वास्तु गुरु कुलदीप सलूजा: नई संसद के डिजाईन के लिए गलत तर्क दे रहे आर्किटेक्ट बिमल पटेल !

Edited By Niyati Bhandari,Updated: 02 Jul, 2024 09:21 AM

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नई संसद के आर्किटेक्ट श्री बिमल पटेल द्वारा यह जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है कि नए संसद भवन ‘सेण्ट्रल विस्टा’ की जो डिजाइन उन्होंने बनाई है, वह त्रिभुजाकार ‘श्री यंत्र

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नई संसद के आर्किटेक्ट श्री बिमल पटेल द्वारा यह जानकारी सोशल मीडिया पर वायरल हो रही है कि नए संसद भवन ‘सेण्ट्रल विस्टा’ की जो डिजाइन उन्होंने बनाई है, वह त्रिभुजाकार ‘श्री यंत्र और त्रिदेव के आधार पर’ बनी है। उन्होंने कहा कि नई संसद भवन शिव-शक्ति के दिव्य मिलन का प्रतिनिधित्व करती है।

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Bimal Patel, The Architect of New Parliament, explains why the Sahpe is a Triangle.

He says it's based on Triangles in 'Shree Yantra' & 'Tridev'.

The Shri Yantra consists of 9 interlocking triangles, 4 upwards ones which represent 'Shiva' & 5 downward ones represent 'Shakti'.

The Central Park looks like shape of New Parliament building.

"The new Parliament building represents Shiva shakti's divine union for creation".

The Crown is Kashmir.

This is why I always call Kashmir bhoomi of Shiv and Shakti.

बिमल पटेल द्वारा दिया गया यह तर्क वास्तु की दृष्टि से पूर्णतः गलत है।

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विश्व की सभी सभ्यताओं में धार्मिक प्रतीकों के प्रति बहुत आस्था है। भारतवर्ष में भी स्वस्तिक, ओम्, श्री, पंचागुलक हाथ, 786, एक ओंकार इत्यादि धार्मिक प्रतीकों के साथ-साथ विभिन्न प्रकार के यंत्र जैसे लक्ष्मी यंत्र, श्रीयंत्र, कुबेर यंत्र, काली यंत्र, सूर्य यंत्र इत्यादि के प्रति गहरी आस्था एवं श्रद्धा है। दुनिया का प्रत्येक धर्म ईश्वर या किसी न किसी अलौकिक शक्ति पर विश्वास और आस्था रखना सिखाता है। श्री पटेल के अनुसार नई संसद त्रिकोण आकार की है, जो विभिन्न धर्मों में से एक पवित्र ज्यामिति आकृति होती है।

श्री बिमल पटेल के यू ट्यूब पर सेंट्रल विस्टा प्रोजेक्ट के लगभग पौने दो घंटे का प्रजेंटेशन मैंने देखा है, जिसमें उन्होंने प्रोजेक्ट के बारे में बहुत ही विस्तार से जानकारी दी है। प्रेजेंटेशन देखकर लगता है कि यह पूरा प्रोजेक्ट मॉडर्न टेक्नोलॉजी को समाहित किए हुए बहुत ही सुंदर, बहुत ही भव्य और वर्तमान और भविष्य की आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए अत्याधिक सुविधाजनक होगा। प्रजेंटेशन से एक बात और स्पष्ट हो जाती है कि जनसामान्य में फैली यह धारणा गलत है कि पुराने संसद भवन का डिजाइन मध्य प्रदेश के मुरैना में चौंसठ योगिनी मंदिर से प्रेरित है। इसी प्रकार यह भी नहीं कहा जा सकता कि नए संसद भवन का डिजाइन खजुराहो के पास विदिशा-अशोक नगर रोड़ पर स्थित बिजा मण्डल (जिसे विजया मंदिर भी कहा जाता है) से प्रेरित है।

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अब एक नया विवाद नई संसद भवन के डिजाइन और आर्किटेक्ट को लेकर आया है। राजनीतिक विपक्षी पार्टियां का आरोप है कि नई संसद की बिल्डिंग का डिजाइन अफ्रीकी देश सोमालिया की पुरानी संसद की बिल्डिंग की नकल है। उनके अनुसार, सोमालिया ने जिस संसद को खारिज कर दिया अब वह संसद नये भारत की प्रेरणा है। दोनों देशों की संसद एक जैसी है। क्या आत्मनिर्भर भारत में हम इतने भी निर्भर नहीं हो पाये कि अपने दिमाग से नई संसद की डिजाइन तैयार कर सके ? यह बात भी सही नहीं है, क्योंकि दोनों संसद की आकृति जरूर त्रिभुजाकार है, लेकिन दोनों संसद की बनावट में जमीन-आसमान का अंतर है। भारत की नई संसद बहुत भव्य और विशाल है।

भारत के नए संसद भवन का प्लॉट ही सड़कों के कारण त्रिभुजाकार है, इस कारण प्लॉट के अंदर त्रिभुजाकार भवन का निर्माण किया गया है। जबकि भारतीय वास्तुशास्त्र में केवल वर्गाकार या आयताकार प्लॉट को ही शुभ बताया गया है, त्रिकोण आकार के प्लॉट को नहीं। नई संसद त्रिकोणाकार है, साथ ही इस के अंदर बनी बिल्डिंग में से दो बिल्डिंग एक लोकसभा के लिए और दूसरी राज्यसभा के लिए अर्ध वृत्ताकार है और एक षटकोणीय आकार की बिल्डिंग डायनिंग हॉल की है। इन तीनों के मध्य में एक त्रिकोणीय आकार की कांस्टीट्यूशन गैलरी भी बनी है।

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वास्तुशास्त्र के अनुसार, त्रिभुजाकार प्लॉट पर बने भवन में रहने वाले हमेशा अपने शत्रुओं (विपक्ष) से परेशान रहते हैं। उन्हें शत्रुओं से निपटने में ही अपनी पूरी ऊर्जा लगानी पड़ती है। देश के संदर्भ में यह शत्रु देश के अंदर के भी हो सकते हैं और सीमा पार के भी।

त्रिकोणाकार के कारण नए संसद भवन की उत्तर दिशा में जहां एक ओर उत्तर के साथ मिलकर उत्तर-वायव्य का बढ़ाव है, वहीं दूसरी ओर दक्षिण दिशा में दक्षिण दिशा के साथ मिलकर दक्षिण-नैऋत्य का बढ़ाव है। जबकि पूर्व और पश्चिम दिशा सीधी है। वास्तुशास्त्र के अनुसार, यदि उत्तर के साथ मिलकर वायव्य में बढ़ाव होता है तो ऐसे भवन में रहने वालों की आर्थिक स्थिति खराब रहती है, सुख का अभाव, तनाव, संतान का नष्ट (देश के नागरिक), अपमान, मानसिक अशान्ति और दुःख से पीड़ा होती है। इसी प्रकार दक्षिण के साथ मिलकर अगर नैऋत्य में बढ़ाव हो तो वहां रहने वाले रोगों, प्राण-भय और अकाल मृत्यु के भय से पीड़ित रहते हैं।

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श्री बिमल पटेल के अनुसार, नए संसद भवन में प्रवेश के लिए छः द्वार बनाए हैं, मध्य पूर्व का द्वार सांसदों के लिए, मध्य उत्तर और मध्य दक्षिण का द्वार पब्लिक के लिए, मध्य पश्चिम का द्वार स्पीकर और वाइस प्रेसिडेंट के लिए रखे गए हैं। वायव्य का द्वार प्राइम मिनिस्टर और प्रेसिडेंट के लिए तथा आग्नेय कोण का द्वार सेरेमोनियल इंट्री के लिए रहेगा।

मध्य उत्तर, मध्य दक्षिण, मध्य पूर्व एवं मध्य पश्चिम दिशा के द्वार शुभ स्थिति में है। महत्वपूर्ण दो बड़े द्वार एक वायव्य कोण और दूसरा आग्नेय कोण में अशुभ स्थिति में हैं। वह द्वार जहां से प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति का आना-जाना रहेगा, वह वायव्य कोण का द्वार है। वास्तु शास्त्र के अनुसार वायव्य कोण का द्वार दुःखदायी, कलहकारी, बैर-भाव, मुकदमेबाजी व बदनामी लाने वाला होता है। सेरेमोनियल इंट्री के लिए आग्नेय कोण का द्वार रहेगा। वास्तु शास्त्र के अनुसार आग्नेय कोण का द्वार कलह, विवाद, अग्निभय का कारण बनता है।

उपरोक्त वास्तु दोषों के कारण ही जब से प्रधानमंत्री मोदी ने नई संसद ‘सेण्ट्रल विस्टा’ का उद्घाटन किया है, तब से इस संसद भवन को लेकर कोई न कोई विवाद की स्थिति बनी हुई है। नई संसद के उद्घाटन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को न बुलाने तथा उनसे उद्घाटन न करवाने पर पूरे विपक्ष ने उद्घाटन का ही बॉयकाट कर दिया। बिना विपक्ष और बिना राष्ट्रपति की उपस्थिति में ही मोदी जी ने नई संसद का उद्घाटन कर दिया। उद्घाटन के दिन ही गोल्ड मेडलिस्ट पहलवान बेटियों के साथ विवाद की स्थिति बनी। देखने में आ रहा है कि उद्घाटन के बाद से ही देश में विवाद की स्थितियां बन रही हैं। नई संसद के वास्तुदोष अपना प्रभाव दिखाने लगे हैं, और निश्चित ही भविष्य में भी वास्तु दोष के प्रभाव देशवासियों को देखने को मिलेंगे।

वास्तु गुरु कुलदीप सलूजा
9425091601

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