Jul, 2024 11:40 AM

mahabharat story

कसर ये सुनने में आते है कि जो व्यक्ति बुरे कर्म करता है उसे अंत समय में नर्क का सामना करना पड़ता है और वहीं जो व्यक्ति अच्छे कर्म करता है उसे अंत समय में स्वर्ग की प्राप्ति होती है। स्वर्ग और नर्क हमे अंत

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Mahabharat Story: अकसर ये सुनने में आते है कि जो व्यक्ति बुरे कर्म करता है उसे अंत समय में नर्क का सामना करना पड़ता है और वहीं जो व्यक्ति अच्छे कर्म करता है उसे अंत समय में स्वर्ग की प्राप्ति होती है। स्वर्ग और नर्क हमे अंत समय में क्या मिलेगा, ये हमारे कर्मों पर निर्भर करता है। इसी का सबसे बड़ा उदाहरण है महाभारत। महाभारत युद्ध में पांडवों में धर्म का साथ और कौरवों ने अधर्म का साथ दिया था। लेकिन आपको ये सुनकर हैरानी होगी कि जब युधिष्ठिर  स्वर्ग पहुंचे उन्होंने देखा कि उनके भाई और पत्नी सब नर्क में हैं और शकुनि स्वर्ग में हैं। 

Is this the reason why Shakuni reached heaven इस वजह से शकुनि पहुंचे थे स्वर्ग ?
महाभारत की एक कथा के अनुसार शकुनि ने जानबूझ कर कोई भी पाप नहीं किया था। वो सिर्फ अपने परिवार के खिलाफ बदला ले रहे थे। शकुनि की बहन गांधारी एक बहुत ही सुन्दर राजकुमारी थी। उनके पैदा होने के बाद पंडितों का ये कहना था कि इनके पति की उम्र बहुत कम होगी। इस दोष से बचने के लिए शकुनि के पिता ने गांधारी की एक बकरी से शादी करा दी। उसके बाद उस बकरी को मार दिया। 

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शकुनि अपनी बहन से बहुत प्यार करते थे और जब उन्हें पता चला कि जब उनका विवाह जन्मांध धृतराष्ट्र से किया जा रहा है, तब वो बहुत क्रोधित हो गए।  इसके पश्चात जब भीष्म पितामह को पता लगा कि उनके घर की बहु एक विधवा है तो उन्हें बहुत गुस्सा आया। इस वजह ही उनके पूरे परिवार को पितामह ने जेल में डाल दिया। थोड़े दिनों बाद धीरे-धीरे शकुनि का परिवार शकुनि की आंखों के सामने खत्म होता चला गया। मान्यताओं के अनुसार उन सभी की अस्थियां ही शकुनि के जादुई पासे बन गए थे, इन पासो की वजह से ही शकुनि कभी नहीं हारता था। 

शकुनि ने अपने पूरे जीवन में सिर्फ अपने परिवार का ही बदला लिया था। इस वजह से उन्हें अंत समय में स्वर्ग मिला। 

Due to these reasons the Pandavas went to hell इन कारणों से पांडवों को मिला नर्क
एक कथा के अनुसार अपना सारा राज-पाठ उत्तरा और अभिमन्यु के पुत्र परीक्षित को सौंपकर पांचों पांडव, द्रौपदी और एक कुत्ता स्वर्ग यात्रा की तरफ चल दिए। उस दौरान धीरे-धीरे सबकी मृत्यु होती चली गई। मान्यताओं के अनुसार सबसे पहले  द्रौपदी का अंत हुआ क्योंकि वो पांचों में से अर्जुन को सबसे ज्यादा प्रेम करती थी। 

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द्रोपदी के बाद सहदेव गिर पड़े, भीम ने युधिष्ठिर से पूछा सहदेव क्यों गिरा ?

युधिष्ठिर ने कहा कि सहदेव को अपनी बुद्धि पर बहुत घमंड था, इस वजह से ऐसा हुआ। 

सहदेव के बाद नकुल भी गिर गए। तब युधिष्ठिर ने कहा कि नकुल को अपनी सुंदरता पर बहुत घमंड था तो इस वजह से नकुल की यह हालत हुई। 

इसके बाद अर्जुन अपने पराक्रम के गुरुर के कारण गिर गए और उनकी भी मृत्यु हो गई। 

अंत में भीम ने गिरते समय अपनी वजह पूछी तो युधिष्ठिर कहने लगे कि तुम बहुत ज्यादा खाते थे और अपने साहस और बल का झूठा प्रदर्शन करते थे। 

इस सब के बाद अंत में सिर्फ युधिष्ठिर रह गए स्वर्ग के द्वार खुल गए। युधिष्ठिर उस कुत्ते को भी अपने साथ स्वर्ग ले जाना चाहते थे लेकिन इंद्र इसके लिए राजी नहीं हुए। इसके बाद युधिष्ठिर अपने असली रूप यमराज में आ गए। 

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